यूँ ही नहीं कोई तुलसी बन जाता!

मध्य काल में तुलसीदास एक ऐसे संत कवि हुए हैं, जिनकी सही विवेचना न उनके चाहने वालों ने की और न उनके विरोधियों ने। इसके बावजूद तुलसीदास पिछली पाँच शताब्दियों में अकेले ऐसे कवि हैं, जिनकी तरह की लोकप्रियता किसी को आज तक नहीं मिली।