दुष्कर्म की घटनाएं जिससे देश उबल गया - Naya India
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दुष्कर्म की घटनाएं जिससे देश उबल गया

नई दिल्ली। हैदराबाद की महिला डॉक्टर का रेप और उसकी हत्या करने वाले आरोपियों को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया। इससे देश में कहीं उत्साह है तो कुछ लोग इस एनकाउंटर पर सवाल भी उठा रहे हैं। निर्भया के समय भी देश में बहुत गुस्से का माहौल कायम हो गया था जब चलती बस में कुछ लड़कों ने उसके साथ दुष्कर्म किया व उसे मरणासन्न हालत में छोड़ दिया था। तब भी काफी हो—हल्ला मचा था। कमेटी बनाई गई। कुछ सुझाव भी आए। निर्भया फंड भी बनाया गया। लेकिन देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जो स्थित है वह अब भी जस की तस।

संसद में भी कुछ लोग हैदराबाद की पुलिस ने जो किया उसका समर्थन कर रहे है तो कुछ उस एनकाउंटर पर सवाल भी उठा रहे हैं ? लेकिन सवाल उठता है कि आखिर हमारे नेता पुलिस व्यवस्था को ठीक करने के लिए क्या कर रहे हैं? क्या हैदराबाद के आरोपियों का एनकाउंटर करने से देश में महिलाओं की स्थिति बेहतर हो जाएगी ? क्या पुलिस का इस तरह कानून अपने हाथ में लेना ठीक है ? रसूख वाले दुष्कर्म आरोपियों के साथ क्या पुलिस हैदराबाद के आरोपियों से सलूक कर सकती है ? आखिर हमारे नेता पुलिस सुधारों को लागू क्यों नहीं करते ? यह कुछ ऐसे सवाल है जिनका उत्तर मिलना जरुरी है।

अगर हम निर्भया के बाद ही इस दिशा में जरुरी और सख्त कदम उठाते तो आज हैदराबाद जैसी घटना हमें देखना नहीं पड़ती। निर्भया केस में 7 साल बीत जाने के बाद भी आरोपियों को फांसी पर नहीं लटकाया गया है।

देश में दुष्कर्म के कई ऐसे मामले हैं जिन्होंने देश को झकझोर दिया था। जानते हैं अभी उनकी कानूनी स्थिति क्या है :

उन्नाव दुष्कर्म कांड

वर्ष 2017 में नाबालिग लड़की ने भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया। उच्चतम न्यायालय के आदेश पर मामले की सुनवाई दिल्ली स्थानांतरित करते हुए सीबीआई को सात दिनों में जांच पूरी करने को कहा। न्यायालय ने इस साल दो अगस्त को सीबीआई को सात और दिन जांच के लिए दिए।

मामले की सुनवाई 11 सितंबर को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में ही बंद कमरे में शुरू हुई जहां पर एक सड़क हादसे के बाद 28 जुलाई को पीड़िता को भर्ती कराया गया था। पीड़िता ने अपना बयान दर्ज कराया। मुख्य मामले के साथ पीड़िता से हादसे का मामला भी दिल्ली स्थानांतरित किया गया।

सामूहिक दुष्कर्म मामले में आरोपी नरेश तिवारी, ब्रिजेश यादव सिंह और सुभम सिंह जमानत पर जेल से बाहर हैं। अंतिम दौर की जिरह जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा की अदालत में चल रही है जहां पर हाल में बचाव पक्ष ने बयान दर्ज कराने का कार्य पूरा किया और अब सीबीआई बहस करेगी।

मुजफ्फरपुर बाल गृह कांड

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित बाल गृह में कई नाबालिग बच्चियों का यौन एवं शारीरिक शोषण किया गया। इसका खुलासा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस (टीआईएसएस) की रिपोर्ट में हुआ जो बिहार सरकार के समक्ष 26 मई 2018 को जमा कराई गई थी। मामले में पूर्व विधायक ब्रजेश ठाकुर मुख्य आरोपी है।

मामले में निर्धारित समय से एक महीना पहले 12 दिसंबर को फैसला आने की उम्मीद है।

सीबीआई ने विशेष अदालत को बताया कि मामले के 20 आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल दो अगस्त को मामले पर संज्ञान लिया और 28 नंवबर 2018 को जांच सीबीआई को सौंप दिया। सात फरवरी 2019 को मामले की सुनवाई मुजफ्फरपुर से दिल्ली स्थिति साकेत जिला अदालत के पोक्सो अदालत स्थारांतरित की गयी।

पोक्सो अदालत ने सीबीआई के वकील और 11 अरोपियों का पक्ष सुनने के बाद 30 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया।

निर्भया सामूहिक दुष्कर्म कांड

दिल्ली में दिसंबर 2012 में 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई। पिछले साल जुलाई में उच्चतम न्यायालय ने मौत की सजा पाए चार दोषियों में से तीन की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। चौथे आरोपी ने पांच मई 2017 में उच्चतम न्यायालय की ओर से मिली मौत की सजा के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं की थी।

हाल में तीन दोषियों ने जेल प्रशासन को पत्र लिखकर 29 अक्टूबर की अधिसूचना को वापस लेने की मांग की जिसमें राष्ट्रपति के समक्ष क्षमादान के लिए सात दिन की समय सीमा निर्धारित की गई थी। जेल प्रशासन ने कहा कि राष्ट्रपति से माफी मांगने की याचिका को छोड़ दोषियों के सभी कानूनी विकल्प खत्म हो गए हैं। मामले में एक आरोपी राम सिंह ने सुनवाई के दौरान ही तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर खुदकशी कर ली थी। वहीं एक नाबालिग को बाल न्याय बोर्ड ने दोषी करार दिया और तीन साल तक सुधार गृह में रखने के बाद छोड़ दिया।

कठुआ दुष्कर्म कांड

वर्ष 2018 में कठुआ में आठ वर्षीय बच्ची के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में छह लोगों को दोषी करार दिया गया। चार महीने बाद, अक्टूबर में हलांकि जम्मू की अदालत ने पुलिस को मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम के छह सदस्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया। जांच दल के सदस्यों पर गवाहों को गलत गवाही देने के लिए दबाव बनाने और यातना देने का आरोप है।

इस साल जून में जिला एवं सत्र न्यायाधीश तेजविंदर सिंह की अदालत ने तीन आरोपियों को उम्र कैद की सुनाई जबकि बाकी तीन को सबूतों को नष्ट करने के आरोप में पांच-पांच साल कारावास की सजा सुनाई।

कठुओ में वकीलों द्वारा मामले में आरोप पत्र दाखिल करने से रोकने पर उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई पंजाब के पठानकोट स्थानांतरित कर दी थी और करीब एक साल तक बंद कमरे में मामले की सुनवाई हुई।

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