Suresh Pachouri

  • भाजपा की मंडी में सुरेश पचौरी!

    सुरेश पचौरी को खरीदा नहीं गया होगा। इसलिए क्योंकि बुढ़ापे में भला उनका मूल्य क्या है? मान्यता है कि बूढ़े नेता और बूढ़ी वेश्या का बुढ़ापा एक सी मनोव्यथा में होता है। दोनों संताप, लाचारगी और भूख में फड़फड़ाते होते हैं। क्या होती है दोनों की मनोव्यथा? इस बात का संताप की कभी वह कोठे की हूर, सत्ता का जलवा लिए हुए थे। तब सब लोग आगे-पीछे घूमते थे। वाह-वाह करते थे। दलालों से घिरे रहते थे। पैसा बरसता था। शाही ठाठ था। तूती बोलती थी। वैभव और जलवा था। Suresh Pachouri join BJP यह भी पढ़ें: इतिहास देख रहा...