सिमी के 12 आतंकियों को उम्रकैद की सजा

सात साल पुराने मामले में जयपुर की जिला अदालत ने मंगलवार को सिमी के 13 सदस्यों में से 12 को आतंकी करार दिया और उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई। अदालत ने एक आरोपी को बरी कर दिया।

कर्जदारों को नहीं मिली राहत!

कोरोना वायरस की महामारी के बीच कर्ज की किस्तें चुकाने पर लगी रोक यानी लोन मोराटोरियम मामले में आम लोगों को सुप्रीम कोर्ट से भी कई खास राहत नहीं मिली है।

आधार की संवैधानिकता पर फिर सुनवाई!

आधार की संवैधानिकता को चुनौती देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच सोमवार को पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार करेगी। पुनर्विचार याचिकाओं पर चैंबर में सुनवाई होगी।

अदालत के फैसले के कारण शिवराज की सभाएं निरस्त

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ के फैसले के परिप्रेक्ष्य में आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अशोकनगर जिले के शाडोरा और दतिया जिले के भांडेर क्षेत्र में प्रस्तावित चुनावी सभाएं निरस्त कर दीं।

आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक कल से

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक कल से शुरू हो रही है और बैठक में लिए जाने वाले फैसले की घोषणा 9 अक्टूबर को होगी।

बाबरी विध्वंस फैसला भाजपा को दे सकता है सियासी बढ़त

अयोध्या के ढांचा विध्वंस पर विशेष न्यायालय का फैसला भाजपा को सियासी बढ़त देने के संकेत दे रहा है। इससे पहले राम मंदिर के आए फैसले और अब बाबरी विध्वंस में सभी बड़े नेताओं को बरी होना

आज का दिन खुशी का : आडवाणी

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं और बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले के आरोपियों ने इस मामले पर आज आये फैसले पर खुशी व्यक्त की है ।

सीबीआई अदालत सुनाएगी बाबरी विध्वंस मामले का फैसला

अयोध्या में बाबरी विध्वंस के करीब 28 साल पुराने मामले में सीबीआई की विशेष अदालत बुधवार को ऐतिहासिक फैसला सुनायेगी।

विंबलडन पर फैसला अगले सप्ताह

वर्ष के तीसरे ग्रैंड ग्रैंड स्लेम विम्बलडन को कोरोना वायरस के खतरे के मद्देनजर स्थगित या रद्द करने के बारे में फैसला अगले सप्ताह आपात बैठक के बाद लिया जाएगा।

कुछ ‘दाग’ अच्छे भी हैं!

अपराधी छवि के या दागी नेताओं के चुनाव लड़ने के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिशा-निर्देश दिए हैं। इससे मिलते-जुलते निर्देश पहले भी दिए जा चुके हैं। जैसे हर उम्मीदवार को अपने आपराधिक रिकार्ड का ब्योरा सार्वजनिक करने का निर्देश पहले से है। अब सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि सिर्फ जीतने की क्षमता टिकट देने का आधार नहीं हो सकता है। साथ ही अदालत ने कहा है कि अगर कोई पार्टी अपराधी छवि के व्यक्ति को टिकट देती है तो उसका कारण बताना होगा। इस तरह के कुछ और छोटे-मोटे दिशा-निर्देश हैं। असल में अदालत कानून नहीं बना सकती है और न जन प्रतिनिधित्व कानून में बदलाव कर सकती है इसलिए उसने कुछ दिशा-निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस मसले पर जिस तरह की चर्चाएं चल रही हैं उनसे कई अहम सवाल खड़े होते हैं। सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं क्योंकि सोशल और पारंपरिक मीडिया के सहारे राजनीति में शुचिता का अभियान चलाने और इस पर बहस करने वाले लोग भी इसके कई पहलुओं की अनदेखी कर रहे हैं। असल में राजनीति को गंदा और खराब बताने का ऐसा फैशन या ऐसी भेड़चाल है कि सुप्रीम कोर्ट के इस पर टिप्पणी करते ही… Continue reading कुछ ‘दाग’ अच्छे भी हैं!

बड़े चुनाव सुधारों की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट ने दागी नेताओं के चुनाव लड़ने के बारे में कुछ दिशा-निर्देश दिए, जिसके बाद से इस बात पर बहस छिड़ी है कि आखिर कैसे दागी या अपराधी छवि के नेताओं को चुनाव लड़ने से रोका जाए। इस मामले में चुनाव आयोग पहले ही अपने हाथ खड़े कर चुका है। बुनियादी रूप से यह काम राजनीतिक दलों का है, जो सिर्फ जीतने की क्षमता के आधार पर अपराधी छवि के नेताओं को टिकट देते हैं। इस मामले में भाजपा हो या कांग्रेस या कोई क्षेत्रीय पार्टी है, सब समान रूप से जिम्मेदार हैं। यहां तक कि दिल्ली में साफ-सुथरी राजनीति का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी के भी आधे से ज्यादा विधायकों पर किसी न किसी किस्म के आपराधिक मामले हैं। हालांकि यह आपराधिक छवि या आपराधिक मामलों वाली बात कुछ जटिल है क्योंकि कई नेताओं पर बहुत मामूली धाराएं होती हैं और राजनीतिक मामले ज्यादा होते हैं। धारा 144 का उल्लंघन या तय समय से ज्यादा देर तक लाउडस्पीकर चलाने या तय समय के बाद रोड शो करने जैसे मामले भी आपराधिक मामलों की श्रेणी में आते हैं। धरना-प्रदर्शन करने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने के मुकदमे भी ज्यादातर नेताओं के ऊपर दर्ज होते हैं। कुछ… Continue reading बड़े चुनाव सुधारों की जरूरत

क्या ये फैसला औचित्यपूर्ण है?

भारतीय राजनीति में कथित तौर पर बढ़ते आपराधीकरण पर चिंता व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये महत्वपूर्ण फैसला दिया।

क्या ये पूरा न्याय है?

सऊदी उच्चायोग के भीतर कत्ल किए गए पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के मामले में रियाद की अदालत ने पांच लोगों को मौत की सजा सुनाई गई। मगर इसमें सऊदी राजकुमार सलमान के करीबियों को क्लीन चिट दे दी गई है। ये हैरतअंगेज है कि खशोगी के बेटे ने इस फैसले पर संतोष जताया है। लेकिन तुर्की इस निर्णय से खफा है। पिछले साल जब खशोगी की हत्या हुई, तो शक प्रिंस सलमान पर गया था। बाद में ऐसी खबर आई कि सलमान ने ये बात मान भी ली है। मगर अब फैसले में उन्हें दोषमुक्त करार दिया गया है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या की गई थी। अब एक अदालत ने आठ अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। अदालत ने पांच दोषियों की मौत की सजा सुनाई। तीन अन्य दोषियों को कैद की सजा दी गई। दोषी इस सजा के खिलाफ अपील कर सकते हैं। सुनवाई के दौरान सऊदी अरब ने किसी भी अभियुक्त का नाम सार्वजनिक नहीं किया। सऊदी अरब के राजकुमार के पूर्व शीर्ष सलाहकार सौद अल-काहतानी को एक तरह से क्लीन चिट दे दी गई है। सरकारी टीवी के मुताबिक अटॉर्नी जनरल की जांच में अल-काहतानी के… Continue reading क्या ये पूरा न्याय है?

दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर आयोग करे फैसला

आपराधिक रिकार्ड वाले नेताओं को चुनाव लड़ने से रोकने का आदेश देने के लिए दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने विचार करने से इनकार कर दिया है। सर्वोच्च अदालत ने चुनाव आयोग से कहा कि वह इस पर फैसला करे।

अयोध्या पर फैसला ऐतिहासिक: मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद देश में जिस प्रकार की प्रतिक्रिया देखने को मिली उससे साबित हो गया कि देशवासियों ने देशहित को सर्वोपरि माना।

और लोड करें