Weird jobs : दुनिया की ऐसी अजीब नौकरियां जिनके बारें में सुनकर आप अपनी जॉब ही छोड़ देंगें..

जापान | डेढ़ साल से दुनिया कोरोना का प्रकोप झेल रही है। इसमें लोगों ने कई तरह के उतार-चढ़ाव देखें है। कोरोना से बीच-बचाव के लिए लॉकडाउन भी लगया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों के बेरोजगार होने की रिपोर्ट सामने आई है। ऐसें में अब तो हालत यह हो गई है कि लोग बेरोजगारी से बचने के लिए और अपना परिवार पालने के लिए किसी भी तरह की नौकरी करने को तैयार है। लेकिन बहुत समय पहले से लोग अजीब नौकरियां कर रहे है। दुनिया में ऐसी नौकरियां है जिनके बारे में कभी सुना भी नहीं होगी और ना ही सोचा होगी । also read: बुलाती है लेकिन जाने का नहीं … सड़क पर मदद की गुहार लगाने के बाद साथियों के साथ मिलकर करती थी लूटपाट ट्रेन में धक्का लगाने की नौकरी जापान में एक जॉब ऐसी भी है, जिसमें स्टाफ को ट्रेन में धक्का लगाना होता है। दरअसल, यहां की ट्रेन में लोगों की खचाखच भीड़ हो जाती है, जिस वजह से कई बार ट्रेन के दरवाजे नहीं बंद हो पाते हैं। इस जॉब के लिए नियुक्त किए गए लोग भीड़ को बाहर से धक्का देकर ट्रेन के दरवाजे को बंद कराने में मदद करते हैं। सांपों… Continue reading Weird jobs : दुनिया की ऐसी अजीब नौकरियां जिनके बारें में सुनकर आप अपनी जॉब ही छोड़ देंगें..

आइये जानते है तरबूज का इतिहास और इसका नया शोध, सबसे पहले तरबूज मिस्र में उगाए गए..

वैसे तो फलों का राजा आम है लेकिन हर फल का अपना महत्व है। हर फल का एक इतिहास है आज हम तरबूज के इतिहास के बारे में जानेंगे। वे सबसे पहले कहां उगाए गए। सबसे ज्यादा कहां उगाए, कहां कहां और कैसे फैले।इनके उगाने के पीछे क्या धारणाथी? आज बात करेंगे तरबूज की..इनके इतिहास के बारे में। इनमें तरबूज की कहानी जरा रोचक है क्योंकि हाल ही में हुए एक शोध ने तरबूज की वास्तविक उत्पत्ति के बारे में दशकों पुरानी धारणा को तोड़ा है। अब नए शोध के मुताबिक तरबूज दक्षिणी अफ्रिका में नहीं बल्कि सबसे पहले मिस्र में उगाए गए थे। 4,000 वर्ष पहले नील नदी के रेगिस्तान में खाए जाते थे प्रोसिडिगंस ऑप द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस में प्रकाशित इस नए अध्ययन में घरेलू तरबूज के उत्पत्ति की कहानी फिर से लिखी गई है। वैज्ञानिकों ने सभी और सैकड़ों प्रजातियों वाले तरबूज जो ग्रीनहाउस पौधों से पैदा किए थे, के डीएनए का अध्ययन किया और पाया कि तरबूज उत्तरपूर्वी अफ्रिका के जगंली फसल से आए थे। इस अध्ययन ने 90 साल पुरानी गलती को सुधारा है। तब से कहा जा रहा है कि रसीले तरबूज दक्षिणी अफ्रीकी सिट्रॉन मेलन की श्रेणी में ही आया करते… Continue reading आइये जानते है तरबूज का इतिहास और इसका नया शोध, सबसे पहले तरबूज मिस्र में उगाए गए..

सब्र रखिये हम भी कोरोना फ्रेंडली हो जाएंगे-स्टडी

भारत सवा साल से कोरोना वायरस लड़ रहा है। और इस पर हर दिन अलग-अलग शोध और स्टडी होती रहती है। यब वायरस दिन-प्रतिदिन अपना रूप बदल रहा है। वर्तमान समय में कोरोना मजबूत होता जा रहा है और अपना अलग-अलग रूप सामने ला रहा है। अभी वैज्ञानिक कोरोना को जितना शक्तिशाली बता रहे एक स्टडी में सामने आया है कि कोरोना वायरस भविष्य में सर्दी-झुकाम बनकर रह जाएगा। अगले दशक तक कोविड-19 के लिए जिम्मेदार कोरोना वायरस सामान्य सर्दी-जुकाम वाला वायरस रह जाएगा। एक अध्ययन में यह कहा गया है. शोध पत्रिका ‘वायरसेस’ में प्रकाशित एक अध्ययन में गणितीय मॉडल के आधार पर लगाए गए अनुमान में कहा गया है कि मौजूदा महामारी के दौरान मिले अनुभवों से हमारा शरीर प्रतिरक्षा तंत्र में बदलाव कर लेगा।   इसे भी पढ़ें Corona Third Wave : अगर कोरोना की तीसरी लहर आई तो कितनी खतरनाक होगी ये लहर?? वायरस में बदलाव के करारण बीमारी का गंभीरता कम हो जाएगी अमेरिका में यूटा विश्वविद्यालय में गणित और जीव विज्ञान के प्रोफेसर फ्रेड अडलेर ने कहा कि यह एक संभावित भविष्य को दर्शाता है, जिसके समाधान के लिए अभी तक तमाम कदम नहीं उठाए गए हैं। अडलेर ने कहा कि आबादी के बड़े हिस्से… Continue reading सब्र रखिये हम भी कोरोना फ्रेंडली हो जाएंगे-स्टडी

कंपनी प्राइवेसी पॉलीसी पर काम कर रहा फेसबुक

यूजर्स की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को लेकर गहन जांच का सामना कर रहे फेसबुक ने कहा कि वह नियमित तौर पर अनुसंधान और इनोवेशन में निवेश करना जारी रखेगा

दोपहर में लंबी नींद से दिल की बीमारी, मौत का खतरा

ज्यादातर लोगों का ऐसा मानना है कि दोपहर के वक्त नींद लेने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन एक हालिया शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि इस दौरान एक घंटे से अधिक समय तक के लिए सोना दिल की बीमारी के जोखिम को बढ़ा देता है

कृषि क्षेत्र में अनुसंधान करें आईआईटी: नायडू

उप राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने देश के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों – आईआईटी से कृषि क्षेत्र में अनुसंधान करने का आह्वान करते हुए कहा कि सस्ती

दिल्ली में साइकिल चालकों की संख्या में 3 गुना वृद्धि

भारतीय प्राद्योगिकी संस्थान-दिल्ली और रुड़की के पूर्व छात्रों द्वारा किए गए शोध से पता चला है कि लॉकडाउन के कारण दिल्ली में साइकिल उपयोग में लाने वालों की संख्या में तीन गुना वृद्धि हुई

भारत में चिकित्सकीय अनुसंधान समय की मांग : डॉ0 कांग

चिकित्सकीय सुविधाएं भारत के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचे एवं सही इलाज के लिए चिकित्सा के साथ-साथ मूलभूत विज्ञान के क्षेत्र में सघन अनुसंधान समय की मांग है।

चावल के निर्यात से 32800 करोड़ की विदेशी मुद्रा अर्जित

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक अशोक कुमार सिंह ने बासमती धान पर अनुसंधान तेज करने की जरुरत पर बल देते हुये गुरुवार को कहा कि वर्ष 2018-19 के दौरान देश को बासमती चावल

उच्च शिक्षा क्षेत्र में निरंतर अनुसंधान जरूरी : राज्यपाल

बिहार के राज्यपाल फागू चौहान ने गुणवतापूर्ण अनुसंधान के लिए समुचित शिक्षण-प्रणाली एवं आधारभूत संरचना विकसित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए

आईफोन के हैक होने का खतरा 167 गुना ज्यादा: शोध

लंदन। जैसा कि तीसरी पार्टी के जरिए स्मार्टफोन को हैक किया जाने का अंदेशा ज्यादा रहता है, ऐसे में ब्रिटेन के एक शोध में यह खुलासा हुआ है कि अन्य मोबाइल ब्रांडों की तुलना में आईफोन के हैक होने का खतरा 167 गुना अधिक है। ब्रिटेन स्थित फोन से संबंधिक मामलों को देखने वाली कंपनी केस 24 डॉट कॉम के टेक एक्सपर्ट (प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ) ने ये आंकड़े मासिक गूगस सर्च के विश्लेषण से एकत्र किए हैं, जिसमें देखा गया कि कितने ब्रिटिश नागरिक विभिन्न ऐप या स्मार्टफोन ब्रांड को हैक करने के बारे में जानकारी पाना चाहते हैं। ब्रिटेन में आईफोन के लिए किए गए सर्च की संख्या 10,040 थी, जो कि सैमसंग से अधिक है, वहीं सैमसंग को लेकर 700 सर्च किए गए हैं। सुत्रो के अनुसार, एलजी, नोकिया और सोनी जैसे फोन में हैकर्स की दिलचस्पी कम थी, क्रमश: सभी ब्रांडों को लेकर मासिक तौर पर 100 से भी कम सर्च किए गए हैं। मात्र 50 सर्च के साथ सोनी सबसे निचले पायदान पर है। इसके साथ ही शोध के दौरान विशेषज्ञों को एक और बात पता चली कि 12310 ब्रिटिश लोग यह जानना चाहते हैं कि किसी अन्य के इंस्टाग्राम अकाउंट को कैसे हैक किया जाता है।… Continue reading आईफोन के हैक होने का खतरा 167 गुना ज्यादा: शोध

स्वस्थ जीवन का गुरुमंत्र है उपवास

भारतीय धार्मिक रीति-रिवाजों में कई अवसरों पर किये जाने वाले व्रत की परम्परा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किये गये शोध में वैज्ञानिक आधार मिला है। चिकित्सकों ने दावा किया है

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