यह फैसला तर्कसंगत नहीं

सर्वोच्च न्यायालय की यह बात तो बिल्कुल ठीक है कि भारत का संविधान नागरिकों को अपने ‘धर्म-प्रचार’ की पूरी छूट देता है और हर व्यक्ति को पूरा अधिकार है कि वह जिसे चाहे, उस धर्म को स्वीकार करे। हर व्यक्ति अपने जीवन का खुद मालिक है। उसका धर्म क्या हो और उसका जीवन-साथी कौन हो,… Continue reading यह फैसला तर्कसंगत नहीं