अमेरिका वापस आ गया है

जो बाइडेन अब अपने सहयोगी रहे देशों को संदेश दे रहे हैं कि ‘अमेरिका वापस आ गया है’। डोनल्ड ट्रंप के दौर की खास बात यह रही कि अमेरिका ने दशकों से पार्टनर रहे देशों को ठुकरा दिया।

उफ! झूठ की खेती में अमेरिका और भारत

डोनाल्ड ट्रंप के चार सालों में अमेरिका क्या बना और नरेंद्र मोदी के छह साल में भारत क्या बना? पूछ सकते हैं दोनों की भला एक साथ तुलना क्यों

अब विकेट गिराने लगा वक्त?

अंत हर चीज का है! सत्य और न्याय को छोड़कर। यही दोनों हमेशा मानवता को हौसला देते रहते हैं। मानव सभ्यता में विश्वास बनाए रखते हैं। एक साथ तीन बड़े विकेट गिर गए।

मुश्किल भरी बाइडेन की राह

वोटों की गिनती के आधार पर अमेरिकी मीडिया ने जो बाइडेन को राष्ट्रपति निर्वाचित घोषित कर दिया है। लेकिन अभी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने हार नहीं मानी है।

झूठ से ट्रंप का क्या बना तो अमेरिका का क्या?

अमेरिका पर ताली बजाएं या अमेरिका को लोकतंत्र का फ्रॉड, धोखा करार दें? डोनाल्ड ट्रंप की मानें तो उनके साथ धोखा हुआ। वे अमेरिकी चुनाव के फ्रॉड से हारे हैं।

अब अमेरिकी प्रतिष्ठा लौटेगी

कल मैंने लिखा था कि डोनाल्ड ट्रंप- जैसे आदमी को साढ़े चौदह करोड़ वोटों में से लगभग सात करोड़ वोट कैसे मिल गए

ट्रंप चले जाएंगे पर ट्रंपवाद रहेगा!

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदाई हो गई है। अमेरिकी जनता ने उनके ब्रांड की राजनीति को खारिज कर दिया है। सोचें, पूरी एक सदी में वे सिर्फ तीसरे राष्ट्रपति हैं, जिन्हें दूसरा कार्यकाल नहीं मिला है। सदी में सबसे ज्यादा मतदान के जरिए अमेरिका के लोगों ने उनको हराया है। लेकिन उनका हारना भी मामूली नहीं है। वे सात करोड़ से ज्यादा वोट लेकर हारे हैं। अमेरिका के इतिहास में किसी जीते हुए राष्ट्रपति को कभी सात करोड़ वोट नहीं मिले। इस बार रिकार्ड संख्या में वोटिंग हुई, जो बाइडेन रिकार्ड संख्या में वोट लेकर जीते हैं तो डोनाल्ड ट्रंप रिकार्ड संख्या में वोट लेकर हारे हैं। अमेरिका के सात करोड़ से ज्यादा लोगों ने उनमें भरोसा जताया। रिपब्लिकन पार्टी के असर वाले लगभग सारे राज्यों में ट्रंप जीते। इतना ही नहीं, जिन बैटलग्राउंड या स्विंग स्टेट्स में ट्रंप हारे हैं वहां भी बराबरी की लड़ाई हुई है। मिसाल के तौर पर पेन्सिलवेनिया को देख सकते हैं। करीब 70 लाख लोगों ने वहां वोट किए थे और बाइडेन महज 42 हजार वोट से जीते। आधे से एक फीसदी के फर्क से वे कई राज्यों में आगे रहे। जाहिर है यह मुकाबला बराबरी का ही था। तभी यह कहना… Continue reading ट्रंप चले जाएंगे पर ट्रंपवाद रहेगा!

बाइडेन का पहला काम कोरोना रोकना

अमेरिका निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा है कि बतौर निर्वाचित राष्ट्रपति उनका पहला काम कोरोना वायरस की महामारी को रोकने के लिए कदम उठाना है।

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