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Mahakumbh 2021: महाकुंभ की हुई शुरुआत, श्रद्धालुओं को कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट दिखाने पर ही मिलेगा प्रवेश

भारत में होने लगना वाला कुंभ मेला विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है.  महाकुंभ 2021 का आगाज आज से हो चुका है. कुंभ करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है. कुंभ का मेला 1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक चलेगा. लेकिन कोरोना के संक्रमण को देखते हुए इस बार  महाकुंभ में जाने के लिए 72 घंटे पहले की कोरोना का निगेटिव रिपोर्ट दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है. भारत में हर 12वें वर्ष चार स्थानों पर कुंभ का आयोजन किया जाता है. कुंभ का आयोजन  हरिद्वार,प्रयागराज,उज्जैन और नासिक में किया जाता है. लेकिन इस वर्ष कुंभ मेले के इतिहास में पहली बार हरिद्वार में बाहरवें वर्ष के बजाय ग्याहरवे वर्ष में किया जा रहा है.

83 वर्षों बाद बना यह संयोग

दरअसल, अमृत योग का निर्माण काल गणना के अनुसार होता है. जब कुंभ राशि का गुरु आर्य के सूर्य में परिवर्तित होता है. यानी गुरु, कुंभ राशि में नहीं होंग तब ही कुंभ का आयोजन किया जाता है.  इसलिए इस बार 11वें साल में कुंभ का आयोजन हो रहा है. 83 वर्षों की अवधि के बाद यह अद्भुत संयोग आ रहा है.  इससे पहले इस तरह की घटना वर्ष 1760, 1885 और 1938 में हुई थी.

4 शाही स्नान में 13 अखाड़े लेंगे भाग

इस वर्ष भी कुंभ मेले के दौरान पवित्र गंगा में डुबकी लगाने के लिए लाखों भक्तों के इकट्ठे होने की उम्मीद है. हालांकि महामारी से निपटने के लिए सरकार ने सख्त गाइडलाइ जारी की है. उतराखंड के नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कुंभ में आने वालों के लिए सख्त गाइडलाइन का ऐलान किया है.  गाइडलाइनों के तहत कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 72 घंटे पहले की कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट दिखानी होगी. इसके साथ ही  मास्क,सैनेटैइज़र और सामाजिक दुरी का पालन करना होगा. इस बार कुंभ में चार शाही स्नान होंगे. इनमें 13 अखाडे भाग लेंगे. इन अखाडों से झांकी निकाली जाएगी.  इस झांकी में सबसे आगे नागा बाबा होंगे इसके बाद महंत, मंडलेश्वर, महामंडलेश्वर और आचार्य महामंडलेश्वर नागा बाबाओं का अनुसरण करेंगे.

 

शाही स्नान की तिथियां

सोमवती अमावस्या (शाही स्नान) – अप्रैल 12- 2021

बैसाखी (शाही स्नान) – अप्रैल 14- 2021

राम नवमी (स्नान) – अप्रैल 21-2021

चैत्र पुर्णिमा (शाही स्नान)– अप्रैल 27-2021

कुंभ में शाही स्नान के पीछे की मान्यता

महाकुंभ में स्नान करने के पीछे यह मान्यता है कि जब देवताओं और असुरों के बीच समुंद्र मंथन हो रहा था.  तब समुंद्र से अमृत का कलश निकला तो उसको पाने के लिए देवताओं और असुरों के बीच छीनाझपटी हो गई. उस समय अमृत कलश से अमृत की चार बुंदे धरती पर चार जगहों पर ही छलकी थी. अमृत की चार बुंदे हरिद्वार,प्रयागराज,उज्जैन और नासिक में गिरी थी. तब से कुंभ में शाही स्नान किये जाने का महत्व है.

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