मंत्रियों के नाम से पहले मीडिया में बना नैरेटिव

obc ministers media narrative : नरेंद्र मोदी की दूसरी सरकार के पहले विस्तार में कौन कौन मंत्री बनेगा और कौन कौन बाहर होगा इसका अंदाजा किसी को नहीं था। तभी बुधवार को शाम छह बजे शपथ समारोह से चंद मिनट पहले तक अटकलें लगाई जा रही थीं। कुछ गिने-चुने नामों को छोड़ कर किसी चैनल या अखबार के पत्रकार को पता नहीं था कि कौन कौन मंत्री बन रहा है। लेकिन यह सबको पता था कि मोदी कैबिनेट अब तक की सबसे युवा कैबिनेट होगी, अब तक के इतिहास में सबसे ज्यादा ओबीसी, एससी और एसटी मंत्री बनेंगे और अब तक के इतिहास में सबसे ज्यादा प्रोफेशनल्स को सरकार में जगह मिलेगी। यह भी पढ़ें: सरकार में कम हुआ बिहार का महत्व! सोचें, जब किसी को नाम ही नहीं पता है कि कौन कौन मंत्री बन रहा है फिर यह कैसे पता चला कि सबसे ज्यादा ओबीसी, एससी और एसटी होंगे या युवा होंगे या पेशेवर होंगे? जाहिर है प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्रियों की सूची बना कर तैयार रखी गई थी और उस आधार पर यह विश्लेषण कर लिया गया था कि कितने ओबीसी, एससी या एसटी हैं और कितने युवा हैं और कैबिनेट की औसत आयु क्या बन रही… Continue reading मंत्रियों के नाम से पहले मीडिया में बना नैरेटिव

बाहर से आए नेताओं की भरमार

bjp jyoditraditya scindia : केंद्र में नरेंद्र मोदी की दूसरी सरकार की पहला फेरबदल में कई ऐसे चेहरे हैं, जो अनाम हैं यानी जिनके बारे में दिल्ली की मीडिया को पता ही नहीं है। सबका बायोडाटा लेकर मीडियाकर्मी राज्यों में फोन करके जानकारी ले रहे थे। लेकिन अनेक ऐसे चेहरे हैं, जिनके बारे में सब लोग जानते थे। ऐसे चेहरों में उन नेताओं की भरमार है, जो दूसरी पार्टियों से आए हैं या दूसरे काम में थे और भाजपा या किसी दूसरी पार्टी से नहीं जुड़े थे। सहयोगी पार्टियों के अलावा ऐसे नेताओं की भरमार है, जिनको भाजपा ने अपना बनाया है। यह भी पढ़ें: नया कैबिनेट, उम्मीद करना फालतू! कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में गए ज्योतिरादित्य सिंधिया इसकी मिसाल हैं तो शिव सेना और उसके बाद कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए नारायण राणे दूसरी मिसाल हैं। शपथ ग्रहण समारोह में ये दोनों नेता अगली पंक्ति में बैठाए गए। असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी भाजपा के पुराने नेता नहीं हैं। वे 10 साल पहले 2011 में भाजपा में शामिल हुए थे। उससे पहले वे असम गण परिषद से जुड़े थे और उसकी टिकट पर विधायक व सांसद दोनों रहे थे। उनको पहले भाजपा ने मुख्यमंत्री बनाया… Continue reading बाहर से आए नेताओं की भरमार

नया कैबिनेट, उम्मीद करना फालतू!

Cabinet Expansion 2021 IAS : बुधवार, सात जुलाई की शाम को राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में जब ओड़िशा काडर के 1994 बैच के आईएएस अधिकारी अश्विनी वैष्णव भारत सरकार के कैबिनेट मंत्री पद की शपथ लेने राष्ट्रपति के सामने पहुंचे तो आंखें जुड़ा गईं, मन आह्लादित हो गया और जीवन धन्य हो गया! यह याद करके कि इसी साल 12 फरवरी को संसद के बजट सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के आईएएस अधिकारियों के लिए अपने मनोद्गार व्यक्त किए थे। उनके शब्द थे- ‘सब कुछ बाबू ही करेंगे। आईएएस बन गए मतलब वो फर्टिलाइजर का कारखाना भी चलाएगा, आईएएस हो गया तो हवाई जहाज जहाज भी चलाएगा, ये कौन सी बड़ी ताकत बना कर रख दी है हमने? बाबुओं के हाथ में देश देकर हम क्या करने वाले हैं? हमारे बाबू देश के हैं तो देश का नौजवान भी तो देश का है’! तभी अश्विनी वैष्णव को शपथ लेते देख कर पहले हैरानी हुई लेकिन फिर लगा कि प्रधानमंत्री कितने लचीले हैं, जो पांच महीने पहले कही गई अपनी बात को दिल से निकाल दिया और ‘बाबुओं’ को देश चलाने लायक समझा। ध्यान रहे आईएएस अधिकारी अपने को ‘बाबू’ कहे जाने से नाराज होते हैं। आईएएस एसोसिएशन… Continue reading नया कैबिनेट, उम्मीद करना फालतू!

मंत्रिपरिषद में फेरबदल : भाजपा ने जो बताया

भाजपा ने बता दिया है कि अब मंत्रिपरिषद में 13 दलित, 27 ओबीसी और आठ जनजातियों के मंत्री हैं। आम भारतीय जन मानस की जैसी सरंचना है, उसमें यह महत्त्वपूर्ण है। इसके साथ ही मंडलवादी और कांशीरामवादी प्रतिनिधित्व की राजनीति पूरी तरह हिंदुत्व परियोजना में समाहित कर ली गई है। PM Modi new Cabinet : नरेंद्र मोदी मंत्रिपरिषद में फेरबदल की खबर के लाइव प्रसारण के समय एक टीवी चैनल पर अचानक ये बताया गया कि मोदी सरकार ने नए मंत्रियों की जो प्रोफाइल भेजी है, उसमें कुछ नई बातें हैँ। अनुभवी पत्रकारों ने कहा कि ऐसा उन्होंने इसके पहले कभी नहीं देखा था। नए मंत्रियों के परिचय में यह उल्लेख है कि वे किस जाति और उस जाति समूह की किस उप जाति से आते हैँ। जिस क्षेत्र से आते हैं उसका भी ब्योरा दिया साफ शब्दों में दिया गया था। यानी भाजपा यह मेसेज समाज में देना चाहती थी कि मंत्रिपरिषद की नई संचरना तय करते समय उसने किस तरह की ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की है। ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की धारणा 1990 के दशक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भीतर स्वीकृत हुई थी। उसके मुताबिक हिंदू समाज की जातीय रचना को स्वीकार करते हुए हिंदुत्व की परियोजना को व्यापकता देने… Continue reading मंत्रिपरिषद में फेरबदल : भाजपा ने जो बताया

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