जैसलमेर में पक्षी पर्यटन को लग सकते हैं पंख

जैसलमेर। पीत पाषाणों से सज्जित किले, हवेलियों, झरोखों, रेगिस्तान, लोक कला संस्कृति, लोक जीवन और परंपराओं के लिये विख्यात जैसलमेर में अब पक्षी पर्यटन के लिये भी अपार संभवानायें नजर आ रही हैं। जैसलमेर जिले में परंपरागत पेयजल स्रोत पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। यहां विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों का प्रवास निरंतर देखा जा रहा है। दर्जनों किस्म के देशी विदेशी पक्षियों को जैसलमेर की आबोहवा रास आ रही है। पिछले दिनों बडोडा गांव में स्थित तालाब पर हजारों की तादाद में साइबेरियन पक्षी डेमोइसेल क्रेन जिसे स्थानीय भाषा मे कुरजां कहा जाता है, की उपस्थिति इस संभावना को बल देती है।

अब तक डेमोइसेल क्रेन फलौदी के खिंचन गांव के तालाब पर बड़ी तादाद में कई दशकों से प्रवास करती आये हैं। इस बार जैसलमेर जिले के करीब दर्जन तालाबों पर इनकी उपस्थिति ने सुखद अहसास कराया। इतना ही नहीं पिछले महीने वन विभाग द्वारा पक्षी उत्सव मनाया गया। इस दौरान जिले के करीब 13 तालाबों पर पक्षियों की गणना की गई थी। तब इसमें देशी विदेशी पक्षियों की कुल 36 प्रजातियों के करीब 1545 पक्षी की मौजूदगी दर्शायी गई।

वन विभाग द्वारा फिलहाल 13 तालाबों पर ही पक्षियों की गणना की गई, लेकिन उनके अलावा जिले में ऐसे सेंकड़ों तालाब हैं जहां वन विभाग नहीं पहुंचा है। इन तालाबों पर भी खासी तादाद में विभिन्न प्रजातियों के पक्षी देखे जा सकते हैं। ऐसे तालाबों को चिन्हित करके पक्षी पर्यटन क्षेत्र बनाने की दरकार है ताकि पक्षी प्रेमी यहां तक पहुंच सकें। इन क्षेत्रों में ही पक्षी पर्यटन के विकास की असीम संभावनाएं है। इन क्षेत्रों में विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की उपस्थिति को लेकर वन विभाग भी खासा उत्साहित है।

पहली बार आयोजित पक्षी उत्सव में इन 13 तालाबों पर बार हैडेड गोस, ब्लैक विंग्स स्टील्ट, कैटल एग्रेट, कॉमन कूट, कॉमन ग्रीनसेंक, कॉमन रेडसेंक, कॉमन सेंडपाइपर, कॉमन सेलडक, कॉमन स्नाइप, कॉमन टील, डलमैटीन पेलीकन, डेमोइसेल क्रेन, यूरेशियन विगन, फेरूगिनयस डक, गडवॉल, ग्रागेनी, ग्रीन सेंडपाइपर, ग्रे हेरोन, ग्रेलेग गूस, इंडियन पॉन्ड हेरोन, यूटल कॉरमोरेंट, लिटल एग्रेट, लिटल ग्रेब, लिटल रिंगर प्लॉवर, लिटल स्टींट, मैलार्ड, नॉर्थेन पिनटेल, नॉर्थेन शॉवलर, रेड क्रेसटेड पोचार्ड, रेड नेप्ड बिड्स, रेड वेटल्ड लैपिंग, रिवर टर्न, वाइट ब्रेस्टेड किंगफिशर एवं येलो वाटल्ड लैपिंग प्रजाति के पक्षी देखे गए हैं।

पक्षी प्रेमियों के अनुसार जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग और वन विभाग (वाइल्ड लाइफ) को मिलकर पक्षी पर्यटन की संभावना तलाशने के साथ इसके विकास की योजना बनानी चाहिए। पिछले दिनों जैसलमेर प्रवास पर आए वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर पक्षी प्रेमी आईएएस डॉ जितेंद्र कुमार सोनी ने भी जैसलमेर में पक्षी पर्यटन के क्षेत्र में काम करने की आवश्यकता बताई थी। उन्होंने बातचीत में बताया था कि जैसलमेर के विभिन्न जलाशयों पर विभिन्न प्रजाति की पक्षियों की उपस्थिति सुखद अहसास कराती है। ऐसे में लोगों को पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आगे आना चाहिए।

इस सम्बन्ध में उपवन संरक्षक कपिल चंद्रवाल कहते हैं, ‘जिले के 13 तालाबों के किनारे प्रवासी पक्षियों की गणना की की गई है। जिसमें 36 प्रकार के विभिन्न प्रजातियों के 1545 पक्षियों का विचरण देखा गया है। यह हमारे लिए भी सुखद आश्चर्य है कि जिले में इतने प्रवासी पक्षी विचरण करते हैं।’

जैसलमेर विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान स्थापित कर चुका है। ऐसे में जैसलमेर आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए सार्थक प्रयास किए जाएं तो ये प्रवासी पक्षी जैसलमेर आने वाले सैलानियों के लिए नया पर्यटन स्थल बन सकता है। इसके साथ ही प्रवासी पक्षियों के लिए विभिन्न तालाबों पर भी विकास कार्य करवाकर इन स्थलों को प्रवासी पक्षियों के मुफीद बनाया जा सकता है, जिससे वे यहां स्वच्छंद विचरण कर सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares