दिसंबर से पहले ही सबको वैक्सीन लगेगी, PM ने समीक्षा की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सरकारी अधिकारियों के साथ वैक्सीनेशन अभियान और कोरोना की स्थिति की समीक्षा की। इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और नीति आयोग के लोग शामिल हुए। जानकार सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा है कि इस साल दिसंबर तक ( vaccination before december ) 18 साल से ऊपर की पूरी आबादी को वैक्सीन लगाई जाए। उन्होंने इसका लक्ष्य तय किया। दिमाग में फैले ब्लैक फंगस को समाप्त करने के लिये देश में पहली बार बिना चीर-फाड़ ब्रेन सर्जरी! बताया जा रहा है कि कई उत्साही अधिकारियों ने प्रधानमंत्री के सामने कहा कि वे इस लक्ष्य को समय से पहले ही पूरा कर लेंगे। यानी दिसंबर से पहले ही देश के सभी व्यस्कों को वैक्सीन लगा दी जाएगी। यह भी पढ़ें: आप के रास्ते पर तृणमूल कांग्रेस हालांकि प्रधानमंत्री ने उनसे पूछा नहीं कि ऐसा कैसे होगा पर अब उत्साही अधिकारियों के सामने इसे पूरा करने की चुनौती है। दिसंबर से पहले अगर पूरी व्यस्क आबादी को टीका लगाना है तो उनके पास पांच महीने का समय है। अभी 32 करोड़ लोगों को पहली डोज लगी है। इसका मतलब है कि 110 करोड़ के करीब व्यस्क आबादी में से 80 करोड़… Continue reading दिसंबर से पहले ही सबको वैक्सीन लगेगी, PM ने समीक्षा की

टीके पर अंध-अविश्वास क्यों ?

Vaccination in India : भारत में कोरोना की दूसरी लहर उतार पर दिखाई दे रही है लेकिन तीसरी लहर की आशंका तो बनी ही हुई है, उसके साथ डेल्टा और डेल्टा प्लस जीवाणु के फैलने का खतरा भी दिखाई पड़ने लगा है। डेल्टा प्लस जीवाणु काफी खतरनाक है। इसने अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में दुबारा कोहराम मचा दिया है। भारत के 174 जिलों में यह पाया गया है। अभी दूसरी लहर का असर देश के 75 जिलों में 10 प्रतिशत और 92 जिलों में 5 प्रतिशत तक बना हुआ है। यदि लोगों ने सावधानी नहीं बरती तो अन्य सैकड़ों जिलों में फैलते हुए इसे देर नहीं लगेगी। भारत के विभिन्न प्रांतों में अभी तक वैसे तो 48 मरीज़ इस नए जीवाणु के पाए गए हैं लेकिन यदि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे सतर्क देशों में यह फैल सकता है तो भारत में तो इसके संक्रमण की गुंजाइश बहुत ज्यादा है। अमेरिका के ट्रंप-प्रशासन ने शुरु में काफी लापरवाही बरती, जिसके फलस्वरुप छह लाख से ज्यादा अमेरिकियों की जानें चली गईं लेकिन बाइडन-प्रशासन काफी सतर्कता का परिचय दे रहा है। स्वयं राष्ट्रपति बाइडन कई शहरों में जाकर टीकाकरण अभियान का शुभारंभ करवा रहे हैं। उनकी सरकार अब हर घर तक पहुंचकर… Continue reading टीके पर अंध-अविश्वास क्यों ?

Vaccination Records : टेस्टिंग और वैक्सीनेशन का रिकार्ड

Vaccination records : नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या कम होने और संक्रमण दर में गिरावट के साथ साथ देश में टेस्टिंग और वैक्सीनेशन की रफ्तार में तेजी आ रही है। भारत में पिछले छह दिन में साढ़े तीन करोड़ के करीब लोगों को वैक्सीन लगाई गई है। शनिवार को खबर लिखे जाने तक देश में साढ़े 31 करोड़ से ज्यादा लोगों को टीका लगाया जा चुका था। शनिवार को देर रात तक 62 लाख लोगों को टीके लगे थे। बहरहाल, भारत में शनिवार तक संक्रमण की दर गिर कर 2.2 फीसदी रह गई थी और एक्टिव केसेज की संख्या पांच लाख 85 हजार के करीब पहुंच गई थी। टेस्टिंग में भी भारत में नए रिकार्ड बने हैं। पिछले 25 दिन में देश में पांच करोड़ टेस्ट हुए हैं। यानी हर दिन औसतन 20 लाख टेस्ट किए गए हैं। ज्यादा टेस्टिंग से कोरोना केसेज पर नजर रखना आसान हुआ है। शनिवार तक देश में कुल 40 करोड़ से ज्यादा टेस्टिंग हो चुकी है। कोरोना टेस्टिंग के मामले में अमेरिका सबसे आगे है, जहां 50 करोड़ से ज्यादा टेस्टिंग हो चुकी है। गौरतलब है कि अमेरिका की आबादी 33 करोड़ है। अपनी आबादी के डेढ़ गुने के… Continue reading Vaccination Records : टेस्टिंग और वैक्सीनेशन का रिकार्ड

वैक्सीन के जरिए राजनीति की कोशिश

भारत में हर चीज पर राजनीति होती है। कोरोना वायरस पर भी हुई है और वैक्सीन पर भी शुरू हो गई है। कम से कम वैक्सीन को लेकर बन रहे राजनीतिक नारों से तो ऐसा लग रहा है कि पार्टियां इसका अपने हक में इस्तेमाल करने लगी हैं। भाजपा और आम आदमी पार्टी ने वैक्सीन को लेकर जो नारा बनाया है वह शुद्ध रूप से राजनीतिक है। आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार ने वैक्सीनेशन की रफ्तार तेज करने के लिए राजधानी में एक अभियान शुरू किया, जिसका नाम दिया- जहां वोट, वहां वैक्सीनेशन! इसका मतलब यह है कि जहां लोगों ने वोट डाले वहां पर यानी पोलिंग बूथ पर वैक्सीन लगेगी। लेकिन इसके साथ ही इस नारे ने स्पष्ट रूप से वैक्सीन को वोट से जोड़ दिया। यह अलग बात है कि अभी तक यह सिर्फ नारा ही है क्योंकि हर पोलिंग बूथ पर वैक्सीन लगने की बात तो छोड़ें, वैक्सीन की कमी के कारण पहले से बनाए गए वैक्सीनेशन सेंटर भी बंद हो रहे हैं। यह भी पढ़ें: बिहार से बनेंगे सबसे ज्यादा मंत्री! बहरहाल, केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने भी सेवा की संगठन योजना के तहत वैक्सीन की रफ्तार बढ़ाने के लिए एक नारा गढ़ा-… Continue reading वैक्सीन के जरिए राजनीति की कोशिश

कोवीशील्ड पर केंद्र ने दी सफाई

नई दिल्ली। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोवीशील्ड वैक्सीन की दो खुराकों के बीच का अंतर बढ़ाने के मसले पर केंद्र सरकार ने सफाई दी है। केंद्र सरकार ने कहा कि कोवीशील्ड की दो डोज के बीच का अंतराल छह से आठ हफ्ते की जगह 12 से 16 हफ्ते करने का फैसला वैज्ञानिक सबूतों और तथ्यों पर आधारित है। सरकार ने 13 मई को कहा था कि उसने कोविड-19 के लिए बनाए गए कार्य समूह की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए ऐसा किया है। इस बीच नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन के अध्यक्ष एनके अरोड़ा ने भी मंगलवार को स्पष्ट किया किया कि दो खुराक के बीच अंतराल बढ़ाने का फैसला वैज्ञानिक सबूतों पर आधारित है और पूरी तरह पारदर्शी है। अरोड़ा ने यह भी कहा कि समूह की बैठक के दौरान इस फैसले को लेकर कोई मतभेद नहीं था और आम  सहमति से यह सिफारिश की गई।  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक ट्विट करके बुधवार को इसकी जानकारी दी। सरकार ने समूह की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए सभी केंद्र शासित प्रदेश और राज्यों को नए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसी आधार पर कोवीशील्ड की दो खुराक के बीच समय अंतराल को बढ़ा कर 12 से 16 हफ्ते किया गया। केंद्रीय… Continue reading कोवीशील्ड पर केंद्र ने दी सफाई

25 फीसदी आबादी का क्या कसूर?

भारत सरकार ने वैक्सीनेशन नीति में एक बार फिर भेदभाव कर दिया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इसी पर सवाल उठाया था। केंद्र सरकार देश में बनने वाली वैक्सीन डोज में से सिर्फ 75 फीसदी डोज खरीदेगी। बाकी 25 फीसदी डोज निजी अस्पताल खरीदेंगे। निजी अस्पतालों के लिए वैक्सीन की कीमत भी तय कर दी गई है। भारत की स्वदेशी वैक्सीन भारत बायोटेक की कोवैक्सीन उनको 1,410 रुपए प्रति डोज के हिसाब से मिलेगी। रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-वी की कीमत 1,145 रुपए होगी और कोवीशील्ड उनको 780 रुपए में मिलेगी। इसके ऊपर वे डेढ़ सौ रुपया सर्विस चार्ज लेंगे। सवाल है कि जब केंद्र सरकार ने सबको मुफ्त वैक्सीन लगाने की नीति बनाई है तो फिर उसमें इतनी महंगी वैक्सीन लगाने का स्कोप कहां से बचता है? जब उच्च वर्ग के लिए भी प्रधानमंत्री ने मुफ्त वैक्सीन की घोषणा की है तो सरकार किन लोगों से उम्मीद कर रही है कि वे इतनी महंगी वैक्सीन लगवाने निजी अस्पताल में जाएंगे? अगर सरकारी अस्पतालों में या सरकारों के बनवाए केंद्रों पर मुफ्त में वैक्सीन लगेगी तो दो हजार रुपए या उससे ज्यादा वैक्सीन पर कौन खर्च करेगा? ध्यान रहे केंद्र सरकार 75 फीसदी ही वैक्सीन खरीदेगी, इसका… Continue reading 25 फीसदी आबादी का क्या कसूर?

सरकार की कथा निराली

भारत सरकार को इस बात का श्रेय देना होगा कि वह घोर अंधकार में भी सकारात्मक पहलू ढूंढ लेती है। मसलन, अगर देश में कोरना टीकाकरण में प्रगति की बात की जाए, तो सरकारी पक्ष बताएगा कि 20 करोड़ लोगों का टीकाकरण हो चुका है। इतनी बड़ी संख्या में दुनिया के कुछ ही देशों में टीकाकरण हुआ है। यानी वह इस बात को छिपा लेगी कि भारत में दोनों टीके सवा तीन प्रतिशत लोगों को ही लगे हैं या एक टीका भी अभी कुल आबादी के पांचवें हिस्से तक को नहीं लग पाया है। पॉजिटिव ढूंढने की भारत सरकार की ये क्षमता पूरे कोरोना काल में दिखती रही है। वैसे ये कहानी उससे भी पुरानी है। सबसे पहले तो डेटा मैनेजमेंट के जरिए सुर्खियां और उनके जरिए जनमत संभालने की क्षमता उसने अर्थव्यवस्था में दिखाई। बहराहल, भारत सरकार की ये कुशलता भारत के लोगों को बहुत महंगी पड़ी है। वैश्विक मीडिया पर खुल कर ये बात कह रहा है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान प्रिंट मीडिया के एक हिस्से को भी यह समझ में आया कि सरकार की झूठी कहानियां फैलाने से सच नहीं बदल जाता। बल्कि इसमें सहभागी बन कर मीडिया भी भारत की मुसीबत बढ़ाने में… Continue reading सरकार की कथा निराली

Vaccine update: अगले महीने कोवैक्सीन का डाटा

हैदराबाद। कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने वाली स्वदेशी कंपनी भारत बायोटेक ने कहा है कि उसकी कोवैक्सीन के तीसरे चरण के परीक्षण का फाइनल डाटा अगले महीने यानी जुलाई में जारी कर दिया जाएगा। इसके साथ ही कंपनी ने चौथे चरण का परीक्षण करने का भी ऐलान किया है। आमतौर पर चौथे चरण का ट्रायल नहीं होता है लेकिन पिछले दिनों एक स्टडी आई, जिसमें कहा गया कि कोवैक्सीन के मुकाबले कोवीशील्ड की पहली डोज ज्यादा एंटीबॉडी बनाती है। इसे खारिज करते हुए भारत बायोटेक ने चौथे चरण के ट्रायल का ऐलान किया है। बहरहाल, भारत बायोटेक ने बुधवार को बताया कि तीसरे चरण के ट्रायल का फाइनल डाटा सबसे पहले सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन यानी सीडीएससीओ में जमा किया जाएगा। इसके बाद इसे पीयर रिव्यूड जर्नल्स में प्रकाशित किया जाएगा फिर जुलाई के दौरान इसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि कोवैक्सीन को जनवरी में ही इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत दे दी गई थी लेकिन तब उसका तीसरे चरण का ट्रायल चल ही रहा था। भारत बायोटेक और इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर की तरफ से घोषित अंतरिम डाटा के मुताबिक कोवैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल में कुल मिला कर 78 फीसदी असरदार पाई… Continue reading Vaccine update: अगले महीने कोवैक्सीन का डाटा

गलती मानने में कोई बुराई नहीं!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अच्छा किया जो वैक्सीनेशन की नीति बदल दी और 16 जनवरी को जिस सिद्धांत के साथ इसकी शुरुआत की थी उसी सिद्धांत पर इसे आगे बढ़ाने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि 16 जनवरी से अप्रैल के अंत तक जिस तरह से वैक्सीनेशन का अभियान चला था 21 जून से उसी तरह से चलेगा। यानी केंद्र सरकार वैक्सीन खरीद कर राज्यों को देगी और राज्य बिल्कुल मुफ्त में लोगों को वैक्सीन लगवाएंगे। राज्य और आम लोगों को वैक्सीन के पैसे नहीं देने होंगे। दुनिया के लगभग सभी देशों में इसी तर्ज पर वैक्सीन लगाई जा रही है। इस लिहाज से यह फैसला स्वागत के लायक है। यह भी पढ़ें: बच्चों की वैक्सीन, जल्दी न करें! फैसले का स्वागत करने के बावजूद कुछ सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। प्रधानमंत्री ने सोमवार को राष्ट्र के नाम 32 मिनट के अपने संबोधन में कई बातों का जवाब नहीं दिया और न डेढ़ महीने से ज्यादा समय तक वैक्सीनेशन की प्रक्रिया के थम जाने या धीमी हो जाने की जवाबदेही ली। उन्होंने कहा कि 16 जनवरी से अप्रैल के अंत तक जैसे वैक्सीनेशन हुआ वैसे ही 21 जून से होगा। सवाल है कि एक मई से 20 जून तक 51… Continue reading गलती मानने में कोई बुराई नहीं!

नजरिया तो वही है

तब इस महामारी से आहत आम लोग और उनके विरोधी वर्तमान मनोदशा के बीच भूल-चूक लेनी-देनी की सोच से आगे बढ़ने और मिल-जुल कर उस मुसीबत का सामना करने के लिए तत्पर होते, जो देश पर आई हुई है। लेकिन प्रधानमंत्री अपनी भूल को अपनी उपलब्धि बताने की सोच के साथ आए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर कोरोना महामारी के आकलन, प्रबंधन और वैक्सीन नीति के बारे में अपनी सरकार की गलतियों को स्वीकार करते, तो वे पूरे देश के नेता के रूप में बोलते नजर आते। इस महामारी से आहत आम लोग और उनके विरोधी वर्तमान मनोदशा के बीच भूल-चूक लेनी-देनी की सोच से आगे बढ़ने और मिल-जुल कर उस मुसीबत का सामना करने के लिए तत्पर होते, जो देश पर आई हुई है। लेकिन प्रधानमंत्री अपनी भूल को अपनी उपलब्धि बताने की सोच के साथ आए। वैक्सीन नीति में बदलाव किया, लेकिन पहले हुई गड़बड़ी के लिए राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहरा दिया। प्रबंधन में हुई घोर गड़बड़ी का दोष अपने पहले की सरकारों पर डाल दिया। झूठ नैरेटिव सेट करने की सोच से वे नहीं उबरे। तो जाहिर है, जो लोग उनके अंध समर्थक नहीं हैं, उनमें वैसी ही तीखी प्रतिक्रिया हुई। नतीजा है कि नरेंद्र मोदी और… Continue reading नजरिया तो वही है

Corona Vaccine Update: 44 करोड़ और डोज का ऑर्डर, केंद्र ने जारी की 30 फीसदी एडवांस रकम

नई दिल्ली। देश के सभी नागरिकों के लिए वैक्सीन खरीदने और राज्यों को मुफ्त में वैक्सीन उपलब्ध कराने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के एक दिन बाद ही केंद्र सरकार ने 44 करोड़ डोज का ऑर्डर दिया है। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने बायोलॉजिकल-ई कंपनी को 30 करोड़ डोज का ऑर्डर दिया था। इस तरह केंद्र ने एक हफ्ते के भीतर 74 करोड़ डोज का ऑर्डर कर दिया है। इसके लिए केंद्र ने 30 फीसदी रकम एडवांस भी जारी कर दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि उसने 44 करोड़ वैक्सीन डोज का ऑर्डर जारी किया है। इसमें 25 करोड़ कोवीशील्ड और 19 करोड़ कोवैक्सिन शामिल हैं। सरकार ने कंपनियों को ऑर्डर की 30 फीसदी रकम एडवांस में जारी कर दी है। इससे एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार राष्ट्र के नाम संदेश में ऐलान किया था कि 21 जून से 18 साल से ज्यादा उम्र वालों को भी मुफ्त में वैक्सीन लगेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को वैक्सीनेशन अभियान की नई गाइडलाइंस जारी की। इसके मुताबिक केंद्र सरकार वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों से 75 फीसदी डोज खरीद कर राज्यों को मुफ्त में देगी, लेकिन राज्यों को वैक्सीन के डोज बरबाद होने से बचना होगा,… Continue reading Corona Vaccine Update: 44 करोड़ और डोज का ऑर्डर, केंद्र ने जारी की 30 फीसदी एडवांस रकम

वैक्सीन में भी अमेरिका को पीछे छोड़ा!

ऐसा नहीं है कि भारत ने सिर्फ डिजिटल लेन-देन और कैशलेस अर्थव्यवस्था बनाने में अमेरिका को पीछे छोड़ा है, वैक्सीन लगवाने में भी भारत ने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है और यह बात किसी पूर्व अधिकारी ने नहीं, बल्कि भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव और नीति आयोग के सदस्य ने साझा तौर पर कही है। प्रेस कांफ्रेंस में लव अग्रवाल और डॉक्टर वीके पॉल ने कही। दोनों ने शुक्रवार को बताया कि भारत में 17.2 करोड़ लोगों को पहली डोज लग चुकी है और इसके साथ ही भारत ने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। सोचें, आंकड़ों को इस तरह से पेश करने का क्या मतलब है? एक तरफ तो भारत हाथ फैलाए हुए है कि अमेरिका अपने स्टॉक वाली वैक्सीन भारत को दे दे और साथ ही अमेरिकी कंपनियों की सारी शर्तें मानने को तैयार है ताकि वे अपनी वैक्सीन भारत को दें और दूसरी ओर यह दावा है कि अमेरिका को पीछे छोड़ दिया! भारतीय जनता पार्टी इस तरह से आंकड़ों को पेश करे तो बात समझ में आती है लेकिन सरकारी अधिकारियों को क्यों इस तरह से आंकड़ों को पेश करना चाहिए? अगर 140 करोड़ की आबादी में 17 करोड़ लोगों को पहली… Continue reading वैक्सीन में भी अमेरिका को पीछे छोड़ा!

केंद्र की वैक्सीनेशन नीति बदलेगी!

क्या केंद्र सरकार एक बार फिर वैक्सीनेशन की अपनी नीति बदलेगी? यह लाख टके का सवाल है, जिस पर सरकार के जानकार सूत्रों का कहना है कि गंभीरता से विचार किया जा रहा है। ध्यान रहे पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। सर्वोच्च अदालत ने कोविन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता से लेकर वैक्सीन के दाम और राज्यों की खरीद के मसले पर केंद्र से सवाल पूछा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पूरे देश में वैक्सीन के दाम एक क्यों नहीं होने चाहिए। इस बीच दूसरा संकट यह हुआ है कि राज्यों के ग्लोबल टेंडर पर कहीं से जवाब नहीं मिल रहा है। कंपनियां राज्यों को वैक्सीन नहीं बेचना चाहती हैं या वैक्सीन के बहुत दाम बता रही हैं। पिछले दिनों दिल्ली और पंजाब ने बताया कि फाइजर और मॉडर्ना ने राज्यों के साथ वैक्सीन का सौदा करने से मना कर दिया है। इस बीच बृहन्नमुंबई महानगरपालिका, बीएमसी ने वैक्सीन का अपना अलग टेंडर निकाला था, जिसमें वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों की बजाय ज्यादातर आपूर्तिकर्ताओं यानी सप्लायर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स ने टेंडर डाले और एक डोज के लिए सात से सौ 27 सौ रुपए तक की कीमत बताई। उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले महीने टेंडर… Continue reading केंद्र की वैक्सीनेशन नीति बदलेगी!

विदेशी कंपनियों की शर्त मानेगी सरकार

नई दिल्ली। अमेरिका कंपनियों की वैक्सीन जल्दी ही भारत आ सकती है। केंद्र सरकार उनकी शर्तें मानने को तैयार हो गई है। माना जा रहा है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर की अमेरिकी कंपनियों के साथ बातचीत में कुछ सहमति बनी थी, जिसके बाद सरकार ने इस बारे में अपनी राय बदली है। तभी केंद्र सरकार मॉडर्ना और फाइजर की कोरोना वैक्सीन को जल्दी से जल्दी देश में उपलब्ध करवाने के लिए उनकी शर्तें मानने को तैयार हो गई है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया, डीसीजीआई ने कहा है कि अगर इन कंपनियों की वैक्सीन को बड़े देशों और विश्व स्वास्थ्य संगठन, डब्लुएचओ से इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिली हुई है तो भारत में इनके इस्तेमाल के बाद ब्रिजिंग ट्रायल की जरूरत नहीं है। गौरतलब है कि मॉडर्ना और फाइजर उन कंपनियों में शामिल हैं, जिन्होंने भारत सरकार से अपील की थी कि वह हर्जाने और इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत देने के बाद होने वाले लोकल ट्रायल की बाध्यता को खत्म करे। हालांकि सरकार ने अभी वैक्सीन के इस्तेमाल के बाद होने वाले बड़े साइड इफेक्ट को लेकर मुआवजे या जवाबदेही जैसी शर्त पर फैसला नहीं किया है। यह शर्त काफी बड़ा असर डालेगी, हालांकि इस पर भी फैसला जल्दी… Continue reading विदेशी कंपनियों की शर्त मानेगी सरकार

वैक्सीन लगवाएं, घर में रहें!

वैक्सीन लगने के बावजूद लोगों को संक्रमण हो रहा है। इसका मतलब है कि अब तक वैज्ञानिक समुदाय भी अंधेरे में है और इसलिए वायरस का खतरा पूरी भयावहता के साथ मानवता के सामने मौजूद है। सो, आंकड़े कम होने के मुगालते में तो कतई नहीं रहना चाहिए। ऊपर से भारत में तो इतने लोगों को वैक्सीन भी नहीं लगी है कि हर्ड इम्यूनिटी विकसित होने का भ्रम पाला जाए। यह भी पढ़ें: संघीय ढांचे के लिए चुनौती यह नया इंडिया की अपील है। पर सिर्फ अपील नहीं  बल्कि भारत में वायरस की हकीकत का बयान है। लोगों को राज्य सरकारों की ओर से दिए जा रहे आंकड़ों या अखबारों में छप रही सकारात्मक खबरों या आंकड़े कम होने के टेलीविजन पर दिखाए जा रहे ग्राफिक्स के झांसे में नहीं आना चाहिए। ये आंकड़े अधूरी तस्वीर दिखाते हैं। वैसे भी झूठ और सफेद झूठ से आगे झूठ का तीसरा प्रकार आंकड़ों को ही बताया गया है। इसलिए आंकड़ों में उलझने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह बाजीगरी है। पहले भी इस बाजीगरी के झांसे में आकर देश के लोगों ने अपना बड़ा नुकसान किया है। अगर पहली लहर के बाद लोग झांसे में नहीं आए होते दूसरी लहर शायद इतनी… Continue reading वैक्सीन लगवाएं, घर में रहें!

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