Khatu Mela 2021 : कोरोना ने बदली ये व्यवस्थाएं, जानिए खाटूश्यामजी मंदिर के शिखर पर सिर्फ सूरजगढ़ का ही निशान क्यों? - Naya India
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Khatu Mela 2021 : कोरोना ने बदली ये व्यवस्थाएं, जानिए खाटूश्यामजी मंदिर के शिखर पर सिर्फ सूरजगढ़ का ही निशान क्यों?

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खाटूश्यामजी (सीकर)। राजस्थान के सीकर जिले के गांव खाटू में ‘हारे का सहारा’ बाबा श्याम का फाल्गुनी लक्खी मेला 2021 बुधवार से शुरू होगा। खाटू मेले 2021 की अवधि दस दिन की होगी। कोरोना काल में 17 से 26 मार्च तक चलने वाले खाटूश्यामजी मेले के लिए इस बार कई नई व्यवस्थाएं की गई हैं।

श्री श्याम मन्दिर कमेटी खाटूश्यामजी, सीकर जिला प्रशासन व पुलिस अधिकारी मंगलवार को खाटू मेला 2021 की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे रहे। सीकर एसपी कुंवर राष्ट्रदीप ने बताया कि खाटूश्यामजी मेले में करीब 3 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। पिछली बार के मेले से तीन सौ पुलिसकर्मी अधिक लगाए हैं।

खाटूश्यामजी मेला स्थल के मुख्य रास्तों पर चार जगहों पर पुलिस प्वाइंटस बनाए गए हैं, जहां 15—15 टीमें श्याम भक्तों के कोरोना जांच संबंधी मेडिकल दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इस बार श्याम भक्तों को कोरोना महामारी के ​कारण 72 घंटे के भीतर की कोविड जांच की निगेटिव रिपोर्ट साथ लानी होगी।

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खाटूश्यामजी मेला 2021 की नई व्यवस्थाएं

1.ऑनलाइन पंजीयन करने वाले भक्त ही इस बार बाबा श्याम के दर्शन कर सकेंगे।
2. खाटू फाल्गुनी मेला 2021 में रोजाना करीब 35 हजार श्याम भक्तों को दर्शन करवाएंगे, जो हर साल की तुलना में 80 फीसदी कम है।
3. कोरोना महामारी को देखते हुए खाटूश्यामजी के रास्तों में भंडारों और श्याम भक्तों द्वारा निशान चढ़ाने पर पूरी तरह से पाबंदी रहेगी।
4. मेले में सीकर पुलिस के तीन हजार अधिकारी व जवानों के अलावा श्री श्याम मन्दिर कमेटी के स्वयं सेवक भी तैनात रहेंगे। इन सभी को कोरोना का टीका लगवाना अनिवार्य है।
5. खाटू मेला 2021 में अस्थायी दुकानों, धर्मशालाओं में होने वाले भजन-कीर्तन आदि पर रोक लगाई गई है। धर्मशाला, होटल व गेस्ट हाउस में 3 दिन तक ही श्रद्धालुओं को ठहरा सकेंगे।

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खाटू मंदिर के लिए क्या है सूरजगढ़ के निशान का महत्व?

यूं तो खाटूश्यामजी को हर साल लाखों निशान चढ़ाए जाते हैं, मगर सालभर खाटू मंदिर के शिखर पर सिर्फ सूरजगढ़ वालों का निशान ही लहराता है। दरअसल, झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ के श्याम भक्तों द्वारा हर साल खाटू मेले में विशेष निशान चढ़ाया जाता है। सूरजगढ़ के भोजराजका परिवार के लोग कहते हैं कि करीब सवा सौ साल पहले अंग्रेजों ने खाटूश्यामजी मंदिर के ताला जड़ दिया था। तब सूरजगढ़ के श्याम भक्त मंगलाराम खाटूश्यामजी निशान लेकर पहुंचे और मंगलाराम ने मोरपंखी से ताला तोड़ दिया था। उस दिन के बाद से सूरजगढ़ के निशान की मान्यता सबसे ज्यादा बढ़ गई। यही वजह है कि बाबा श्याम के मंदिर के शिखर पर केवल सूरजगढ़ वालों का निशान चढ़ता है।

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