यहां कोरोना की तीसरी लहर की हो गई एंट्री, 24 घंटे में 1000 से ज्यादा मौतें…

एक बार फिर से रूस से डराने वाली खबर सामने आई है. बताया गया है कि रूस में एक बार फिर से कोरोना महामारी कहर बनकर सामने…

महाशक्तियों के बीच क्या चल रहा?

अमेरिका ने एक बार फिर चीन के खिलाफ मोर्चा खोला है। अमेरिकी स्वास्थ्य मंत्री ने कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच करने की बात कही और राष्ट्रपति जो बाइडेन के चिकित्सा सलाहकार डॉ. एंथोन फॉची ने भी कहा कि वे इस बात को लेकर बहुत आश्वस्त नहीं हैं कि यह वायरस प्राकृतिक है। उन्होंने भी जांच की बात कही। ध्यान रहे पिछले साल जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति थे तब डॉक्टर फॉची ने इस वायरस के पीछे किसी किस्म की साजिश होने से इनकार किया था। उस समय दवा कंपनियों ने भी वैक्सीन के बारे में कहा था कि एक साल से पहले वैक्सीन नहीं आ पाएगी, जिसकी वजह से ट्रंप का अक्टूबर में वैक्सीनशन कराने का अभियान विफल हो गया था। और वे जैसे ही चुनाव हारे वैसे ही वैक्सीन आ गई। फार्मा लॉबी का यह खेल अपनी जगह है लेकिन वायरस को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ना कुछ नया संकेत देता है। भाजपा के सांसद और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार सुब्रह्मण्यम स्वामी ने एक ट्विट किया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि अमेरिका और रूस के बीच संबंध सुधार हो गया है। उनकी बात इस लिहाज से भी सही लग रही है क्योंकि पिछले… Continue reading महाशक्तियों के बीच क्या चल रहा?

रूस-पाकः भारत हाशिए में

भारत के विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला अभी-अभी मास्को होकर आए हैं। कोविड के इस भयंकर माहौल में हमारे रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और विदेश सचिव को बार-बार रूस जाने की जरूरत क्यों पड़ रही है

भारत किसी का पिछलग्गू नहीं

रुस के विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोव ने बर्र के छत्ते को छेड़ दिया है। उन्होंने रुस की अंतरराष्ट्रीय राजनीति परिषद को संबोधित करते हुए ऐसा कुछ कह दिया, जो रुस के किसी नेता या राजनयिक या विद्वान ने अब तक नहीं कहा था। 

रूस के अहम दौरे पर राजनाथ

वास्तविक नियंत्रण रेखा, एलएसी पर चीन के साथ चल रही तनातनी के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रूस के तीन दिन के दौरे पर गए हैं।

राहत की कुछ खबरें

रूस ने एलान किया है कि उसके यहां फिलहाल कोरोना वायरस के नए संक्रमणों पर विराम लगा गया है। यूरोप के ज्यादातर देशों में इस संक्रमण का ग्राफ या तो समतल हो गया है

रूस और चीन से ही सीख लें!

पहले चीन में शी जिनपिंग, फिर रूस में व्लादीमीर पूतिन, के सत्ता में स्थाई बने रहने के समाचार आए हैं। इस पर हमारा क्या रुख हो?  दोनों ही देशों के प्रेमी यहाँ अच्छी संख्या में हैं। चूँकि स्वतंत्र भारत में आरंभ से सत्ता में कम्युनिस्ट प्रभाव रहा, इसलिए भी यहाँ रूस चीन के प्रति लगाव, सदभाव की परंपरा बनी।तो क्या हमें आज भी रूस और चीन से कुछ सीखना चाहिए? आखिर, यहाँ शुरू से ही रूस व चीन से सीखने की परंपरा रही है। प्रथम प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू के लेखन, भाषण में रूस की प्रशंसा, और वहाँ के उदाहरण अंत तक नियमित मिलते हैं। फिर जब तक चीन ने 1962 ई. में हमला कर नेहरू को तमाचा नहीं लगाया, तब तक वे कम्युनिस्ट चीन की भी वैसी ही बड़ाई करते, उस का पक्ष लेते रहे थे। बहरहाल, कम से कम राजनीतिक सुधारों के लिए रूस और चीन से कुछ सीखने की जरूरत तो है। यह नहीं कि भारतीय राज्य-व्यवस्था एक-दलीय या तानाशाही हो जाए। लेकिन अनावश्यक तमाशे खत्म हों, और तिहरी चुनाव-प्रणाली की विशालकाय़ प्रक्रिया घटाई जाए। वैसे भी, संपूर्ण चुनाव राजनीतिक दलों के अंदरूनी अल्पतंत्र की बंधक है। अंततः इने-गिने लोग ही सब कुछ तय करते हैं। तो… Continue reading रूस और चीन से ही सीख लें!

और लोड करें