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इस भाजपा सांसद ने फिर दिखाए बगावती तेवर, कहा- सिर्फ सद्दाम और गद्दाफी ने ही जीवित रहते हुए स्टेडियमों के नाम अपने नाम करवाये थे

New Delhi: भाजपा के राज्यसभा सांसद (Rajya Sabha MP) सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy) के बयान अक्सार उनकी ही पार्टी के लिए सरदर्द बन जाते हैं. कई बार देखा गया है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी पार्टी और आलाकमानों के द्वारा दिये गये निर्णयों से परे अपने विचार खुल कर रखते हैं. यहीं कारण है कि अक्सर देखा जाता है कि उनके बयानों के बाद विवाद हो जाता है. इससे विरोधियों को भी कई बार बोलने का अवसर मिल जाता है.लेकिन इन सबसे बेपरवाह सुब्रमण्यम स्वामी  अपने बेबाक विचार रखते हैं. ताजा बयान अहमदाबाद Ahmedabad) के मोटेरा (Motera) में स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम (Narendra Modi Stadium) को लेकर है. जिस बारे में स्वामी जी ने कह दिया कि जीवित रहते हुए सिर्फ सद्दाम और गद्दाफी ने ही स्टेडियमों के नाम अपने नाम करवाये थे. इसलिए प्रधानमंत्री मोदी को स्टेडियम से अपना नाम हटवाना चाहिए. बता दें कि इस स्टेडियम का नाम पहले सरदार पटेल स्टेडियम रखा गया था जिसे बाद में बदलकर नरेंद्र मोदी स्टेडियम कर दिया गया.

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नाम बदलने के लिए ये दिया सुझाव

सुब्रमण्यम स्वामी ने नाम सिर्फ नाम बदलने को नहीं कहा बल्कि इसके लिए एक सुझाव भी दे दिया. स्वामी ने कहा कि इसके लिए गुजरात सरकार (Gujarat Government) को चाहिए कि वो एक घोषणा करे, जिसमें ये कहा जाए कि स्टेडियम का नाम रखते हुए उऩ्होंने पीएम से इसकी चर्चा नहीं की थी. इसलिए पटेल स्टेडियम का नाम फिर से बदला जा रहा है. उन्होंने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि लोगों में स्टेडियम के नाम को बदलने से काफी आक्रोश है. लोग इस बात को लेकर नाराज हैं कि जब पहले से स्टेडियम का नाम तय था तो फिर इसमें बदलाव क्यों किया गया. उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री को लोगों की भावना का सम्मान करते हुए इस दिशा में पहल करनी चाहिए.

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81 वर्षीय स्वामी दिखाते रहे हैं बगावती तेवर

ये कोई पहला मौका नहीं है जब सुब्रमण्यम स्वामी ने पार्टी और शीर्ष नेताओं के विरुद्ध कोई बात की हो. समय-समय पर स्वामी इस तरह के बयान देते आये हैं. हालांकि भाजपा उन्हें हमेशा ये कहकर टाल देती है कि ये उनके निजी विचार हैं और स्वामी पार्टी के एक अभिभावक की तरह है. हालांकि राजनीतिक जानकारों (Political Experts) की मानें तो स्वामी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने खुद भी कई बार प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह (Amit Shah) के विरूद्ध आवाज उठाई है.

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