विश्व रक्तदाता दिवस 2021: कोरोना काल में भी प्लाज़मा डोनेट कर कोरोना मरीजों को दिया जीवनदान

आज 14 जून को पूरे विश्व में विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा हर साल 14 जून को ही विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। विश्व रक्तदाता दिवस मनाने का उद्देश्य है कि लोगों को जागरूक करना। सेफ ब्लड और ब्लड प्रोडक्ट्स के बारे में लोगों को जागरूक करना। वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय आज के दिन आम जनता को स्वैच्छिक कार्यकर्ता, अनपेड रक्त दाताओं द्वारा उनकी संबंधित स्वास्थ्य प्रणालियों में किए गए महत्वपूर्ण योगदान को लेकर एकसाथ आता है। रक्तदान को महादान कहा जाता है। हर साल ना जानें कितने ही बच्चें और बड़ों की खून के अभाव में मौत हो जाती है। हर साल रक्तदान शिविर भी लगाया जाता है। इसमें बहुत से लोगों द्वारा खून दिया जाता है। कोरोना महामारी में लोगों ने मरीजों को बड़ी संख्या में प्लाज़मा डोनेट किया है। लॉकडाउन में भी किसी भी मरीज को जब ब्लड की जरूरत थी जब भी लोगों ने प्लाज़मा देने से पीछे नहीं हटे। भारत सहित विदेशों में भी लोगों ने ब्लड डोनेशन से पीछे नहीं हटे। rare ब्लड ग्रुप को ढूंढ़ने में बड़ी समस्या होती है। अंत समय में ऐसा ब्लड ग्रुप कहींमिलता भी नहीं है। इसलिे रक्तदान शविर में भी rare… Continue reading विश्व रक्तदाता दिवस 2021: कोरोना काल में भी प्लाज़मा डोनेट कर कोरोना मरीजों को दिया जीवनदान

हरपीज सिंपलेक्स (कोरोना स्ट्रेन) की नई बला!

ब्लैक, व्हाइट और यलो फंगस के बाद कोरोना वायरस से संक्रमित हुए कुछ मरीजों में हरपीज सिम्पलेक्स वायरस का स्ट्रेन मिला जो तेजी से एक से दूसरे में फैलता है यह लाइलाज पेनफुल (दर्दनाक) सेक्सुअली ट्रांसमिटिड इंफेक्शन हैं। मेडिकल साइंस में एचएसवी कही जाने वाली इस संक्रामक बीमारी को दवाओं से शांत कर सकते हैं, ठीक नहीं।  एचएसवी वायरस से हरपीज सिम्पलेक्स नामक संकामक बीमारी पनपती है, जो आमतौर पर मुंह, चेहरे और जननांगों को अपनी चपेट में लेती है, वैसे ये शरीर में कहीं भी हो सकती है। यह भी पढ़ें: जानें टाइफॉयड बनाम कोरोना बुखार का अंतर जैसे-जैसे कोरोना म्यूटेट होकर नये-नये वैरियेन्ट प्रकट कर रहा है वैसे-वैसे डा. फाउची (अमेरिकी राष्ट्रपति के मेडिकल सलाहकार) का शक, हकीकत बनता जा रहा है कि कोरोना वायरस किसी जानवर या पक्षी से नहीं आया बल्कि इसे लैब में खतरनाक वायरसों के जीन्स मिलाकर बनाया गया है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति जो. बाइडेन ने सीआईए सहित सभी अमेरिकन खुफिया एजेन्सियों को छह महीने की समय सीमा में इस बात की सच्चाई पता लगाने के आदेश दिये हैं।  ब्लैक, व्हाइट और यलो फंगस के बाद कोरोना वायरस से संक्रमित हुए कुछ मरीजों में हरपीज सिम्पलेक्स वायरस का स्ट्रेन मिला जो तेजी… Continue reading हरपीज सिंपलेक्स (कोरोना स्ट्रेन) की नई बला!

बिजली भी हुई मुहाल

कोरोना महामारी की मार दुनिया में जिंदगी के किन-किन पहलुओं पर पड़ी है, अभी इसका अंदाजा सबको नहीं है। हर गुजरते दिन के साथ कोई नया पहलू उभर कर सामने आता है। मसलन, अब ये खबर आई है कि कोविड-19 महामारी के कारण हुए आर्थिक नुकसान ने एशिया और अफ्रीका में ढाई करोड़ लोगों को बिजली खरीदने में असमर्थ बना दिया है। इससे 2030 तक सभी को बिजली देने का वैश्विक लक्ष्य खतरे में पड़ता दिख रहा है। अक्षय ऊर्जा स्रोतों का अध्ययन करने वाली एक वैश्विक संस्था ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि प्रभावित लोगों में से दो-तिहाई सब-सहारा अफ्रीका में हैं। 2020 में कोविड-19 संकट ने नौकरियों और आय को प्रभावित किया है, जिससे पंखे चलाने, बत्ती जलाने, टीवी और मोबाइल फोन को चार्ज करने के लिए आवश्यक बिजली सेवाओं का भुगतान करने में लाखों लोगों ने दिक्कतों का सामना किया है। इससे पिछले दशक में हुई प्रगति खतरे में पड़ गई है। गौरतलब है कि 2010 से करीब एक अरब लोगों तक बिजली पहुंचाया गया था। यह भी पढ़े: सरकार की कथा निराली 2019 में दुनिया की 90 फीसदी आबादी तक बिजली पहुंची। रिपोर्ट के मुताबिक बिजली उपलब्धता के मामले में संयुक्त राष्ट्र के तय… Continue reading बिजली भी हुई मुहाल

बच्चों की वैक्सीन, जल्दी न करें!

बच्चों को टीका लगना चाहिए लेकिन उससे पहले वैक्सीन का ज्यादा वालंटियर्स के साथ, ज्यादा बड़े पैमाने पर और ज्यादा समय के लिए  ट्रायल होना चाहिए। क्योंकि किसी को पता नहीं है कि वैक्सीन व्यस्कों के मुकाबले बच्चों पर किस तरह का असर करेगी, उसके साइड इफेक्ट्स कैसे होंगे और बच्चों को दी जाने वाली दूसरी बीमारियों की वैक्सीन के साथ कोरोना वैक्सीन की प्रतिक्रिया कैसी होगी। यह भी पढ़ें: जुबान बंद कराने की जिद से नुकसान कनाडा ने सबसे पहले 12 साल से ऊपर के बच्चों को वैक्सीन लगानी शुरू की थी। अब अमेरिका में भी 12 साल से ऊपर के बच्चों को वैक्सीन लगने लगी है और फाइजर बायोएनटेक की जो वैक्सीन अमेरिका के बच्चों को लग रही है उसे ब्रिटेन ने भी मंजूरी दे दी है। ब्रिटेन में हालांकि अभी बच्चों पर इसका परीक्षण चल रहा है परंतु जल्दी ही वहां भी यह टीका लगने लगेगा। फाइजर के अलावा मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन तीनों की वैक्सीन को बच्चों के लिए मंजूरी मिल जाएगी। भारत में कोवैक्सीन का परीक्षण बच्चों के ऊपर हो रहा है और सरकार ने यह साफ कर दिया है कि दुनिया के बड़े देशों और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जिस वैक्सीन को मंजूरी… Continue reading बच्चों की वैक्सीन, जल्दी न करें!

जानें टाइफॉयड बनाम कोरोना बुखार का अंतर

Health Desk | देश के दूर-दराज ग्रामीण इलाकों में अच्छी स्वास्थ्य सुविधायें न होने से कोरोना टेस्टिंग उस स्तर पर नहीं हो पा रही है जिसकी जरूरत है, ऐसे में कोरोना संक्रमण से होने वाले बुखार का इलाज झोला छाप डाक्टर टाइफॉयड समझकर करते हैं जिसका परिणाम सैकड़ों की संख्या में हुयी मौतों के रूप में सामने आया है और आता जा रहा है। ऐसे में जरूरी है कि लोगों को इन दोनों बीमारियों के लक्षणों का अंतर पता हो ताकि वे जानलेवा स्थिति से बच सकें। टाइफॉयड पीड़ित को तेज बुखार से साथ सिर दर्द, पेट दर्द, भूख मर जाना और शरीर पर गुलाबी बारीक दाने उभरते हैं लेकिन सूंघने और स्वाद की शक्ति बनी रहती है व आक्सीजन का स्तर भी नहीं घटता। कोरोना बुखार की वजह वायरस है जबकि टाइफॉयड एक बैक्टीरिया से होता है। कोरोना वायरस नाक और मुंह के रास्ते शरीर में प्रवेश करता है तथा चार से सात दिन में गले और फेफड़ों को संक्रमित कर गम्भीर हालात बना देता है। नाक और गला संक्रमित होने से खांसी, जुकाम,   बुखार के साथ सूंघने तथा स्वाद लेने की क्षमता चली जाती है,  फेफड़ों में वायरस की संख्या बढ़ने पर सूजन होने से सांस लेने में… Continue reading जानें टाइफॉयड बनाम कोरोना बुखार का अंतर

ब्रिक्स में सबकुछ ठिकठाक!

पांच देशों के संगठन ‘ब्रिक्स’ की अध्यक्षता इस साल भारत कर रहा है। भारत, ब्राजील, रुस, चीन और दक्षिण अफ्रीका– इन पांच देशों के इस संगठन की इस बैठक में जो चर्चाएं हुई और जो संयुक्त वक्तव्य जारी हुआ है, उसमें कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सभी सदस्य-देशों ने भारत के दृष्टिकोण पर सहमति व्यक्त की है। ऐसा कोई मुद्दा नहीं उठा, जिसे लेकर उनमें किसी तरह का मतभेद दिखा हो। यह भी पढ़ें: ईसा के नाम पर कैसा जुल्म ? डर यही था कि चीन और भारत के विदेश मंत्रियों के बीच कुछ कहा-सुनी हो सकती थी, क्योंकि गलवान घाटी प्रकरण अभी शांत नहीं हुआ है लेकिन संतोष का विषय है कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कोई विवाद छेड़ने की बजाय भारत में चल रहे कोरोना महामारी के अभियान में भारत की सक्रिय सहायता का अनुरोध किया, भारतीय जनता के प्रति सहानुभूति व्यक्त की और भारत सरकार के प्रयत्नों की प्रशंसा की। भारत और दक्षिण अफ्रीका के उस प्रस्ताव का सभी विदेश मंत्रियों ने समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कोविड-वेक्सीन पर से निर्माताओं के स्वत्वाधिकार में ढील देने की मांग की थी। चीन और रूस तो स्वयं वेक्सीन-निर्माता राष्ट्र हैं, फिर भी उन्होंने इस मुद्दे पर सहमति प्रकट… Continue reading ब्रिक्स में सबकुछ ठिकठाक!

कोरोना काल में काम का वक्त बढ़ने से दुनियाभर में बना लोगों की मौत की वजह, WHO का सनसनीखेज खुलासा

कोरोना काल में संक्रमण से बचने के लिए लोगों ने वर्क फ्रॉम हॉम का रास्ता अपनाया। कोरोना महामारी के दौरान लोगों के काम करने के समय में और भी इजाफा हुआ है जो लोगों के जान के लिए खतरनाक बना हुआ है। लंबे वक्त तक काम करने से दूनियाभर में लाखों मौत हो रही है। यह जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक शोध में सामने आई है। यूएसन्‍यूज में छपी एक खबर के मुताबिक, इस ग्‍लोबल स्‍टडी में पाया गया है कि अकेले 2016 में लंबे समय तक काम करने की वजह से हुए हार्ट स्‍ट्रोक या किसी तरह के हार्ट डिजीज  से करीब 7,45,000 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। ये सभी लंबे वर्किंग आवर्स में काम करते थे। स्‍टडी में यह बात सामने आई कि लॉन्‍ग वर्किंग आवर्स में काम करने से हुए मौत में साल 2000 में 30 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला। इसे भी पढ़ें क्या होगा अगर पहली डोज़ कोविशील्ड और दूसरी डोज़ कोवैक्सीन की लगाई जाए….विशेषज्ञों ने दिया इसका जवाब लॉन्‍ग वर्किंग आवर बन रही मौत की वजह विश्व स्वास्थ्य संगठन के तहत पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य विभाग की डायरेक्टर मारिया नियारा ने कहा कि प्रति सप्ताह 55 घंटे या ज्यादा… Continue reading कोरोना काल में काम का वक्त बढ़ने से दुनियाभर में बना लोगों की मौत की वजह, WHO का सनसनीखेज खुलासा

संधि हो तो बेहतर

प्रस्ताव है कि भविष्य की महामारियों के लिए दुनिया को तैयार रखने के लिए वैश्विक सहयोग की जमीन तैयार की जाए। कोरोना महामारी के दौरान ये साफ हुआ कि दुनिया इसके मुकाबले के लिए तैयार नहीं थी। दुनिया की स्वास्थ्य व्यवस्था कोरोना महामारी के आगे बहुत कमजोर साबित हुई। भविष्य की महामारियों को रोकने के लिए एक वैश्विक संधि हो जाए, तो बेहतर ही होगा। आखिर संधि एक पैमाना होती है, जिसकी रोशनी में देश और दुनिया के कदमों को जांचा- परखा जाता है। लेकिन संधि पर बातचीत के लिए ये सही वक्त है, इस बारे में अगर कुछ देशों के मन में सवाल हैं, तो उन्हें भी सिरे से नकारा नहीं जा सकता। गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के तहत महामारियों के बारे में वैश्विक संधि करने का प्रस्ताव आया है। डब्लूएचओ की बैठक 24 मई से शुरू हो रही है। लेकिन जो चर्चा चल रही है, उससे साफ है कि ऐसी संधि के रास्ते में कई अड़चनें हैं। जबकि संधि के समर्थक देशों का कहना है कि अभी बातचीत शुरू की जाए और धीरे-धीरे इस दिशा में आगे बढ़ा जाए। संधि का विचार सबसे पहले यूरोपियन काउंसिल ने सामने रखा था। दो दर्जन देशों का समर्थन… Continue reading संधि हो तो बेहतर

दुनिया क्या जैविक युद्ध के बीच?

यह लाख टके का सवाल है। दुनिया में इस बात पर फिर से विचार शुरू हो गया है कि कोराना वायरस नेचुरल नहीं है, बल्कि इसे प्रयोगशाला में तैयार किया गया था। बिल्कुल शुरू में इस बात की चर्चा हुई थी। तब कहा गया था कि चीन के हुवान इंस्टीच्यूट ऑफ वायरोलॉजी में इस वायरस को जेनेटिकली मोडिफायड करके तैयार किया गया और यह वहां से लीक हुआ या लीक किया गया। चीन को जिम्मेदार ठहराने की मांग कर रहे कई पश्चिमी देशों ने उन दिनों दबाव बनाया था। बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन, डब्लुएचओ की टीम वुहान लैब का निरीक्षण करने गई थी पर वहां उसने वही देखा, जो चीन के अधिकारियों ने दिखाया। वैसे भी डब्लुएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडेनम गैब्रिएसस को चीन ने ही उस पद पर बैठाया है। बहरहाल, अब एक बार फिर दुनिया में इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि कोरोना का वायरस लैब में तैयार किया गया है और वहां से लीक होकर दुनिया में फैला है। अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने खुल कर यह बात कही है कि वायरस लैब से लीक हुआ है। उन्होंने कहा है कि इस बात के कई सबूत हैं। कई और विशेषज्ञों… Continue reading दुनिया क्या जैविक युद्ध के बीच?

WHO ने इशारों में कहा – चुनाव और कुंभ के कारण फैला कोरोना ,इवेंट्स में बरती गई कोताही

New Delhi : देश में कोरोना के संक्रमण के कारण हालत खराब हैं. देश में जहां रोज 4 लाख के करीब मामले सामने आ रहे हैं तो वहीं 3 हजार से ज्यादा मौतें भी हो रही हैं. ऐसे में भारत में करोना के इस संक्रमण को लेकर अब भारत के बाहर भी भारत सरकार को घेरने का प्रयास किया जा रहा है. अब देश में कोरोना संक्रमण तेजी से फैलने की प्रमुख वजहों में पिछले महीने हुए चुनाव और कुंभ भी हैं. यह बात विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट से भी साबित हो गई है. कोरोना को लेकर WHO की तरफ से जारी अपडेट में कहा गया है कि भारत में कोरोना संक्रमण बढ़ने के पीछे कई संभावित वजह हैं. हालांकि, WHO ने किसी इवेंट का नाम तो नहीं लिया, लेकिन कहा कि कई धार्मिक और राजनीतिक इवेंट्स में भारी भीड़ जुटना भी संक्रमण बढ़ने की वजहों में शामिल है. इन इवेंट्स में कोताही बरती गई. WHO ने यह भी कहा है कि संक्रमण बढ़ने में इन फैक्टर्स की कितनी भूमिका रही, इस बारे में स्थिति साफ नहीं है. B.1.1.7 और B.1.612 वैरिएंट्स के कारण बढ़ा संक्रमण WHO का कहना है कि भारत में कोरोना का B.1.617 वैरिएंट पहली… Continue reading WHO ने इशारों में कहा – चुनाव और कुंभ के कारण फैला कोरोना ,इवेंट्स में बरती गई कोताही

सावधान! ज़ारी है कोरोना के इंडियन वैरिएंट का कहर, 44 देशों में दिखा इसका असर

भारत में कोरोना वायरस से हालात खराब होते जा रहे है। एक दिन में 3 लाख पार मामले मिल रहे है। और 3-4 हजार लोग अपनी जान गंवा रहे है। यह एक बहुत भयावह आंकड़ा है। भारत में मिला कोरोना वायरस का वैरिएंट भारत के साथ अन्य कई देशों में तबाही मचा रहा है। कोरोना का इंडियन वैरिएंट दुनियाभर के कई देशों में अपने पैर फैला रहा है। WHO ने इस मामले में चेतावनी भी ज़ारी की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बुधवार को कहा कि भारत में कोरोना के जिस वैरिएंट के कारण स्थिति बिगड़ी है, वह अब तक दर्जनों देशों में पाया जा चुका है। अगर स्थिति नहीं संभली तो दुनियाभर में कोरोना की सुनामी आएगी। भारत में कोरोना से हालात सुधरने का नाम ही ले रहे है। भारत में मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। भारत में कोरोना की सुनामी आने पर कोई संसाधन उपलब्ध नहीं है। संसाधनों के अभाव में हजारों लोग अपनी जान से हाथ धो रहे है। ऐसे में वैज्ञानिकों का दावा है कि भारत में कोरोना की तीसरी लहर आना अभी शेष है। फिलहाल भारत में कोरोना का पीक भी नहीं आया है। पीक के बाद कोरोना के मामले कम… Continue reading सावधान! ज़ारी है कोरोना के इंडियन वैरिएंट का कहर, 44 देशों में दिखा इसका असर

क्या 5जी नेटवर्क की देन है कोरोना वायरस, जानिए क्या है पुरा मामला

वैसे तो सोशल मीडिया पर कोई ना कोई पोस्ट वायरल होती रहती है जिसमें आधी हकीकत आधा फसाना होता है। लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर पोस्ट बहुत वायरल हो रही है। इस पोस्ट में यह बताया जा रहा है कि महामारी कुछ और नहीं बल्कि 5G टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग का परिणाम है। इस संबंध में हर रोज कोई न कोई पोस्ट किया जा रहा है। whatsapp पर ये मैसेज वायरल होने के बाद लोग एक-दूसरे से सवाल पूछ रहे हैं कि क्या वास्तव में 5G की वजह से कोरोना देश में तबाही मचा रहा है? इस सवाल का जवाब विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट में दिया गया है… इसे भी पढ़ें Rajasthan Corona Crisis : जयपुर के इस अस्पताल के 25 नर्सिंगकर्मी Corona Positive, अब अपने ही अस्पताल में तरस रहे बेड के लिए Radiation से हवा हुई जहरीली ‘हिंदुस्तान’ में छपी खबर के अनुसार, पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर ऐसे संदेशों की भरमार है, जिनमें कोरोना के लिए 5G तकनीक की टेस्टिंग को जिम्मेदार बताया गया है. इन संदेशों में कहा जा रहा है कि 5G टावरों की टेस्टिंग से निकलने वाला रेडिएशन हवा को जहरीला बना रहा है, इसलिए लोगों को सांस लेने में मुश्किल… Continue reading क्या 5जी नेटवर्क की देन है कोरोना वायरस, जानिए क्या है पुरा मामला

दुनिया में डंका बज रहा है!

भारत सरकार, सत्तारूढ़ पार्टी और सरकार व सत्तारूढ़ पार्टी की हर बात का समर्थन करने वाले पत्रकार और काफी संख्या में आम लोग भी इस बात के आहत हैं कि दुनिया भर में मीडिया में सरकार के खिलाफ नकारात्मक खबरें छप रही हैं और देश यानी प्रधानमंत्री को बदनाम किया जा रहा है। भारत में तो सरकार ने मीडिया को सकारात्मक खबरें ही दिखाने-छापने के लिए बाध्य कर दिया है पर विदेशी मीडिया पर ऐसी कोई बाध्यता नहीं है इसलिए पूरी दुनिया में कोरोना काल की उपलब्धियों का डंका बज रहा है। अमेरिका से लेकर ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया तक अखबारों ने थू-थू की है। दुनिया के मीडिया शहंशाह रूपर्ट मर्डोक के ऑस्ट्रेलिया में छपने वाले अखबार ‘द ऑस्ट्रेलियन’ ने लिखा कि भारत में वायरस से जो कयामत आई है उसके लिए प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व जिम्मेदार है। इतना ही नहीं अखबार ने यह भी लिखा कि अहंकार, उग्र राष्ट्रवाद और नौकरशाही के निक्कमेपन का साझा असर यह हुआ कि भारत में संकट बहुत भयावह हो गया। इसने आगे लिखा कि भीड़ पसंद करने वाले प्रधानमंत्री मजे लेते रहे और लोग मरते रहे। भारत सरकार इससे इतनी आहत हो गई कि ऑस्ट्रेलिया में भारत के उप उच्चायुक्त ने ‘द ऑस्ट्रेलियन’ को… Continue reading दुनिया में डंका बज रहा है!

World Health Day : दुनिया में लोग खुद को लाश समझ रहे हैं तो कोई खुद को ही खा रहा है… ये अजीब बीमारियां भी है दुनिया में

Health Desk | आज यानि 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस (World Health Day) मनाया जाता है. ये और बात है कि कोरोना (CoronaVirus) के कारण विश्व भर में लोगों को प्रतिदिन अपना ध्यान रखना पड़ रहा है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे लोगों के बारे में जो अजीब बीमारियों से जूझ रहे हैं. माना जाता है कि शारीरिक बीमारियों की ही तरह  मानसिक बीमारियां भी काफी खतरनाक है. कुछ लोग इसे मानसिक तनाव और डिप्रेशन (Tension & Depression) का नाम दे देते है.  विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कुछ लोग ऐसे भी जो अपनी बीमारी का इलाज नहीं करवाते हैं. उन्हें ये डर लगा रहते है कि लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे.  इसकेल पीछे का मुख्य कारण है कि लोग मानसिक बीमारी को पागलपन समझ बैठते हैं. इससे लोग और डिप्रेशन में चले जाते हैं. जब एक व्यक्ति ठीक से सोच नहीं पाता है,उसका अपनी भावनाओं पर काबू नहीं होता ऐसी स्थिति को मानसिक बीमारी कहते हैं. आज हम बात करेंगे कि दुनिया में लोग किस तरह की बीमारियों से लड़ रहे हैं. शायद कुछ बीमारियां तो लाइलाज होती है. इसे भी पढ़ें करीना ने पहना ऐसा मास्क, कीमत सुन चौंक जाएगा हर कोई चलती-फिरती… Continue reading World Health Day : दुनिया में लोग खुद को लाश समझ रहे हैं तो कोई खुद को ही खा रहा है… ये अजीब बीमारियां भी है दुनिया में

टीकाकरण के बाद भी जारी रहेगा कोरोना का प्रसार: डब्ल्यूएचओ

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भविष्य में बड़े पैमाने पर टीकाकरण के बाद भी कोरोना वायरस के निरंतर प्रसार के खतरे को लेकर चेतावनी दी है।

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