मपी के बोल्ट के बाद अब आया साउथ का बोल्ट

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के रामेश्वर गुर्जर को एमपी का यूसेन बोल्ट कहे जाने का मामला अभी पूरी तरह थम भी नहीं पाया था कि अब दक्षिण के यूसेन बोल्ट के रुप में कर्नाटक के श्रीनिवास गौड़ा का नाम सामने आया है।

28 वर्षीय श्रीनिवास एक कामगार हैं और उन्होंने कर्नाटक के एक खेल कंबाला में हिस्सा लिया था। उन्होंने भैंसों के साथ पानी से भरे धान के खेत में दौड़ लगायी और 142 मीटर की दूरी 13.42 सेकेंड में पूरी की।

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उनकी इस गति को देखने के बाद उनका 100 मीटर का समय निकाला गया और श्रीनिवास की तुलना सीधे विश्व रिकॉर्डधारी बोल्ट से की जाने लगी। श्रीनिवास का वीडियो सोशल मीडिया पर इतना वायरल हो गया कि केंद्रीय खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने भी ट्विटर पर इस पर कमेंट कर डाला। श्रीनिवास दक्षिण कन्नड़ जिले मूदाबिदरी का है।

कर्नाटक के स्थानीय अखबारों में श्रीनिवास की खबरें सुर्खियां बनी हुई हैं। उनका 100 मीटर का समय 9.55 सेकेंड निकाला गया है जबकि बोल्ट का 100 मीटर का विश्व रिकॉर्ड 9.58 सेकेंड है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल अगस्त में मध्य प्रदेश में रामेश्वर गुर्जर नाम के एक धावक का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें 19 वर्षीय गुर्जर को 11 सेकेंड में 100 मीटर दौड़ पूरी करते दिखाया गया था।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद मध्य प्रदेश के खेल मंत्री जीतू पटवारी ने भोपाल में उसका ट्रायल देखा जिसमें आठ धावकों में गुर्जर काफी पीछे रह गए। उस समय रिजिजू ने गुर्जर को सहयोग देने का भरोसा दिलाया था। रिजिजू ने श्रीनिवास की खबरों पर संज्ञान लेते हुए ट्वीट किया,“श्रीनिवास का साई कोचों द्वारा ट्रायल लिया जा सकता है। ओलंपिक स्तर को लेकर आमजनों में जागरुकता की कमी है खासतौर पर एथलेटिक्स को लेकर जहां ताकत और स्टेमिना की जरुरत होती है।

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मैं यह सुनिश्चित करुंगा कि भारत में हर प्रतिभा को पूरा मौका मिले।” बताया जा रहा है कि साई के अधिकारियों ने श्रीनिवास से संपर्क किया है और उसके रेल टिकट बुक करा दिए गए हैं। वह सोमवार को साई सेंटर पहुंच जाएगा और शीर्ष राष्ट्रीय कोच उसका ट्रायल ले सकते हैं। इस बीच कंबाला की नियंत्रण संस्था ने आगाह किया है कि बोल्ट के साथ इस तरह की कोई तुलना ना की जाए।

कंबाला अकादमी के अध्यक्ष प्रोफेसर के गुनापाला कदंबा ने कहा,“हम नहीं चाहते कि इस तरह की कोई तुलना की जाए। ओलंपिक स्पर्धाएं ज्यादा वैज्ञानिक होती है और गति नापने के लिए उनके पास बेहतर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होते हैं। श्रीनिवास पिछले सात वर्षों से कंबाला में हिस्सा लेते आ रहे हैं और अपने स्कूली दिनों के दौरान कंबाला देखते हुए उन्हें इसमें हिस्सा लेने की रुचि जागी। लेकिन अपनी गति को लेकर वह पहली बार चर्चा में आए हैं।

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