संतों को सच कौन सिखाए!

गत सौ सालों से शुरू हुई अनेक वैचारिक परंपराओं में सब से बुरी है: सभी धर्मों को एक बताना। कुछ लोगों ने वैदिक ‘‘एकम् सद विप्र बहुधा वदन्ति’’ को सभी रिलीजनों पर लागू कर दिया।