तलब है कि लिखा जाए

हर व्यक्ति को कोई-न-कोई तलब होती है जिसके अभाव में वह बैचेन हो जाता है। कोई सिगरेट, तंबाकू की तलब करता है तो कोई शराब के बिना बहुत परेशान हो जाता है।

मध्यप्रदेश की राजनीति पर किताब

रिपोर्टर डायरी लिखने का सारा श्रेय हरिशंकर व्यासजी को जाता है। जब मैं पत्रकारिता करते समय उन्हें किस्से कहानियां सुनाता था तब वे जोर देकर मुझसे कहते थे कि इन्हें लिपिबद्ध करना शुरु कर दो और ऐसा नहीं किया तो तुम यह सब वक्त के साथ भूलोंगे और दिमाग की उर्वरता को जाया करोगे, हिंदी पाठक तुम्हारी बातों से वंचित रह जाएंगा। और मैंने जनसत्ता में रहते हुए ही बिना अपने नाम के यह डायरी लिखना शुरु कर दी क्योंकि व्यासजी के जाने के बाद वहां आने वाला लगभग हर संपादक तो मानो मेरी जान का दुश्मन था व वे मुझे ऐसा करने की इजाजत नहीं देते। हाल ही में जब युवा पत्रकार ब्रजेश राजपूत को अपनी पत्रकारिता के अनुभवों को लिपिबद्ध करते देखा तो मुझे बहुत अच्छा लगा क्योंकि समय रहते ही उन्होंने तमाम .जानकारियों और विवरणों को पुस्तक के रुप में रखकर उन्हें एक दस्तावेज बना दिया है। उन्होंने मध्यप्रदेश के विधानसभा व लोकसभा चुनाव के बाद अपनी पुस्तक ‘चुनाव है बदलाव का’ प्रकाशित की है। उन्होंने इससे पहले अपनी पहली किताब चुनाव, राजनीति रिपोर्टिंगः मध्यप्रदेश चुनाव लिखी थी जो कि 2015 में आयी थी। मध्यप्रदेश के चुनाव इतिहास में पंद्रहवी विधानसभा के चुनाव हमेशा याद रखा जाएगा… Continue reading मध्यप्रदेश की राजनीति पर किताब

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