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मानवाधिकार लोक नीति का आधार है: मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानवाधिकार की रक्षा की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा है कि यह सिर्फ नारा नहीं है, बल्कि संस्कार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार लोक नीति का आधार होना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने मानवाधिकारों को देश की संस्कृति का हिस्सा बताया और कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गरीबों और वंचितों की आवाज बन कर राष्ट्र निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी कहा कि अब उसे एक डाटा बेस बनाने व सोशल मीडिया से भी जुड़ने की भी जरूरत है।

प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना के 25 साल पूरे होने के मौके पर विज्ञान भवन में आयोजित समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार केवल नारा नहीं है, बल्कि यह एक संस्कार होना चाहिए और लोक नीति का आधार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति व परंपरा में नागरिकों के सम्मान और समानता को जगह दी गई है।

प्रधानमंत्री ने कहा - हमारी शासन व्यस्था की तीन इकाई है। हमारे यहां एक स्वतंत्र व निष्पक्ष न्यायपालिका है, एक सक्रिय मीडिया है और एक नागरिक समाज भी है जो नागरिकों के मानवाधिकार की रक्षा करता हैं। उन्होंने पिछले चार साल में अपनी सरकार द्वारा आम लोगों को घर, बिजली, रसोई गैस और शौचालय की सुविधा देने का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने गरीब और वंचित लोगों को सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार दिया है। यह उनका मानवाधिकार था।

मोदी ने कहा कि शौचालय न होने की स्थिति में गरीब बहुत अपमान झेलता था और गरीब बहनों को भी बहुत परेशानी उठानी पड़ती थी लेकिन उन्हें शौचालय के रूप में इज्जत घर दिया गया। उन्होंने कहा कि सबको कमाई, सबको पढ़ाई, सबको दवाई, सबकी सुनवाई के जरिए लोगों को गरीबी से बहार निकला गया है। उन्होंने जनभागीदारी को सफलता का मूल मंत्र बताया। प्रधानमंत्री ने तीन तलाक अध्यादेश के जरिए मुस्लिम महिलाओं के अधिकार की चर्चा की और उम्मीद जताई कि संसद में इसे पारित किया जाएगा।

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