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भाजपा के सहयोगियों की दुर्दशा

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भारतीय जनता पार्टी के सहयोगियों और पूर्व सहयोगियों की गजब दुर्दशा हो रही है। किसी जमाने में कांग्रेस ने अपने सहयोगियों का जैसा हाल किया था, आज भाजपा वैसा ही अपने सहयोगियों के साथ कर रही है। कांग्रेस ने सरकार में रहते झारखंड में मधु कोड़ा से लेकर तमिलनाडु में डीएमके तक का बुरा हाल कर दिया था। आज बिहार से लेकर झारखंड और पंजाब से लेकर महाराष्ट्र, तमिलनाडु तक भाजपा के सहयोगियों या पूर्व सहयोगियों का हाल हो रहा है। इनमें से ज्यादातर के पीछे भाजपा की राजनीति ही कारण है।

ताजा मिसाल महाराष्ट्र में शिव सेना की है। हाल तक शिव सेना और भाजपा सहयोगी थे। 2019 का लोकसभा और विधानसभा चुनाव दोनों पार्टियों ने मिल कर लड़ा था। दोनों की विचारधारा एक है और दोनों ने दशकों तक साथ राजनीति की है। लेकिन जैसे ही सरकार बनाने के मसले पर दोनों के बीच तकरार हुई और शिव सेना ने अलग होकर सरकार बनाई वैसे ही भाजपा ने उसको निपटाने का काम शुरू कर दिया। आज भाजपा का प्रयास मुकाम तक पहुंचता दिख रहा है। शिव सेना में बगावत हो गई है और उसके ज्यादातर विधायक बागी नेता एकनाथ शिंदे के साथ हैं, जिनके साथ भाजपा का तालमेल हो सकता है या वे अपने समर्थकों के साथ  भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

भाजपा के मौजूदा सहयोगियों का हाल देखना हो तो बिहार में जनता दल यू का देख सकते हैं। दोनों पार्टियां सन 2000 से विधानसभा के चुनाव साथ लड़ रही हैं और पहली बार ऐसा हुआ है कि जनता दल यू तीसरे नंबर की पार्टी हो गई और भाजपा को उससे लगभग दोगुनी सीटें मिल गईं। भाजपा की शह पर लोक जनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने पिछले चुनाव में एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ा और जदयू के खिलाफ उम्मीदवार उतारे। इसका नतीजा यह हुआ है कि भाजपा 74 सीट जीती और जदयू महज 43 सीट जीत सकी। हालांकि नीतीश कुमार अब भी मुख्यमंत्री हैं पर इस नतीजे के बाद से ही भाजपा नेता उनको परिस्थितियों का मुख्यमंत्री बता रहे हैं।

बिहार से सटे झारखंड में एक समय भाजपा की सहयोगी पार्टी आजसू का राजनीति में बड़ा दखल रहता था। लेकिन जब से भाजपा शक्तिशाली हुई है तब से वह हाशिए की पार्टी बन गई है। अब इसके दो विधायक हैं और यह सिमट कर एक छोटे से क्षेत्र की पार्टी रह गई है। इसी तरह अकाली दल का हाल है। किसान आंदोलन पर भाजपा से अलग हुई अकाली दल इस साल हुए विधानसभा चुनाव में सिर्फ तीन सीट जीत पाई। खुद प्रकाश सिंह बादल चुनाव हार गए। उधर तमिलनाडु में भाजपा की सहयोगी अन्ना डीएमके का हाल भी बुरा है। पार्टी चुनाव तो हार ही गई है साथ ही पार्टी के दो खेमों के बीच जबरदस्त खींचतान चल रही है।

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