काबुलः पाक आगे, भारत पीछे चले

यदि जर्मनी के अखबार ‘डेर स्पीगल’ में छपी यह खबर सही है तो मानकर चलिए कि अब अफगानिस्तान ही नहीं, पूरे दक्षिण एशिया के अच्छे दिन आने ही वाले हैं। जो बात मैं पिछले 25-30 साल से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों से कहता रहा हूं, उसके परवान चढ़ने के लक्षण अब दिखाई… Continue reading काबुलः पाक आगे, भारत पीछे चले

काबुलः भारत-पाक पहेलियाँ

यह गनीमत है कि ईद के मौके पर अफगानिस्तान के तालिबान और सरकार ने अगले तीन दिन के लिए युद्ध-विराम की घोषणा कर दी है। पिछली 1 मई से अफगानिस्तान के विभिन्न शहरों में तालिबान ने इतने हमले किए हैं कि जितने उन्होंने पिछले एक साल में भी नहीं किए। पिछले साल फरवरी में तालिबान… Continue reading काबुलः भारत-पाक पहेलियाँ

बागी मूड में तालिबान

तालिबान ने यह दो टूक कहा है कि अब वह किसी संयम को बरतने के लिए बाध्य नहीं है। उसका पक्ष यह है कि उसने एक मई तक हिंसा ना करने का वादा किया था। ये समयसीमा बीत चुकी है। इसके बाद वह जो उचित समझे, वह कार्रवाई करने के लिए आजाद है। तालिबान पहले… Continue reading बागी मूड में तालिबान

बाइडेन ने नहीं बदला तालिबान का फैसला!

अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडेन ने शपथ लेने के बाद पिछले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के किए फैसलों को बदलने का अभियान छेड़ा हुआ है। बाइडेन प्रशासन ट्रंप के दर्जनों फैसलों को बदल चुका है।

फिर लौटेगा तालिबान राज?

अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी की संभावनाएं मजबूत होती जा रही हैं। अमेरिका उसकी वापसी कराने की राह तैयार कर रहा है। हाल में हुई अफगान शांति वार्ता से ये संकेत और मजबूत हुआ। इस बार इस वार्ता को भारत का साथ भी मिला, जो पहले ऐसी किसी संभावना पर कड़ा एतराज जताता था।

अफगानिस्तान में भारत रहे सावधान

अफगानिस्तान के वर्षों विदेश मंत्री रहे डाॅ अब्दुल्ला अब्दुल्ला आजकल अफगानिस्तान की राष्ट्रीय मेल-मिलाप परिषद के अध्यक्ष हैं। वे अफगानिस्तान के लगभग प्रधानमंत्री भी रहे हैं। वे ही दोहा में तालिबान के साथ बातचीत कर रहे हैं।

भारत कहीं फिसल न जाए

कतर की राजधानी दोहा में चल रही अफगान-वार्ता में भारत भाग ले रहा है, यह शुभ-संकेत है। अफगान-संकट को हल करने के लिए नियुक्त विशेष अमेरिकी दूत जलमई खलीलजाद कुछ घंटों के लिए भारत आए, यह अपने आप में महत्वपूर्ण बात है लेकिन इस आवागमन का उद्देश्य क्या हो सकता है

तालिबान: भारत अपनी खिड़की खोले

अफगानिस्तान के तालिबान संगठन ने भारत के प्रति अपने रवैए में एकदम परिवर्तन कर दिया है। पाकिस्तान के लिए तो यह एक बड़ा धक्का है लेकिन यह रवैया हमारे विदेश मंत्रालय के सामने भी बड़ी दुविधा खड़ी कर देगा।

काबुलः भारत बगलें न झांके

तालिबान के साथ अमेरिका ने दोहा में जैसे ही समझौता किया, मैंने लिखा था कि काणी के ब्याह में सौ-सौ जोखिमें। लेकिन हमारी भारत सरकार ने उसका भरपूर स्वागत किया था। हमारे विदेश सचिव समझौते के एक दिन पहले काबुल पहुंच गए थे। वे राष्ट्रपति अशरफ गनी और मुख्य कार्यकारी (प्रधानमंत्री) डॉ. अब्दुल्ला से भी… Continue reading काबुलः भारत बगलें न झांके

ट्रंप की चुनावी चिंता में तालिबान से समझौता

एक पुरानी कहावत है कि जान बची तो लाखों पाए लौट के बुद्धू घर को आए। जब अफगानिस्तान में शांति के लिए अमेरिका व तालिबान के बीच शांति समझौता किए जाने की खबर पढ़ी तो यह कहावत याद आ गई। सच कहा जाए तो वर्षों से अमेरिका अफगानिस्तान से अपनी जान बचा कर निकलने की… Continue reading ट्रंप की चुनावी चिंता में तालिबान से समझौता

तालिबान समझौता: हम क्या करें ?

क़तर की राजधानी दोहा में अमेरिका और तालिबान के बीच जो समझौता हुआ है, यदि वह लागू हो सका तो दक्षिण एशिया में शांति के नए युग की शुरुआत होगी। अफगानिस्तान में जाहिरशाह के तख्ता-पलट (1973) के बाद से आज तक इतनी अस्थिरता बनी रही है कि उसके कारण पाकिस्तान, भारत और ईरान तो परेशान… Continue reading तालिबान समझौता: हम क्या करें ?

संकट का समझौता

अमेरिका और तालिबान के बीच शनिवार को कतर की राजधानी दोहा में जो समझौता हुआ है, उससे उम्मीद की जानी चाहिए कि अफगानिस्तान में शांति का सूर्योदय होगा और वर्षों से संघर्ष की आग में झुलस रहे मुल्क को इससे मुक्ति मिलेगी। तालिबान तो लंबे समय से अमेरिका को भगाना चाहता था ही, लेकिन अब… Continue reading संकट का समझौता

अब तालिबान से लड़ना होगा!

अमेरिका के रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वह काम किया है, जो डेमोक्रेटिक पार्टी के पिछले राष्ट्रपति बराक ओबामा भी नहीं कर पाए थे। ओबामा के ऊपर भी इस बात का दबाव था कि वे अफगानिस्तान में चल रही लड़ाई को खत्म कराएं और अमेरिकी सैनिकों की वापसी कराएं। उन्होंने इस बारे में… Continue reading अब तालिबान से लड़ना होगा!