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Tuesday, April 13, 2021
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Reporter Diary

अवसाद का वक्त और बख्शीजी की याद

पहले मैंने ‘डिप्रेशन’ व ‘अवसाद’ शब्द ही सुने थे पर उनकी यह अनूभुति, यह महसूस नहीं हुआ कि जब आदमी इनसे गुजरता है तो क्या होता है। मगर मैं पिछले कुछ समय से मैं इससे गुजर रहा हूं।

न बारिस आ रही, न वैक्सीन दिख रही!

चंद महीनों पहले तक मुझे कोरोना व मानसून की खबरें पढ़ना बहुत अच्छा लगता था। इसका कारण यह था किइनकी खबरें मेरे मन में आशा व उम्मीद का संचार कर देती थी।

फर्जी पत्रकार और उनकी हिम्मत

एक मित्र ने मुझे कुछ फर्जी पत्रकारो की गिरफ्तारी के बारे में सूचनाएं भेजी हैंऔर बताया है कि कुछ लोग पत्रकार न होते हुए भी फर्जी पत्रकार बनकर हालात का फायदा उठा रहे हैं।

टाइगर की चिंता में फिल्म और…

कुछ लोग गजब के प्रतिभाशाली होते हैं। वे हर हालात का अपनी क्षमता व योग्यता के अनुसार फायदा उठाते हैं। दिल्ली के जाने-माने कस्टम व एक्साइज के वकील सुनील कपूर को ही ले लें। वे इन दिनों चर्चित गायक बन गए हैं।

तलब है कि लिखा जाए

हर व्यक्ति को कोई-न-कोई तलब होती है जिसके अभाव में वह बैचेन हो जाता है। कोई सिगरेट, तंबाकू की तलब करता है तो कोई शराब के बिना बहुत परेशान हो जाता है।

मध्यप्रदेश की राजनीति पर किताब

रिपोर्टर डायरी लिखने का सारा श्रेय हरिशंकर व्यासजी को जाता है। जब मैं पत्रकारिता करते समय उन्हें किस्से कहानियां सुनाता था तब वे जोर देकर मुझसे कहते थे कि इन्हें लिपिबद्ध करना शुरु कर दो और ऐसा नहीं किया...
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