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किसान संसद में दो 'बिल' पारित

नई दिल्ली। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की ओर से सोमवार को आयोजित किसान मुक्ति संसद में ' किसानों की सम्पूर्ण कर्ज मुक्ति बिल और कृषि उपज लाभकारी मूल्य गारंटी बिल ' पारित किया गया। कुल 19 राज्यों के दस हजार किलोमीटर की किसान मुक्ति यात्रा पूरी करने के बाद किसान मुक्ति संसद शुरू हुई जिसमें बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।

अखिल भारतीय किसान सभा के महामंत्री एवं पूर्व सांसद हन्नान मौला ने किसानों की संपूर्ण कर्जा मुक्ति तथा स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के अध्यक्ष एवं सांसद राजू शेट्टी ने कृषि उपज लाभकारी मूल्य गारंटी विल पेश किया गया। हन्नान मौला ने कहा कि किसानों को कम दाम देकर सरकारों ने उसे लूटा है और कर्जदार बनाया है जिसके चलते पांच लाख किसान आत्महत्या के लिए मजबूर हुए हैं। अब किसान अपना शोषण नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि किसान संगठन लंबे अर्से से कर्जा माफी की मांग करते रहे हैं लेकिन अब कर्जा मुक्ति की न केवल मांग कर रहे हैं बल्कि एक बिल तैयार किया है जिस पर संसद को विचार कर पारित करना चाहिए।

सांसद राजू शेट्टी ने कहा कि किसानों के फसलों का डेढ गुना मूल्य देने के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्पष्ट बहुमत मिला है। जय किसान आंदोलन-स्वराज अभियान के नेता योगेन्द्र यादव ने कहा कि आज की मुक्ति संसद देश के किसान आंदोलन के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी। नर्मदा बचाओ आन्दोलन की समन्वयक मेधा पाटकर ने कहा कि आज देश के लिए ऐतिहासिक क्षण है जब महिलायें किसान मुक्ति संसद के समक्ष किसानों, खेतिहर मजदूरों, आदिवासियों, भूमिहीनों, बटाईदारों, मछुआरों के जीवन में आमूल-चूल परिवर्तन के लिए बिल पारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारों ने नर्मदा घाटी सहित देश भर में 10 करोड़ किसानों को विस्थापित किया है जिनका आज तक संपूर्ण पुनर्वास नहीं हुआ है। वैकल्पिक विकास की नीति की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान नीति देश के किसानों, मजदूरों और लगभग सभी तत्वों के लिए विनाशकारी है।

अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव अतुल कुमार अंजान ने कहा कि देसी और परदेसी कार्पोरेट घराने देश में विशाल बीज, खाद, कीटनाशक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए खेती का कंपनीकरण चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारें एवं कुछ कृषि अर्थशास्त्री यह झूठा प्रचार कर हैं कि छोटे और मझोले-गरीब किसान की जोत कम है, इसलिए उनकी उत्पादकता कम है। देश का 54 फीसदी गेहूं और 57 फीसदी धान छोटे-मझोले किसान पैदा करते हैं।

अखिल भारतीय किसान महासभा के महासचिव राजाराम सिंह ने कहा कि देश में सरकार लगातार किसान विरोधी योजनाएं चला रही है। कार्पोरेटों को मुनाफा और किसानों को घाटा दे रही है। देश में भाजपा शासित राज्यों में भूख से मौतों का सिलसिला लगातार बढ रहा है।

संसद में आये किसानों का स्वागत करते हुए संयोजक वी एम सिंह ने कहा कि पहले उत्तम खेती थी, अब खेती घाटे का सौदा हो गया। इसीलिए प्रधानमंत्री के किसानों के वायदे कि खेती का कर्ज माफ करेंगे और फसल की लागत का डेढ गुना मूल्य दिलाएंगे। सारा पुराना कर्ज माफ किया जाएगा। आत्महत्या करने वाले किसान परिवारों की 545 महिलाएं भी इस अवसर उपस्थित थी।

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