nayaindia Kumbh Special हरिद्वार में हर की पौड़ी का क्यों है महत्व,आइए जानें इसे ब्रह्मकुंड क्यों कहते हैं..... - Naya India
आज खास | देश | उत्तराखंड | ताजा पोस्ट | लाइफ स्टाइल | धर्म कर्म | वीकेंड स्पेशल | शनिवार फुर्रस्त| नया इंडिया|

Kumbh Special हरिद्वार में हर की पौड़ी का क्यों है महत्व,आइए जानें इसे ब्रह्मकुंड क्यों कहते हैं…..

New Delhi: इन दिनों पवित्र कुंभ में डुबकी लगाने के लिए हर कोई लालायित है। हालांकि कोविड के चलते सावधानियों की भी जरूरत है। हम आपको बता रहे हैं प्रसिद्ध हर की पौड़ी का महत्व। हरिद्वार स्थित हर की पौड़ी  पर ब्रह्मकुंड को सबसे पवित्र स्थान माना गया है. ऐसी मान्यता है कि जब माता गंगा स्वर्ग से धरती पर आई थी तो  ब्रह्माजी  ने यही पर उनका स्वागत किया था. ऐसा भी कहते है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत कलश के लिए देव-दानवों के बीच हुई छीना-झपटी में पृथ्वी पर जिन चार स्थानों पर अमृत छलका, उनमें से एक हर की पौड़ी भी थी.  इसलिए यहां पर 12 साल में एक बार लगने वाले कुंभ मेले का आयोजन भी होता है. यहां पर आने वाले श्रद्धालु चाहते हैं कि वे एक बार हर की पौड़ी  पर स्नान अवश्य करें.

हर की पौड़ी का निर्माण किसने करवाया

हर की पौड़ी या ब्रह्मकुंड धर्मनगरी का मुख्य घाट है. इस घाट का निर्माण राजा विक्रमादित्य ने अपने भाई भर्तृहरि की याद में करवाया था. भर्तृहरि ने यहीं गंगा के तट पर तपस्या करके अमर पद पाया था. राजा विक्रमादित्य ने भर्तृहरि की याद में पहले यह कुंड और फिर पौड़ी  का निर्माण करवाया था. हरिद्वार से ही गंगा पहाड़ो को छोड़ मैदानी इलाकों की ओर जाते है.

इसे भी पढ़ें-  Whats app ने सेवा बाधित होने पर कुछ यूं दी प्रतिक्रिया, जानें क्या था लोगों का हाल

कैसे पड़ा  ब्रह्मकुंड नाम

कालांतर में इसका नाम हरि की पैड़ी था लेकिन अब इसकी नाम हर की पौड़ी है. ऐसी मान्यता है कि सतयुग में श्वेत नामक एक राजा हुआ करते थे.  श्वेत ने हर की पैड़ी पर ही ब्रह्मा जी की पूजा की थी. इससे प्रसन्न हो ब्रह्माजी ने राजा से मनवांछित वर मांगने को कहा , तो राजा ने  ब्रह्माजी से वरदान स्वरुप मांगा कि इस स्थान को उन्हीं के नाम से प्रसिद्धि मिले. कहते हैं कि तभी से हर की पौड़ी  को ब्रह्मकुंड के नाम से भी जाना जाता है.

ऐसा कहा जाता है कि वैदिक काल में भगवान शिव हर की पौड़ी  पर आए थे. भगवान विष्णु के पदचिह्न भी यहां एक पौड़ी पर अंकित है. पदचिह्न की वजह से इस स्थान को हरि की पौड़ी के नाम से पुकारा जाता है. शाम के समय में पर भव्य गंगा आरती होती है. जो पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध है. जिसे देखने विदेशों से भी लोग आते है.

इसे भी पढ़ें- अहमदाबाद टी20 : निर्णायक मुकाबले में आज भिड़ेंगे भारत और इंग्लैंड

खास महत्व है हर की पैड़ी या ब्रह्मकुंड

ऐसी मान्यता है कि हर की पौड़ी पर गंगा में स्नान करने या एक बार डुबकी लगाने से जीवन भर के पापों से मुक्ति मिलती है. हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां मुंडन, उपनयन जैसे संस्कार पूर्ण कराने के लिए पहुंचते हैं. प्रत्येक 12 वर्ष के अंतराल में कुंभ मेले के दौरान शैव, वैष्णव व उदासीन पंथ के अखाड़े शाही स्नान के लिए यहां पहुंचते हैं.

इसे भी पढ़ें- महिला क्रिकेट: कप्तान के बगैर टी20 सीरीज का विजयी आगाज चाहेगी टीम इंडिया

हर की पौड़ी पर तीनो देवों का है वास

स्वामी दिव्येश्वरानंद कहते हैं कि हर की पैड़ी में ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों देवों का वास माना गया है. इसलिए इसे हर की पौड़ी,हिर की पोड़ी या ब्रह्मकुंड भी कहा जाता है. हर का मतलब होता है- भगवान शिव और हरि का मतलब होता है- भगवान विष्णु. यही वजह है कि देश-विदेश से श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने यहां खिंचे चले आते हैं.

इसे भी पढ़ें- बैडमिंटन : सिंधु ऑल इंग्लैंड टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में

Leave a comment

Your email address will not be published.

5 × 4 =

और पढ़ें

ट्रेंडिंग खबरें arrow
x
न्यूज़ फ़्लैश
जेईई पेपर लीक मामले में रूसी नागरिक हिरासत में
जेईई पेपर लीक मामले में रूसी नागरिक हिरासत में