Loading... Please wait...

कैसा रोजगार, कैसा कौशल विकास?

विश्व युवा कौशल दिवस अभी बीता है। 15 जुलाई को इस मौके पर कई राष्ट्रीय नेताओं और कई राज्यों के नेताओं ने भी रोजगार, कौशल विकास और युवाओं के बारे में बढ़ कर दावे किए। इन दावों की हकीकत साबित करने का कोई प्रमाण किसी के पास नहीं है और हैरानी है कि किसी को इसकी चिंता भी नहीं है कि नेता ऐसे कैसे आंकड़े दे रहे हैं, जिसका कोई जमीनी आधार नहीं है। आंकड़े हमेशा गलत तस्वीर पेश करते रहे हैं, लेकिन इन दिनों बढ़ चढ़ा कर आंकड़े पेश करने का चलन पहले से ज्यादा हो गया है। यह माना जा रहा है कि चाहे झूठे आंकड़े पेश किए जाएं, लेकिन उसका पैमाना बड़ा होना चाहिए। 

मिसाल के तौर पर विश्व युवा कौशल दिवस के मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दावा किया कि बिहार देश की कौशल राजधानी बन गया है। उनका कहना है कि बिहार में युवाओं को हर किस्म के कौशल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है और वे देश के अलग अलग हिस्सों में जाकर रोजगार हासिल कर रहे हैं। उनके इस दावे की आंकड़ों के सहारे न तो पुष्टि हो सकती है और न उसे खारिज किया जा सकता है। हकीकत यह है कि बिहार से बड़ी संख्या में युवा हमेशा बाहर जाते रहे हैं। आजादी के बहुत पहले से इसकी शुरुआत हो गई थी। आज भी देश के किसी भी हिस्से में दिहाड़ी मजदूर से लेकर रिक्शा चलाने वाले या प्राइवेट गार्ड की नौकरी में लगे युवा के बिहारी होने की संभावना सबसे ज्यादा है। बिहार के मुख्यमंत्री ने जो बात नहीं बताई, वह ये है कि पिछले करीब तीन दशक में बिहार की शिक्षा का भट्ठा बैठ गया है और सबसे ज्यादा पलायन स्कूल और कॉलेज को छात्रों का हुआ है। पहले बिहार के छात्र उच्च शिक्षा के लिए या उच्च शिक्षा के बाद प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए बिहार से बाहर जाते थे, लेकिन आज वे स्कूली शिक्षा के लिए राज्य छोड़ रहे हैं। 

यह सही है कि कमाने के लिए बड़ी संख्या में बिहार के युवा बाहर जाते हैं लेकिन यह कहना गलत है कि राज्य सरकार उनको प्रशिक्षित करके रोजगार के लिए तैयार कर रही है। बिहार के हों या राजस्थान और उत्तर प्रदेश या ओड़िशा के युवा हों, उनमें से ज्यादातर अनस्किल्ड लेबर यानी अप्रशिक्षित मजदूर ही हैं, जिनको अपनी क्षमता और योग्यता के मुताबिक न काम मिल रहा है और न पैसे मिल रहे हैं। 

विश्व युवा कौशल दिवस के मौके पर भारत सरकार के कौशल विकास मंत्रालय के मंत्री राजीव प्रताप रूड़ी ने दावा किया कि उनके मंत्रालय ने एक करोड़ 70 युवाओं का कौशल विकास कर रोजगार दिया है। इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने आठ करोड़ युवाओं को रोजगार देने का दावा किया था। उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने के मौके पर कहा कि सरकार सवा सौ करोड़ लोगों के देश में सबको रोजगार नहीं दे सकती है, लेकिन मोदी सरकार ने आठ करोड़ लोगों को स्वरोजगार के अवसर दिए हैं। नीतीश कुमार के दिए आंकड़ों की तरह इन आंकड़ों की पुष्टि का भी कोई आधार नहीं है। 

हां, प्रधानमंत्री की अपनी वेबसाइट से जरूर यह पता चलता है कि भारत में महज 4.7 फीसदी कामगार ऐसे हैं, जिनको कौशल विकास का औपचारिक प्रशिक्षण मिला हुआ है। दक्षिण कोरिया में यह आंकड़ा 96 फीसदी का है। जापान में भी 80 फीसदी लोगों को कौशल विकास का औपचारिक प्रशिक्षण मिला हुआ है। अमेरिका में यह आंकड़ा 52 फीसदी का है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में कौशल विकास के दावे की हकीकत क्या है। 

असल में केंद्र की यूपीए सरकार ने राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद और फिर बाद में कौशल विकास निगम का गठन करके जो मिथक फैलाना शुरू किया था, उसे ही आगे बढ़ाया जा रहा है। मनमोहन सिंह की सरकार ने 50 करोड़ लोगों को प्रशिक्षित करने के मकसद से राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद का गठन किया था। लेकिन बाद में उसे अपनी गलती का अहसास हुआ तो लक्ष्य घटा कर सीधे एक करोड़ कर दिया गया। कहां 50 करोड़ और कहां एक करोड़! हालांकि सरकार वह लक्ष्य भी नहीं हासिल कर पाई। 

बाद में जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी तो प्रधानमंत्री ने स्किल इंडिया की घोषणा की और बाद में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का ऐलान किया गया। इसके लिए पहले 16 सौ करोड़ और बाद में छह हजार करोड़ रुपए का बजट तय किया गया। प्रधानमंत्री की इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य भारत में प्रशिक्षित कामगारों की इतनी बड़ी फौज तैयार करने का है, ताकि वे पूरी दुनिया के मैनपावर की जरूरत पूरी करें। लेकिन दो साल बाद सरकार यह आंकड़ा देने की स्थिति में भी नहीं है कि कितने लोगों का कौशल विकास हुआ और कितना मैनपावर भारत ने दुनिया को सप्लाई किया। उलटे यह खबर आ रही है कि कौशल विकास के नाम पर युवाओं के साथ ठगी हो रही है और सरकार का पैसा बरबाद हो रहा है। लोग सिर्फ कागजों पर कौशल विकास केंद्र बना रहे हैं, कागजों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है और सरकार का पैसा गायब हो जा रहा है। इस तरह से न तो कौशल विकास हो रहा है और न रोजगार मिल रहा है।

Tags: , , , , , , , , , , , ,

496 Views

बताएं अपनी राय!

हिंदी-अंग्रेजी किसी में भी अपना विचार जरूर लिखे- हम हिंदी भाषियों का लिखने-विचारने का स्वभाव छूटता जा रहा है। इसलिए कोशिश करें। आग्रह है फेसबुकट, टिवट पर भी शेयर करें और LIKE करें।

नीचे नजर आ रहे कॉमेंट अपने आप साइट पर लाइव हो रहे है। हमने फिल्टर लगा रखे है ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द, कॉमेंट लाइव न हो पाए। यदि ऐसा कोई कॉमेंट- टिप्पणी लाइव हुई और लगी हुई है जिसमें अर्नगल और आपत्तिजनक बात लगती है, गाली या गंदी-अभर्द भाषा है या व्यक्तिगत आक्षेप है तो उस कॉमेंट के साथ लगे ‘ आपत्तिजनक’ लिंक पर क्लिक करें। उसके बाद आपत्ति का कारण चुने और सबमिट करें। हम उस पर कार्रवाई करते उसे जल्द से जल्द हटा देगें। अपनी टिप्पणी खोजने के लिए अपने कीबोर्ड पर एकसाथ crtl और F दबाएं व अपना नाम टाइप करें।

आपका कॉमेट लाइव होते ही इसकी सूचना ईमेल से आपको जाएगी।

आगे यह भी पढ़े

सर्वाधिक पढ़ी जा रही हालिया पोस्ट

भारत ने नहीं हटाई सेना!

सिक्किम सेक्टर में भारत, चीन और भूटान और पढ़ें...

मुख मैथुन से पुरुषों में यह गंभीर बीमारी

धूम्रपान करने और कई साथियों के साथ मुख और पढ़ें...

बेटी को लेकर यमुना में कूदा पिता

उत्तर प्रदेश में हमीरपुर शहर के पत्नी और पढ़ें...

पाक सेना प्रमुख करेंगे जाधव पर फैसला!

पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय और पढ़ें...

© 2016 nayaindia digital pvt.ltd.
Maintained by Netleon Technologies Pvt Ltd