अगले महीने संभव बच्चों की वैक्सीन

कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए चल रही वैक्सीनेशन अभियान के बीच अच्छी खबर है। अगले महीने यानी अगस्त में बच्चों की वैक्सीन आ सकती है।

Good News : बच्चों के लिए कोरोना की वैक्सीन को सितंबर तक मिलेगी हरी झंडी- डॉ. रणदीप गुलेरिया

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विदेशी कंपनियों की शर्त मानेगी सरकार

नई दिल्ली। अमेरिका कंपनियों की वैक्सीन जल्दी ही भारत आ सकती है। केंद्र सरकार उनकी शर्तें मानने को तैयार हो गई है। माना जा रहा है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर की अमेरिकी कंपनियों के साथ बातचीत में कुछ सहमति बनी थी, जिसके बाद सरकार ने इस बारे में अपनी राय बदली है। तभी केंद्र सरकार मॉडर्ना और फाइजर की कोरोना वैक्सीन को जल्दी से जल्दी देश में उपलब्ध करवाने के लिए उनकी शर्तें मानने को तैयार हो गई है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया, डीसीजीआई ने कहा है कि अगर इन कंपनियों की वैक्सीन को बड़े देशों और विश्व स्वास्थ्य संगठन, डब्लुएचओ से इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिली हुई है तो भारत में इनके इस्तेमाल के बाद ब्रिजिंग ट्रायल की जरूरत नहीं है। गौरतलब है कि मॉडर्ना और फाइजर उन कंपनियों में शामिल हैं, जिन्होंने भारत सरकार से अपील की थी कि वह हर्जाने और इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत देने के बाद होने वाले लोकल ट्रायल की बाध्यता को खत्म करे। हालांकि सरकार ने अभी वैक्सीन के इस्तेमाल के बाद होने वाले बड़े साइड इफेक्ट को लेकर मुआवजे या जवाबदेही जैसी शर्त पर फैसला नहीं किया है। यह शर्त काफी बड़ा असर डालेगी, हालांकि इस पर भी फैसला जल्दी… Continue reading विदेशी कंपनियों की शर्त मानेगी सरकार

मानवता पर मुनाफा भारी

वैक्सीन निर्माता कंपनियां पेटेंट हटाने के खिलाफ हैं। लेकिन वे ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहतीं, जिससे दुनिया में वैक्सीन की कमी की समस्या का समाधान निकले। वे उन कंपनियों से पार्टनरशिप करने को तैयार नहीं हैं, जो इनका उत्पादन बढ़ा सकती हैं। वैक्सीन निर्माता कंपनियों का ये रुख हैरतअंगेज है। कोरोना वैक्सीन पर से पेटेंट हटे या नहीं, ये बहस अभी भी छिड़ी हुई है। वैक्सीन निर्माता कंपनियां पेटेंट हटाने के खिलाफ हैं। लेकिन वे ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहतीं, जिससे दुनिया में वैक्सीन की कमी की समस्या का समाधान निकले। वे उन कंपनियों से पार्टनरशिप करने को तैयार नहीं हैं, जो इनका बड़े पैमाने पर उत्पादन कर सकती हैं। वैक्सीन निर्माता कंपनियों का ये रुख हैरतअंगेज है। खुद ये कंपनियां कहती रही रहीं है कि उनकी उत्पादन क्षमता सीमित है, जिस कारण वे मांग के मुताबिक सप्लाई नहीं कर पा रही हैं। तो आखिरर दूसरी कंपनियों को फॉर्मूला देने में उन्हें हिचक क्यों है? ये कंपनियां आखिरकार उनके बौद्धिक संपदा अधिकार का पालन करते हुए ही वैक्सीन का उत्पादन करेंगी। बहरहाल, खबर यह है कि कनाडा की कंपनी बायोलीज, इजराइल की टेवा, डेनमार्क की बेवेरियन नॉर्डिक और बांग्लादेश की कंपनी इनसेप्टा कंपनी ने वैक्सीन निर्माता कंपनियों से… Continue reading मानवता पर मुनाफा भारी

राज्य कहां से लाएंगे पैसा?

पिछले साल अक्टूबर के आसपास केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि राज्य वैक्सीन की खरीद नहीं करेंगे। यानी वैक्सीन की खरीद केंद्रीकृत होगी यह पिछले साल से तय था। वैक्सीन की केंद्रीकृत खरीद का फैसला पहले से हुआ था और देश के आम बजट में वैक्सीन खरीद के लिए 35 हजार करोड़ की भारी-भरकम रकम की मंजूरी हो गई थी तो राज्य क्यों अपने बजट में वैक्सीन के लिए प्रावधान करते! राज्यों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि अचानक केंद्र सरकार एक दिन वैक्सीनेशन की नीति बदल देगी और कहेगी कि 18 से 44  साल तक की उम्र के लोगों को राज्य अपने पैसे से वैक्सीन लगवाएं। केंद्र सरकार ने राज्यों के वित्तीय प्रबंधन को संकट में डालने वाला इतना ही काम नहीं किया, बल्कि वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को अपनी मर्जी से कीमत तय करनी की छूट भी दे दी। अब राज्यों को कंपनियों की तय कीमत पर वैक्सीन खरीदनी है और अपनी सबसे बड़ी आबादी को अपने खर्च से वैक्सीन लगवानी है। केंद्र सरकार ने वैक्सीनेशन नीति में बदलाव करके न सिर्फ करोड़ों लोगों का जीवन खतरे में डाला है, बल्कि राज्यों के वित्तीय प्रबंधन को भी संकट में डाल दिया है। राज्यों के… Continue reading राज्य कहां से लाएंगे पैसा?

नया दावां, दो सौ करोड़ डोज

नई दिल्ली। भारत में वैक्सीन की कमी और सैकड़ों की संख्या में वैक्सीनेशन सेंटर बंद होने की खबरों के बीच भारत सरकार ने दावा किया है कि अगले पांच महीने में भारत में वैक्सीन की उपलब्धता पूरी हो जाएगी। सरकार ने कहा है कि अगस्त से दिसंबर के बीच पांच महीने में भारत में दो सौ करोड़ से ज्यादा डोज उपलब्ध हो जाएगी। इसमें से 130 करोड़ डोज सिर्फ दो कंपनियां बनाएंगी। नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने कहा है कि कोवीशील्ड की 75 करोड़ और कोवैक्सीन की 55 करोड़ डोज उपलब्ध हो जाएगी। एक अच्छी खबर यह भी है कि रूस की स्पुतनिक वैक्सीन अगले हफ्ते भारत आ जाएगी। भारत सरकार ने कुछ समय पहले इस वैक्सीन की मंजूरी दी थी। गुरुवार को नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल ने बताया कि वैक्सीन भारत आ गई है और अगले हफ्ते से इसे लगाया जाने लगेगा। गौरतलब है कि अभी भारत में कोवीशील्ड और कोवैक्सीन ही लगाई जा रही है। देश में कोरोना वायरस और टीकाकरण की स्थिति पर प्रेस कांफ्रेंस में बुधवार को डॉ. पॉल ने कहा कि भारत में कोविड वैक्सीन की लगभग 18 करोड़ खुराकें लगाई जा चुकी हैं। अमेरिका में यह संख्या लगभग… Continue reading नया दावां, दो सौ करोड़ डोज

कोरोना पर काबू संभव, लेकिन….

यदि विश्व स्वास्थ्य संगठन टीकों पर से पेटेंट का बंधन उठा लेता है तो 100-200 करोड़ टीकों का इंतजाम करना कठिन नहीं है। अमेरिकी, यूरोपीय, रुसी और चीनी कंपनियां चाहें तो भारत को करोड़ों टीके कुछ ही दिनों में भिजवा सकती है। खुद भारतीय कंपनियां भी इस लायक हैं कि वे हमारी टीकों की जरुरत को पूरा कर सकती हैं। खुशी की बात है कि जर्मनी के अलावा लगभग सभी देश इस मामले में भारत की मदद को तैयार हैं लेकिन असली सवाल यह है कि यदि टीके मिल जाएं तो भी 140 करोड़ लोगों को वे लगेंगे कैसे ? अभी तो हाल यह है कि विदेशों से आ रहे हजारों ऑक्सीजन-यंत्र और लाखों इंजेक्शन मरीजों तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। वे या तो हवाई अड्डों पर पड़े हुए हैं या नेताओं के घरों में ढेर हो रहे हैं या कालाबाजारियों की जेब गर्म कर रहे हैं। हमारी सरकारें बग़लें झांक रही हैं। कुछ नेता लोग मन की बातें मलोर रहे हैं, उनके विरोधी मुंह की बातें फेंट रहे हैं और काम की बात कोई नहीं कर रहा है। देश की राजनीतिक पार्टियों के लगभग 15 करोड़ सदस्य, अपने-अपने घरों में बैठकर मक्ख्यिां मार रहे हैं। हमारे देश… Continue reading कोरोना पर काबू संभव, लेकिन….

कोरोना और विश्व-परिवार

ऐसा लगता है कि भारत और दक्षिण अफ्रीका की पहल अब शायद परवान चढ़ जाएगी। पिछले साल अक्तूबर में इन दोनों देशों ने मांग की थी कि कोरोना के टीके का एकाधिकार खत्म किया जाए और दुनिया का जो भी देश यह टीका बना सके, उसे यह छूट दे दी जाए। विश्व व्यापार संगठन के नियम के अनुसार कोई भी किसी कंपनी की दवाई की नकल तैयार नहीं कर सकता है। प्रत्येक कंपनी किसी भी दवा पर अपना पेटेंट करवाने के पहले उसकी खोज में लाखों-करोड़ों डाॅलर खर्च करती है। दवा तैयार होने पर उसे बेचकर वह मोटा फायदा कमाती है। यह फायदा वह दूसरों को क्यों उठाने दें ? इसीलिए पिछले साल भारत और द. अफ्रीका की इस मांग के विरोध में अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, जापान, स्विट्जरलैंड जैसे देश उठ खड़े हुए। ये समृद्ध देश अपनी गाढ़ी कमाई को लुटते हुए कैसे देख सकते थे लेकिन पाकिस्तान, मंगोलिया, केन्या, बोलिविया और वेनेजुएला- जैसे देशों ने इस मांग का समर्थन किया। अब खुशी की बात यह है कि अमेरिका के बाइडन प्रशासन ने ट्रंप की नीति को उलट दिया है। अमेरिका यदि अपना पेटेंट छोड़ने को तैयार है तो अन्य राष्ट्र भी उसका अनुसरण क्यों नहीं करेंगे? अब ब्रिटेन… Continue reading कोरोना और विश्व-परिवार

वैक्सीन के इंतजाम पर ध्यान हो

भारत सरकार ने वायरस की पहली लहर में एक बड़ी गलती यह की थी वैक्सीन की जरूरत पर ध्यान नहीं दिया। भारत सरकार इस मुगालते में रही कि पिछले 75 साल में भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक देश बना है इसलिए भारत में वैक्सीन की दिक्कत नहीं होगी। तभी जिस समय दुनिया भर के सभ्य और विकसित देशों की सरकारें वैक्सीन के ऑर्डर दे रही थीं, एंडवांस बुकिंग करा रही थीं और दुनिया भर में वैक्सीन पर चल रहे शोध में पैसा लगा रही थीं उस समय भारत सरकार इस मुगालते में रही कि भारत ने कोरोना पर विजय पा ली। यह पिछले साल अगस्त-सितंबर का समय था, जब दुनिया भर से यह खबर आने लगी थी कि वैज्ञानिक वैक्सीन बना रहे हैं और साल के अंत तक वैक्सीन आ जाएगी। साल का अंत आने से पहले ही वैक्सीन आ भी गई और दुनिया के देशों में लगने भी लगी। लेकिन भारत सरकार पता नहीं किस शुभ मुहूर्त का इंतजार करती रही! अमेरिका में 14 दिसंबर से वैक्सीन लगनी शुरू हो गई थी। उससे ठीक पहले अमेरिका ने फाइजर की वैक्सीन को मंजूरी दी थी और मंजूरी दिए जाने से पहले ही अमेरिका के 50 राज्यों में हर… Continue reading वैक्सीन के इंतजाम पर ध्यान हो

अमेरिका पेटेंट हटाने के पक्ष में

नई दिल्ली। कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए बनाई जा रही वैक्सीन को लेकर बड़ी खबर है। भारत और दक्षिण अफ्रीका के साथ साथ अब अमेरिका भी वैक्सीन के पेटेंट पर से रोक हटवाने के लिए पक्ष में आ गया। अब अमेरिका विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्लुएचओ में इसके लिए दबाव बनाएगा। विश्व व्यापार संगठन, डब्लुटीओ पहले ही कह चुका है कि वैक्सीन पर से पेटेंट हटाना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा कंपनियां इसका उत्पादन कर सकें और गरीब देशों को पर्याप्त मात्रा में सस्ती वैक्सीन मिल सके। हालांकि वैक्सीन के शोध और उत्पादन से जुड़े बिल गेट्स ने पेटेंट हटाने का विरोध किया है। बहरहाल, अब अमेरिका ने भारत और दक्षिण अफ्रीका की कोरोना वैक्सीन पर अस्थायी तौर पर पेटेंट हटाने की मांग का समर्थन किया है। अमेरिका ने कहा है कि वो बौद्धिक संपत्ति की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन महामारी से निपटने के लिए वैक्सीन पर से पेटेंट खत्म करने की मांग का समर्थन करता है। अमेरिका के इस कदम को भारत और अन्य देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर कोरोना वैक्सीन पर से पेटेंट हटता है तो इससे न केवल वैक्सीन का उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि कीमतों में भी कमी आएगी। पेटेंट… Continue reading अमेरिका पेटेंट हटाने के पक्ष में

उदारता काफी नहीं है

ये अच्छी खबर है कि फाइजर कंपनी ने अपने कोरोना वैक्सीन के सात करोड़ डोज भारत को देने का फैसला किया है। कंपनियां ऐसी उदारता दिखाएं, तो कम से कम उन देशों को तुरंत राहत मिल सकती है, जहां कोरोना वायरस ने तबाही मचा रखी है। लेकिन यह समस्या का समाधान नहीं है। विशेषज्ञों ने अपनी ये राय बार-बार दोहराई है कि कोरोना वायरस पर काबू पाने का एकमात्र उपाय पूरी दुनिया में सबका टीकाकरण है। सवाल है कि ये कैसे संभव होगा? क्या बड़े पैमाने पर वैक्सीन का उत्पादन हुए बिना दुनिया में सबको टीका लगाना संभव है? ऐसा नहीं हुआ, जिन्होंने टीका लगवाया है, वायरस के लगातार हो रहे म्यूटेशन के कारण उनकी सुरक्षा भी जाती रहेगी। असल मुद्दा विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) के तहत कोरोना वैक्सीन पर से पेटेंट हटाने या स्थगित करने का है। अगर पेटेंट यानी बौद्धिक संपदा अधिकार को हटा दिया जाए, तो जिस फॉर्मूले से कंपनियों ने वैक्सीन तैयार किए हैं, उसकी तकनीक और उन वैक्सीन को बनाने का ज्ञान उन्हें अलग-अलग देशों की वैक्सीन निर्माता कंपनियों से साझा करना होगा। उससे इन वैक्सीन के डोज ज्यादा बड़ी संख्या में और सस्ती दरों तैयार किए जा सकेंगे। ले किन कंपनियां इस मांग का… Continue reading उदारता काफी नहीं है

अब विदेशी वैक्सीन का इंतजार

भारत ने सारी दुनिया में करीब सात करोड़ वैक्सीन बांट दिए या बेच दिए और अब दुनिया के दूसरे देशों से वैक्सीन आने के इंतजार में बैठा है। भारत का वैक्सीनेशन अभियान लगभग ठप्प पड़ गया है या तेजी से दौड़ने की बजाय रेंग रहा है क्योंकि भारत के पास वैक्सीन नहीं है। 18 साल से उपर की उम्र के नौजवानों को वैक्सीन लगाने की मंजूरी तो सरकार ने दे दी लेकिन यह सोचा ही नहीं कि उनके लिए वैक्सीन कहां से आएगी। सो, पहले दिन एक करोड़ से ज्यादा लोगों ने वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया पर वे समय हासिल नहीं कर पाए। कई राज्यों ने वैक्सीनेशन का चौथा चरण यानी 18 साल से ऊपर की उम्र के लोगों को वैक्सीन लगाने का अभियान रोक दिया है। वैक्सीन की कमी से उनके यहां वैक्सीनेशन केंद्र बंद हो रहे हैं। सोचें, भारत ने सात करोड़ वैक्सीन बांटी है या बेची है और अब एक करोड़ डोज के लिए अमेरिका का मुंह देखा जा रहा है। अमेरिका ने अभी तक वैक्सीन की एक भी डोज किसी देश को नहीं दी है। वह एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन का इस्तेमाल नहीं कर रहा है फिर भी करोड़ों डोज उसने स्टोर करके रखी है। अब… Continue reading अब विदेशी वैक्सीन का इंतजार

सरकार का दावा और वैक्सीन के दाम

पिछले हफ्ते 21 अप्रैल को दो बड़े दावे किए गए। एक दावा केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने किया और दूसरा इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर ने किया। दोनों दावे भारत में इस्तेमाल हो रही दो वैक्सीन के बारे में थीं। एक में वैक्सीन को 99 फीसदी से ज्यादा कारगर बताया गया तो दूसरे में कहा गया कि वैक्सीन डबल म्यूटेंट वैरिएंट पर भी कारगर है। यह संयोग है कि इन दोनों दावों के तुरंत बाद दोनों कंपनियों ने अपनी कीमतों का ऐलान किया, जो मौजूदा कीमत से कई गुना ज्यादा है। क्या इन दोनों बातों का आपस में कोई संबंध है? भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने एक कथित अध्ययन के आधार पर बताया कि भारत में वैक्सीन 99 फीसदी से भी ज्यादा असरदार है। हालांकि दोनों वैक्सीन के तीसरे चरण के परीक्षण के नतीजों के मुताबिक यह किसी हाल में 80 फीसदी से ज्यादा असरदार नहीं है। पर भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 13 करोड़ लोगों को टीका लगा है और उसमें से 17 हजार से कुछ ज्यादा लोग ही संक्रमित हुए हैं। इस आधार पर सरकार ने दावा किया कि सिर्फ टीका लगवाने वालों में 0.2 से 0.4 फीसदी ही संक्रमित… Continue reading सरकार का दावा और वैक्सीन के दाम

वैक्सीन सर्टिफिकेट पर फोटो किसकी लगेगी?

केंद्र सरकार ने राज्यों को और देश की स्वास्थ्य सुविधा की रीढ़ यानी निजी अस्पतालों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। वे कैसे वैक्सीन खरीदें, किस कीमत पर खरीदें, कब वैक्सीन मिलेगी और कैसे लगेगी आदि वे जानें। अब केंद्र सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है। उसने वैक्सीन का प्रचार कर दिया है और नीति बना दी है। सो, केंद्र सरकार की घोषणा के बाद से राज्य सरकारें हैरान-परेशान घूम रही हैं। हालांकि सबकी मजबूरी है इसलिए सब ऐलान कर रहे हैं कि वे अपने नागरिकों को मुफ्त में वैक्सीन लगवाएंगे। निजी अस्पताल वाले क्या करेंगे, वे भी अभी तय नहीं कर पाए हैं। केंद्र सरकार की नई वैक्सीन नीति के बाद अब यह सवाल है कि वैक्सीनेशन के बाद मिलने वाले सर्टिफिकेट पर किसकी तस्वीर लगेगी? अब तक तो कोविन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करा कर वैक्सीनेशन करा रहे लोगों को जो सर्टिफिकेट मिलती है उस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगी होती है। लेकिन जब राज्य सरकारें अपने पैसे से वैक्सीन खरीद कर लोगों को लगवाएंगी तो उन लोगों को मिलने वाली सर्टिफिकेट पर किसकी तस्वीर लगेगी? क्या राज्यों के मुख्यमंत्री अपनी तस्वीर लगवाएंगे? या कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री अपनी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष की… Continue reading वैक्सीन सर्टिफिकेट पर फोटो किसकी लगेगी?

वैक्सीन की कीमत पर केंद्र ने की बात

नई दिल्ली। कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए भारत में इस्तेमाल हो रही दोनों वैक्सीन की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार ने वैक्सीन कंपनियों से बात की है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक केंद्र सरकार ने वैक्सीन बनाने वाली दोनों कंपनियों- भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीच्यूट ऑफ इंडिया से बात की है और उनसे वैक्सीन की कीमत कम करने को कहा है। ध्यान रहे भारत की नई वैक्सीनेशन नीति के बाद दोनों कंपनियों ने पिछले हफ्ते अपनी वैक्सीन की कीमतों की घोषणा की थी। भारत सरकार ने एक मई से 18 साल से ज्यादा उम्र के हर व्यक्ति को वैक्सीन लगाने की इजाजत दे दी है। लेकिन कई राज्यों में वैक्सीन की कमी हो गई है और कई राज्यों का कहना है कि वे बहुत ज्यादा कीमत पर वैक्सीन खरीद कर लोगों को लगवाने में समर्थ नहीं हैं। कांग्रेस शासित राज्‍यों ने टीके की कीमतों में असमानता का आरोप लगाते हुए इसे कम दाम पर उपलब्‍ध कराने को कही है। तभी खबर है कि सरकार ने सीरम इंस्‍टीट्यूट और भारत बायोटेक से भारत में अपनी कोविड वैक्‍सीन की कीमतें कम करने को कहा है ताकि पहली मई से टीकाकरण के तीसरे चरण में 18 से 45 साल की उम्र… Continue reading वैक्सीन की कीमत पर केंद्र ने की बात

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