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राजस्थान दिवस विशेषः राजस्थान के खान-पान में भी दिखता है रॉयल अंदाज….

जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर की तात्कालीन रियासतों के विलय से राजस्थान  बना. इस दिन को राजस्थान दिवस के के रूप में जाना जाता है. 30 मार्च को 1949 को  राजस्थान दिवस के रुप में मनाया जाता है. यहां  घुमने-फिरने की जगहों की तो कोई कमी नहीं है लेकिन आज हम बात करेंगे राजस्थान के लजीज व्यंजनों की. राजस्थान का इतिहास जितना गौरवाशाली रहा है उतना ही परिपूर्ण है यहां का लाइफस्टाइल और खान-पान. भौगोलिक स्थिति में भले ही राजस्थान के पास कुछ खास ना हो, लेकिन इसके बावजूद यहां के लोग खाने पीने के खासा शौकिन होते हैं.  राजस्थानी थाली और राजस्थान की मिठाइयां पूरे देश में शौक से खाई जाती है. शायद ही भारत में आपको कोई ऐसा शहर मिलेगी जहां आपको जोधपुर और बीकानेर के नाम से चलने वाले होटल या मिठाई की दुकानें नहीं मिलेंगी. यहीं कारण है कि यहां पहुंचने वाले लोग घूमने के साथ ही यहां के खान-पान से भी कापी हद तक प्रभावित होते हैं. वैसे तो राजस्थान में वेज और नॉन वेज दोनों प्रकार के खाने-पीने की चीजों मिल जाती है लेकिन राजस्थान में वेज खाने में काफी विविधता दिखने के मिलती है. आइए जानें, राजस्थान के कुछ लजीज व्यंजनों के बारे में …..

1) कोटा कचौरी

राजस्थान में कचौरी का कुछ अगल ही क्रेज है. यहां अलग-अलग इलाके में अलग तरह की कचौरियां खाने वाले लोग मिल जाएंगे. कचौरी की इतनी वैराइटी शायद ही आपको कहीं और मिले.   राजस्थान में मिलने वाली  कोटा कचौरी का दीवाना हर कोई हो जाता है. उड़द की दाल से बनी इस स्वादिष्ट कचौरी को सफर बहुत पुराना है. आज भी लोगों की जुबां पर  इस कचौरी का जायका छाया हुआ है. कोटा में आज भी 350 से ज्यादा दुकानें और ठेले हैं जिन पर रोजाना चार लाख से ज्यादा कचौरियां बिकती हैं. कोटा की ये कचौरी अब अन्य स्थानों में भी काफी प्रलिद्ध हो गई है. लेकिन कोटा में आकर इस कचौरी का स्वाद लेने की तो बात ही और है.

2) जोधपुर की मिठाई की सब्जी के चटकारे

रजवाड़ी शान और शौकत, शौर्य परम्परा के लिए पहचाने जाने वाला राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा शहर जोधपुर अपने खास खान-पान के लिए प्रसिद्ध है. मेहरानगढ़,उम्मेद भवन, हैंडीक्राफ्टस आइटम, बंधेज और अपनी मीठी बोली के लिए पहचाने जाने वाला जोधपुर अपने स्वाद के लिए अलग ही पहचान रखता है. राजस्थान में घी बड़े ही शौक से खाया जाता है. जोधपुर अपनी मिठाइयों के लिए प्रसिद्ध है. लेकिन  जोधपुर में बनने वाली  मिठाइयों की सब्जी खाने लोग दुर-दुर से आते हैं. ये सुनने में जितना अजीब है लेकिन इसका स्वाद उतना ही लाजवाब है. जोधपुर में रसमलाई, चक्की और गुलाबजामुन की विशेष सब्जी बनाई जाती है  और यह सब्जी जितने चाव से खाई जाती है उतने ही मनुहर करके खिलाई जाती है.

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3) जयपुर का मिश्री-मावा और दालबाटी-चूरमा

जयपुर वैसे तो अपनी ऐतिहासिक इमारतों के मशहुर है.  लेकिन जयपुर में खानी-पीने के लिए भी काफी कुछ है. जयपुर में गट्टे की सब्जी-पुरी, मलाई-घेवर, मिश्री-मावा का चटकारा लेने के लिए लोग बाहर से आते हैं. जयपुर का दाल-बाटी चुरमा यहां की शान है. जयपुर में अगर घुमने आये है और यहां लज़ीज खाना नहीं खाया तो आपका जयपुर घुमा हुआ बेकार हो गया. जो खाने के शौकीन है उनके लिए जौहरी बाजार और नेहरू बाजार सबसे अच्छी जगह है. जयपुर का मिश्री मावा पुरी दुनिया में मशहुर है. जयपुर में आपको रूमाली रोटी का आंनद भी मिलेगा. जयपुर में विदेशी सैलानी ऐतिहासिक नज़ारों के साथ-साथ यहां खाने के जायको का आमंद लेने भी आते हैं.

नसीराबाद का कचौरा (अजमेर)

हम सभी ने अपने जीवन में कचौरी तो खाई ही है. कहीं प्याज तो कहीं हीग,तो कभी दाल की कचौरी.  लेकिन क्या आपने कचौरा खाया है. अजमेर के नसीराबाद में कचौरी की जगह कचौरा मिलता है. जो बेहद बड़े आकार का होता है. इसमें कई तरह की चटनियां डालकर परोसा जाता है. अजमेर खाने के साथ-साथ अजमेर शरीफ की दरगाह और ढ़ाई दिन के झोपड़े के साथ खाने के जायके में सोनहलवा, कचौरा,कढी कचौरी की अपना एक अलग पहचान है.

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4) बीकानेर का रस्सगुल्ले और भुजिया

बीकानेर अपना भुजिया,पापड़ और रसगुल्लों के लिए मशहुर है. बीकानेर के रस्गुपल्ले खाते ही मन में मिठास भर देते हैं. यहां के भुजिया पुरे विश्व में बीकानेरी भुजिया के नाम से ही फेमस है.

5) करौली की गजक

भरतपुर के करौली की गजक पुरे भारत में मशहुर है. करौली की गलियों में गजक की मिठास और खुशबु फैली रहती है. यहां की गुड़ से बनी गजक मुंह में रखते ही घुल जाती है. करौली की गजक का स्वाद लेने देश भर से लाग यहां आते हैं.

6) सांभर की फीणी

फीणी शुरुआत में सिर्फ राजस्थान में ही बनाई जाती थी. मुलायम रेशे जैसे तारों से बनी ये मिठाई मुंह में रखते ही घुल जाती है. सांभर की ये फीणी पुरी दुनिया में प्रसिद्ध है.

7) भरतपुर के आचार

भरतपुर के भुसावर के आचार पुरे देश में प्रसिद्ध है. भले ही यह जगह छोटी हो लेकिन यहां के आचार बड़े ही फेमस है. कहा जाता है कि यहां के आचार लेचर लोग विदेशों तक भेजते हैं.

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