किसानों के आय का साधन बनी नाशपाती की खेती

रांची। प्राकृतिक संपदाओं से भरपूर झारखंड के लातेहार जिले के पर्यटन क्षेत्र नेतरहाट में अब नाशपाती की खेती किसानों के लिए आय का साधन बन गई है। यहां अंग्रेजी हुकूमत के काल से ही नाशपाती की खेती हो रही है।

लातेहार जिला मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर दूर बेहतर वातावरण के लिए प्रसिद्घ पर्यटक स्थल नेतरहाट में प्रतिवर्ष करीब 10 हजार क्विं टल नाशपाती की उपज होती है।

इस वर्ष भी नाशपाती की अच्छी उपज हुई है। नेतरहाट में जहां कृषि विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन होता है, वहीं ग्रामीण भी अब इसकी खेती से जुड़ गए हैं। कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि यहां प्रत्येक साल 10 हजार क्विंटल नाशपाती का उत्पादन होता है। यहां की नाशपाती कोलकाता सहित कई क्षेत्रों में भेजी जाती है।

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विभाग को अनुमान है कि उनके नाशपाती बगान में ही इस साल 5000 क्विंटल से अधिक नाशपाती का उत्पादन होगा। यहां करीब 85 एकड़ भूमि में लगी नाशपाती से प्रत्येक साल यहां के मजदूरों को अच्छी आमदनी होती है। इन दिनों प्रत्येक दिन यहां के बगानों से नाशपाती तोड़ी जा रही है। नाशपाती बगान के केयर टेकर मोहन ने बताया कि इस साल अच्छी फसल आई है। उन्होंने कहा कि फसल पूरी तरह तैयार है।

उन्होंने बताया कि बगान का टेंडर इस बार हुआ है, हालांकि पिछले साल इसका टेंडर नहीं हुआ था। इधर, इस साल नए नाशपाती के पौघे भी लगाने का निर्णय जिला प्रशासन ने लिया है। लातेहार जिला में प्रति की गोद में बसा नेतरहाट, जहां का प्रातिक सौंदर्य देखने के लिए न केवल देश बल्कि विदेशों से भी पर्यटक आते हैं।

बताया जाात है कि इस इलाके में अंग्रेजी हुकूमत के दौरान भी नाशपाती की खेती हुआ करती थी। जिला प्रशासन ने नाशपाती की खेती को लेकर कई किसानों को इस साल प्रशिक्षण दिलवाया है, जिससे नाशपाती के उत्पादन को बढ़ाया जा सके। लातेहार के उपायुक्त जिशान अली भी कहते हैं कि नाशपाती की खेती से किसानों की आय बढ़ी है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में नाशपाती की खेती का अच्छा ग्रोथ है। नाशपाती की खेती को लेकर किसानों को जागरूक बनाया जा रहा है।

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