पुर्तगाल, चीन और पाकिस्तान को औकात बताने Genral Sagat Singh Rathore
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पुर्तगाल, चीन और पाकिस्तान को औकात बताने वाले और एक देश बांग्लादेश बनाने वाले जनरल सगत सिंह, जिन्हें कोई वीरता पुरस्कार नहीं दिया गया

genral sagat singh rathore

जयपुर | भारतीय सेना में एक ऐसा जनरल भी हुआ है, जिन्होंने चीन, पाकिस्तान और पुर्तगाल तीन देशों को औकात बता दी थी। तीनों देशों में उनका नाम आज भी चर्चाओं में आता है। पुर्तगाल के प्रधानमंत्री ने तो उन्हें जिंदा या मुर्दा पकड़े जाने वाले पर दस हजार डॉलर का इनाम रखा था। परन्तु आपको जानकर हैरत होगी कि भारतीय सेना के तीन महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आपरेशन गोवा मुक्ति संग्राम, नाथूला संघर्ष और बांग्लादेश निर्माण के हीरो रहे सगत सिंह ( Genral Sagat Singh Rathore ) को कभी कोई वीरता पुरस्कार नहीं दिया गया। देश के पश्चिमी इलाके जयपुर में खातीपुरा तिराहे पर और पूर्वी क्षेत्र असम के तेजपुर में सेना की ओर से सगतसिंह की मूर्तियां लगाई गई हैं।

Genral Sagat Singh

हालांकि उन्हें सरकार ने तीसरा नागरिक सम्मान पदम भूषण और सेना की ओर से सर्वोच्च सेवा मैडल परम विशिष्ट सेवा मैडल दिया गया। , लेकिन एक सैनिक के तौर पर दिए जाने वाले परमवीर, महावीर और वीर चक्र जैसे वीरता पुरस्कार जिनके हकदार सगतसिंह थे। वे उन्हें नहीं दिए गए सगत सिंह की कहानी दुनियाभर में पढ़ाई जाती है।

जन्म और शिक्षा
Genral Sagat Singh Rathore का जन्म 14 जुलाई 1919 को तत्कालीन बीकानेर राज्य के चुरू क्षेत्र के कुसुमदेसर गाँव में एक राजपूत परिवार में बृजलाल सिंह राठौड़ और श्रीमती जड़ाव कंवर के यहाँ हुआ था। बृजलालसिंह बीकानेर गंगा रिसाला में एक सैनिक थे जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मेसोपोटामिया, फिलिस्तीन और फ्रांस में लड़ाई लड़ी थी। वे एक मानद कप्तान के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। सगत तीन भाइयों और छह बहनों में सबसे बड़े थे, उन्होंने 1936 में बीकानेर के वाल्टर नोबल्स हाई स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। सिंह ने बीकानेर के डूंगर कॉलेज में प्रवेश लिया, लेकिन 1938 में इंटर की परीक्षा के ठीक बाद, उन्हें बीकानेर गंगा रिसाला में एक नायक के रूप में नामांकित किया गया। बाद में, उन्हें जमादार (अब नायब सूबेदार) में पदोन्नत किया गया और एक पलटन की कमान दी गई।

गोवा मुक्ति संग्राम
सगतसिंह पैरा ब्रिगेड के कमांडर थे और इन्होंने गोवा को जिस तरह से भारत में मिलाया। उसे देखकर दुनिया दंग रह गई। पुर्तगाल के प्रधानमंत्री ने सगत सिंह को पकड़े जाने पर दस हजार डॉलर का इनाम रख दिया। एक विदेशी ने जब आगरा में सगत सिंह को इसकी जानकारी दी तो वे बोले ले चलो मुझे! इस पर वह विदेशी बोला माफ कीजिए​! मैं पुर्तगाल नहीं जा रहा।

General Sagat Singh Story : जनरल सगतसिंह थे जिनकी वजह से भी पूर्वी पाकिस्तान आज बांग्लादेश है

जब सैकड़ों चीनियों को मौत के घाट उतारा
1962 की लड़ाई के बाद चीन का साहस बहुत बढ़ा हुआ था और भारतीय सीमा पर लगातार कब्जा करने की हिमाकत की जा रही थी। भारतीय सैनिकों ने जब नाथूला में बाड़ लगाने की कोशिश की तो चीन ने गोली बारी शुरू कर दी और तोपखाने का मुंह खोल दिया। इस हमले में भारत की ओर से 88 जवान शहीद हुए और 163 गंभीर घायल हुए। भारतीय सेना को जब सरकार की ओर से तोप के इस्तेमाल की इजाजत नहीं मिली तो सगत सिंह ने अपने स्तर पर आर्डर दिया और करीब साढ़े तीन सौ से अधिक चीनियों को मौत के घाट उतार दिया। यही नहीं करीब साढ़े चार सौ चीनी घायल भी हुए। इस घटनाक्रम के बाद भारतीय सेना का 1962 के युद्ध में खोया साहस लौटा और सगत सिंह एक और ठंडी पोस्टिंग में लगा दिए गए।

भारत का पहला हैलीबॉर्न आपरेशन
1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में आधा दर्जन से भी कम एमआई हैलीकॉप्टरों के सहारे ढाई हजार जवानों को मेघना नदी पार करवाकर 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को आत्मसमर्पण के लिए आधार रचने वाले सगत सिंह ही थे। अपने मित्र जो कि बाद में एयर वाइस मार्शल बने पाली जिले के बागावास निवासी चंदन सिंह राठौड़ की मदद से इस असंभव लगने वाले काम को अंजाम दिया। तब देश के रक्षा मंत्री बाबू जगजीवन राम और पीएम इंदिरा गांधी हैरत में पड़ गए थे कि भारतीय सेना इतनी जल्दी ढाका कैसे पहुंच गई। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि सेना के ढाका में प्रवेश करने की प्लानिंग सेना और सरकार के स्तर पर बनी ही नहीं थी, जबकि सगत सिंह ने उसे अंजाम भी दे दिया।

बांग्लादेश के प्रशासक भी रहे
बांग्लादेश की स्वतंत्रता पर शेख हसीना के पिता और मुक्ति संग्राम के नायक शेख मुजीबुररहमान को गार्ड आफ आनर जनरल सगत के नेतृत्व में दिया गया था। ढाका पहुंची इंदिरा गांधी ने भी सगत सिंह का आभार जताया था। सगत सिंह बांग्लादेश के पहले प्रशासक रहे और शेख मुजीबुर्ररहमान को प्रशासन सेट अप में मदद भी की। जयपुर में सेना ने उनके नाम पर खातीपुरा से हसनपुरा जाने वाली सड़क का नामकरण किया और उनकी एक आदमकद प्रतिमा भी खातीपुरा तिराहे पर लगाई है। इस महान यौद्धा की कहानी भारतीय सैन्य अकादमी में तो पढ़ाई जाती है, लेकिन स्कूल—कॉलेजों से दूर ही है। आज उनका जन्मदिन है, इस लिहाज से नया इंडिया उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करता है। जयपुर में उनकी मूर्ति अनावरण समारोह में सेना के अधिकारियों ने कहा कि Genral Sagat Singh Rathore जो 1961 में पुर्तगालियों से गोवा को मुक्त कराने, 1971 में बांग्लादेश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा गए। उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए।

By Pradeep Singh

Experienced Journalist with a demonstrated history of working in the newspapers industry. Skilled in News Writing, Editing. Strong media and communication professional. Many Time Awarded by good journalism. Also Have Two Journalism Fellowship. Currently working with Naya India.

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