दिल्ली-गुरुग्राम सीमा पूरी तरह सील

कोरोना वायरस महामारी के बीच अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए गुरुग्राम प्रशासन ने आज सुबह दिल्ली से लगी सीमा को पूरी तरह से सील कर दिया है।

नीति आयोग में कोरोना संक्रमित कर्मचारी, इमारत सील

नीति आयोग की इमारत ‘नीति भवन’ में एक कर्मचारी के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद आयोग की इमारत को सील कर दिया गया है

कोविड-19: नोएडा में 34 आवासीय इलाके सील

गौतम बुद्ध नगर प्रशासन ने बुधवार को कहा कि कोरोना वायरस प्रसार पर रोक के लिए नोएडा और ग्रेटर नोएडा के 34 आवासीय इलाके 15 अप्रैल तक सील रहेंगे। प्रशासन ने एक बयान में कहा

कोरोना रोकने के लिए छावनी इलाका हुआ सील

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कसाईबाड़ा इलाके में कई लोगों के कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद इसके आस-पास के लगभग 500 मीटर इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया गया है।

पलायन के और भी खतरे हैं

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात या केरल से प्रवासी मजदूरों के पलायन की दो तरह से व्याख्या हो रही है। पहली व्याख्या मानवीय आधार पर हो रही है। इन मजदूरों के बारे में लिखने और बोलने वाला हर आदमी भावुक हो जा रहा है। देश के अलग अलग राजमार्गों पर पैदल चल रही उनकी भीड़ को देख कर सबका हृद्य द्रवित हो रहा है। यह अलग बात है कि ये तमाम मजदूर अपनी झुग्गियों, खोलियों या कच्ची कॉलोनियों में हमेशा से ऐसी ही अमानवीय स्थितियों में रहते आए हैं, तब किसी को उन पर ध्यान देने की जरूरत नहीं समझ में आई थी। उनके पलायन की दूसरी व्याख्या कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ने के नजरिए से की जा रही है। सबको लग रहा है कि इस तरह से लाखों लोग अगर एक जगह से उठ कर दूसरी जगह पहुंचेंगे तो वे अपने साथ वायरस का संक्रमण भी ले जा सकते हैं। इसी तर्क के आधार पर इन मजदूरों के गृह राज्यों के मुख्यमंत्री इनको आने से रोक रहे हैं और इसी आधार पर इनको क्वरैंटाइन करने की व्यवस्था बनी है। पर इन प्रवासी मजदूरों के पलायन के दूसरे पहलुओं को भी देखने की जरूरत है। यह सिर्फ… Continue reading पलायन के और भी खतरे हैं

कोरोनाः सरकारी दिग्भ्रम क्यों ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के उन लोगों से माफी मांगी है, जिन्हें इस तालाबंदी (लाकडाउन) के कारण अपने गांवों की तरफ दौड़ना पड़ा है। लेकिन उन्होंने तालाबंदी की मजबूरी पर भी जोर दिया है। मोदी की इस विनम्रता और सहृदयता पर किसी को भी शक नहीं होना चाहिए। लेकिन मेरा निवेदन है सरकारें सारे कदम हड़बड़ी में क्यों उठा रही हैं? हर कदम उठाने के पहले वे आगा-पीछा क्यों नहीं सोचतीं? उन्होंने नोटबंदी की भयंकर भूल से भी कोई सबक नहीं सीखा। अब जबकि उ.प्र. के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने अपने लाखों नागरिकों को उनके गांवों तक पहुंचाने के लिए सैकड़ों बसें चला दी हैं तो प्रधानमंत्री ने आदेश जारी कर दिया है कि सारे राज्यों की सीमाएं बंद कर दी जाएं और राज्यों के अंदर भी जिलाबंदी कर दी जाए। योगी की सरकार भाजपा की है, कांग्रेस की नहीं है लेकिन भाजपा की ही केंद्र सरकार ने अब उसके सारे प्रयत्नों पर पानी फेर दिया है। मैं ने सभी मुख्यमंत्रियों से अनुरोध किया था कि वे कृपया तीन दिनों के लिए इस यात्रा की सुविधा दे दें। कुछ राज्यों ने यह काम शुरु भी कर दिया था लेकिन अब पुलिसवाले उन दिहाड़ी मजदूरों, छात्रों और कर्मचारियों की पिटाई… Continue reading कोरोनाः सरकारी दिग्भ्रम क्यों ?

सीमा सील, सड़कों पर सैलाब

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस और लॉकडाउन से घबराए प्रवासी मजदूरों का पलायन रोकने के लिए रविवार को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए। सभी राज्यों को आगाह किया कि वे सीमा सील करें और लोगों की आवाजाही रोकें। यहां तक कहा गया कि अगर लोगों की आवाजाही जारी रहे तो संबधित जिलों के कलेक्टर और एसपी के खिलाफ कार्रवाई होगी। इसके बावजूद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटी यूपी की सीमा से लेकर सुदूर केरल के कोट्टायम और महाराष्ट्र तक सड़कों पर लोगों का सैलाब आया हुआ है। रविवार की शाम तक हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर थे और अपने घर लौटने की जद्दोजहद कर रहे थे। इससे पहले रविवार को दिन में केंद्र ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन से पूरे देश में लागू लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों की आवाजाही को रोकने के लिए प्रभावी तरीके से राज्य और जिलों की सीमा सील करने को कहा। साथ ही आगाह किया कि पाबंदी का उल्लंघन करने वालों को 14 दिन के लिए आइसोलेशन सेंटर में भेजा जाएगा। इसके बावजूद लोगों का आना-जाना बंद नहीं हुआ है। दिल्ली और महाराष्ट्र दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने लोगों से जहां हैं वहीं रहने की अपील की है।… Continue reading सीमा सील, सड़कों पर सैलाब

चिटफण्ड संशोधन विधेयक पर संसद की लगी मुहर

नई दिल्ली। चिटफण्ड घोटालों पर अंकुश लगाने और छोटे निवेशकों की रक्षा के लिए चिटफण्ड संशोधन विधेयक 2019 पर गुरुवार को संसद की मुहर लग गई। राज्यसभा ने चिटफण्ड कानून 1982 में संशोधन लेनेवाले इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है। वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने दो दिन पहले शुरू हुई बहस के बाद आज करीब एक घण्टे तक चली चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छोटे एवं गरीब निवेशकों को ध्यान में रखते हुए समावेशी वित्तीय व्यवस्था बनाने का प्रयास किया है। इस विधेयक में व्यक्तिगत निवेशकों को एक लाख रुपये से बढ़ा कर तीन लाख रुपये तक राशि जमा करने का प्रावधान बनाया गया है जबकि कम्पनियों को तेरह लाख से बढ़ाकर 18 लाख रुपए की राशि जमा करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा फोरमैन का कमीशन पांच प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत करने का प्रावधान किया गया है। इससे पहले चर्चा में कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, राष्ट्रीय जनता दल के मनोझ झा, कुमार केलकर और भाजपा के शिव प्रसाद शुक्ल अनिल अग्रवाल, जी वी एल नृसिंम्हा राव आदि ने भाग लिया।

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