अशोक गहलोत जन्मदिन विशेष : मोदी ही नहीं सीएम अशोक गहलोत का भी झलकता है चाय-प्रेम, हर चुस्की में दिखता है सियासी दाव - Naya India
आज खास | ताजा पोस्ट | देश | राजनीति | राजस्थान| नया इंडिया|

अशोक गहलोत जन्मदिन विशेष : मोदी ही नहीं सीएम अशोक गहलोत का भी झलकता है चाय-प्रेम, हर चुस्की में दिखता है सियासी दाव

आज राजस्थान(Rajasthan) के मुख्यमंत्री और राजनीति के जादूगर अशोक गहलोत ( Ashok Gehlot) का जन्मदिन है. अशोक गहलोत का जन्म 3 अप्रैल1951 को राजस्थान के जोधपुर ( jodhpur) में हुआ था. आज अशोक गहलोत 69 वर्ष के हो चुके हैं. राजनीति के जादूगर कहे जाने वाले अशोक गहलोत के जन्मदिन पर अनकी जिंदगी से जुड़ा एक अनछुआ पहलु आपको बताते हैं. सीएम गहलोत चाय और पार्लेजी बिस्किट (Parle-G) के बहुत बड़े शौकीन हैं. यहीं कारण है कि सीएम गहलोत कई बार सड़क किनारे चाय पीते दिख जाते हैं. इस बारे में एक सीएंम के परिवार के एक सदस्य ने बताया कि वो अपने साथ हमेशा एक बिस्किट का पैकेट रखते हैं. वैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( PM Narnedra modi) का चाय प्रेम भी किसी से भी छिपा नहीं है. इसे महज इत्तेफाक ही कहा जा सकता है कि दोनों चाय प्रेमी एक मिडिल क्लास परिवार से आते है. दोनों ने ही फर्श से अर्श तक का सफर तय किया है. ये चाय शायद कुछ हद तक दोनों की सोच में भी समानता लाती है.क्योकि कोविड-19 जैसी महामारी से निपटने के लिए अशोक गहलोत ने देश में सबसे पहले लॉकडाउन ( Lockdown) का ऐलान किया था. इसके कुछ दिन बाद ही प्रधानमंत्री मोदी ने भी देशव्यापी लॉकडाउन लगा दिया था. विचारों में समानता का एक प्रमाण यह भी है कि कुछ दिन पुर्व पीएम मोदी द्वारा दिये गये आर्थिक पैकेज की तारीफ अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर की थी. लेकिन दोनों की चाय शायद अलग-अलग बगानों से आती है तभी ये चाय दोनों पर अलग- अलग राजनीतिक रंग चढ़ाती है.

इसे भी पढ़ें चुनाव आयोग ने असम के मंत्री हिमंत बिस्व सरमा को 48 घंटों प्रचार करने से रोका, IPS के भाई का किया तबादला

शिक्षा और राजनीतिक करियर

अशोक गहलोत के पिता का नाम लक्ष्मण सिंह गहलोत है.अशोक गहलोत का विवाह सुनीता गहलोत के साथ27 नवंबर1977 को हुई थी. अशोक गहलोत ने विज्ञान और कानून में स्नातक डिग्री प्राप्त की तथा अर्थशास्त्र विषय लेकर स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है. गहलोत के एक पुत्र वैभव गहलोत और एक पुत्री सोनिया गहलोत हैं. अशोक गहलोत के पुर्वज जादूगरी का काम करते थे. गहलोत के पिता पेशे से जादूगर ही थे. शुरूआत में कुछ समय अशोक गहलोत ने भी जादूगरी का काम किया था. लोकिन उनके साथी उनको छेड़ते थे. ऐसे में उनका यह पेशा ज्यादा नहीं चला. शायद वो नसीब में पहले से लिखवाकर आये थे कि वे आगे चलकर सियासत के जादूगर बनेंगे. अशोक गहलोत की रूचि राजनीति में ही रही है. गहलोत बहुत छोटी उम्र में ही राजनीति में आ गये थे. इंदिरा गांधी के शासन काल में गहलोत तीन बार केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं.

अमित शाह की रणनीति भी नहीं टिकी अशोक गहलोत के आगे

वर्ष 2013 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह हारी थी. बुरी तरह हार के बाद कई नेताओ को लग रहा था कि अब पार्टी में जनरेशन शिफ्ट होगा और नए नेताओं को आगे लाया जाएगा. लेकिन गहलोत ने विपक्ष में रहने के दौरान भी सक्रियता नहीं छोड़ी. कांगेस हाईकमान ने गहलोत को पंजाब की जिम्मेदारी दी. फिर गुजरात का प्रभारी महासचिव बनाया. गहलोत ने कुछ ही समय में गुजरात में कांग्रेस को मुकाबले में ला दिया था. राज्यसभा चुनाव में अहमद पटेल की लगभग हारी हुई बाजी को गहलोत की रणनीति ने जीत में बदल दिया. उस वक्त गहलोत की रणनीति की देश भर में चर्चा हुई थी. क्योंकि अमित शाह की रणनीति के आगे अहमद पटेल की राज्यसभा सीट पर रणनीतिक रूप से जीत आसान नहीं थी. लेकिन तब भी गहलोत अपनी रणनीति में सफल रहे. अशोक गहलोत को राजनीति का जादूगर कहा जाता है.

इसे भी पढ़ें किसान नेता राकेश टिकैत पर जानलेवा हमला, सोलह लोग गिरफ्तार, सीएम गहलोत ने की निंदा

कर्नाटक में कांग्रेस -जेडीएस की गठबंधन सरकार

पिछले गुजरात विधानसभा चुनाव में अशोक गहलोत ने प्रभारी रहते हुए अपनी टीम बनाकर जिस तरह आक्रामक चुनाव प्रचार किया उसकी गूंज राष्ट्रीय राजनीति में सुनाई दी. गुजरात में कांग्रेस भले ही सरकार नहीं बना पाई लेकिन उसका प्रदर्शन शानदार रहा था. इसके पीछे गहलोत की रणनीति को कारण माना गया. गुजरात के प्रभारी के बाद अशोक गहलोत को कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव की जिम्मेदारी दी गई. कर्नाटक में भले ही कांग्रेस की खुदकी सरकार नहीं बनी लेकिम कांग्रेस ने गठबंधन में सरकार बनाई. कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस की गठबंधन सरकार बनाई और उस वक्त अशोक गहलोत ने ही प्रमुख रणनीतिकार की भूमिका निभाई थी.

चुनाव से पहले जीत के बयान

संगठन महासचिव रहते हुए विधानसभा का चुनाव लड़कर और तीसरी बार मुख्यमंत्री बनकर अशोक गहलोत ने राजनीतिक प्रेक्षकों को चौंका दिया था. संगठन महासचिव रहते हुए विधानसभा चुनाव से पहले ‘मैं थां सू दूर नहीं’ का बयान देकर गहलोत ने विपक्ष की ओर साफ इशारा कर दिया था कि वो कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति में भले हों लेकिन राजस्थान में भी दखल रखेंगे. गहलोत के मुख्यमंत्री की दावेदारी वाले इशारों में दिए बयान खूब चर्चा में रहे.

राजनीति के जादूगर-अशोक गहलोत

तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी अशोक गहलोत केंद्र की राजनीति में भी बराबर रूप से सक्रिय रहे हैं. अशोक गहलोत की छवि कांग्रेस में संकटमोचक और कुशल रणनीतिकार की मानी जाती है. कांग्रेस आलाकमान भी गहलोत सरकार को कई महत्वपुर्ण जिम्मेदारिया सौंपती रही हैं. अशोक गहलोोत गांधी परिवार के विशवसनीय सदस्य माने जाते हैं . 2020 में कांग्रेस पर सियासी संकट मंडरा रहा था. पुर्व प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने बगावत छेड़ दिया था. लेकिन गहलोत ने सरकार नहीं गिरने दी. गहलोत अपने सभी विधयकों को लेकर जयपुर-जोधपुर के चक्कर लगा रहे थे. सीएम गहलोत ने जोधपुर में होटल फेरामाउंट में विधायकों की बाड़ेबंदी भी की थी. यह सब गतिविधियां कोरोना काल के अंतर्गत हुई थी. उस वक्त भी गहलोत सरकार का आरोप था कि बीजेपी हमारे विधायक को खरीदने की कोशिश कर रही है. अंत में सचिन पायलट फिर से सीएम गहलोत के समर्थन में आ गए और सरकार बच गई लेकिल सचिन पायलट को प्रदेशाध्यक्ष के पद से हटा दिया गया और गोविंद सुंह डोटासरा को नया प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया. इसलिए सीएम गहलोत को कांग्रेस का संकटमोचन कहा जाता है. हर संकट में अशोक गहलोत सरकार बचा ही लेते हैं. इस कारण से कांग्रेस भी किसी युवा को मुख्यमंत्री बनाने की बजाय अनुभव लिये बैठे अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री का पदभार देते हैं.

इसे भी पढ़ें चुनाव आयोग ने असम के मंत्री हिमंत बिस्व सरमा को 48 घंटों प्रचार करने से रोका, IPS के भाई का किया तबादला

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *