ढ़ह गए भाजपा के गढ़!

नई दिल्ली। उत्तर भारत के तीन प्रदेशों ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह का तिलिस्म आज तोड़ा। चुनाव जीतते जाने के सिलसिले और कांग्रेस को खत्म करने के हुंकारे को राजस्थान और छतीसगढ़ की जनता ने दो टूक अंदाज में खारिज किया। मध्यप्रदेश में कांटे के मुकाबले के भाजपा आखिर में कांग्रेस से पिछड़ी। वहां बहुमत बसपा, निर्दलीय बनवाएगें। तेलंगाना और मिजोरम में भी भाजपा की दाल नहीं गली। तेलंगाना में भाजपा न पहले जीतनी सीटे जीत पाई और न मिजोरम में क्षेत्रिय दल को उसकी जरूरत हुई।

पांचों चुनावों में सर्वाधिक सस्पेंशपूर्ण और देर शाम तक नतीजे मध्यप्रदेश में तय हुए। इन पंक्तियों को लिखने तक 230 सीटों में से कांग्रेस की 113, भाजपा की 110 और शेष 7 सीटे बसपा-निर्दलीय की थी। बहुमत का 116 का आंकडा बसपा, निर्दलीय के समर्थन से होगा। छतीसगढ़ में भाजपा की सर्वाधिक बुरी हार हुई। 90 सीटों की विधानसभा में कांग्रेस दो-तिहाई बहुमत के करीब है। राजस्थान में कांग्रेस को 200 सदस्यों के सदन में 101 सीटों के साथ बसपा व कांग्रेस के बागियों का समर्थन है। भाजपा 73 सीटों पर सिमटी।   

छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में पंद्रह साल से भाजपा की सरकार थी वहीं राजस्थान में 163 सीटों के रिकार्ड बहुमत के साथ पाँच साल से भाजपा की सत्ता थी।

पूर्वोत्तर में 40 सीटों वाली मिज़ोरम विधानसभा में मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ़) को 26 सीटों से साफ जीत मिली है। कांग्रेस को सिर्फ छह सीटे मिली है जबकि भाजपा को केवल एक सीट। तेलंगाना में सत्तारूढ टीआएएस पार्टी को 119 सीटों में से 88 सीटे मिलने का अनुमान है। भाजपा को पिछले चुनाव में राज्य में पांच सीटे मिली थी। इस दफा एक सीट पर जीत हुई।

चुनाव परिणामों पर भाजपा की तरफ से आला नेताओं की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अमित शाह ने कुछ नहीं कहा जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नतीजों पर खुशी जाहिर करते हुए कहां है कि इस जनादेश से संकेत मिलते हैं कि मोदी के काम से देश की जनता खुश नहीं है। उन्होंने तीनों राज्यों में पार्टी की जीत को किसानों, युवाओं और छोटे दुकानदारों की जीत करार दिया।

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