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केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तिथि हुई निश्चित, जानें दर्शनों के लिए कब खुलेंगे चारों धाम के पट

रुद्रप्रयाग। केदारनाथ के भक्तों के लिए खुशखबर आ गई है। मंदिर के पट दर्शनों के लिए 17 मई सुबह 5 बजे खुल जाएंगे। खबर के बाद भक्त अपने आराध्य के दर्शनों के लिए तैयारियों में जुट गए हैं। बाबा केदार की डोली उनके शीतकालीन प्रवास स्थल उखीमठ से 14 मई को रवाना होगी। केदारनाथ मंदिर के कपाट पिछले वर्ष 16 नवंबर 2020 को विधि-पूर्वक बंद किये गए थे।उत्तराखंड में उच्च गढ़वाल के हिमालयी क्षेत्र में केदारनाथ मंदिर बसा हुआ है। केदारनाथ मंदिर के पट इस वर्ष 17 मई को प्रातः 5 बजे भक्तों के लिए खोले जाएंगे। चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के एक प्रवक्ता ने बताया कि बृहस्पतिवार को महाशिवरा​त्रि के पर्व पर मुहुर्त निकाला गया। रुद्रप्रयाग के उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में केदारनाथ इस मुहुर्त कार्यक्रम को विधि विधान के साथ आयोजित किया गया।केदारनाथ मंदिर के कपाट भक्तों के लिए ग्रीष्मकाल में 6 महीने के लिए ही खुलते हैं। दीवाली के अगले दिन केदारनाथ मंदिर के कपाट विधि-विधान के साथ बंद कर दिए जाते हैं। केदारनाथ में शीतऋतु में अत्यधिक बर्फबारी होती है। इस कारण वहां जाना आसान नहीं होता है।

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चारों धामों की तिथि निश्चित, चार धाम यात्रा की शुरुआत

केदार से पहले, बंसत पंचमी के पावन पर्व पर बदरीनाथ के कपाट 18 मई को प्रातः सवा चार बजे खोलने का मुहूर्त निकाला गया था। 14 मई को अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट पूरे विधि-विधान के साथ खोले जाएंगे। गंगोत्री को मां गंगा का उदगम स्थल कहा जाता है। चारों धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा शुरू हो जाएगी।

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चारधाम यात्रा के देश-विदेश से आते हैं श्रद्धालु

गढ़वाल हिमालय के चारों धाम (केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमनोत्री) पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। 6 महीने की इस यात्रा में विश्वभर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। चारों धाम के कपाट भीषण ठंड और बर्फबारी के कारण हप साल अक्टूबर-नवंबर में श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिये जाते हैं। जो अगले वर्ष अप्रैल-मई में खुलते हैं। चारधाम यात्रा को उत्तराखंड की आर्थिकी की रीढ़ माना जाता है क्योंकि स्थानीय लोग भी कपाट बंद होने के साथ निचले इलाके में आ जाते है उनके लिए भी इतनी ठंड में रहना आसान नहीं होता। स्थानीय लोगो के लिए चारधाम यात्रा का इंतज़ार रहता है इनका जीवन-यापन चारधाम यात्रा से ही होता है।

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