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मोदी सरकार में न्यायाधीशों की रिकॉर्ड नियुक्तियां हुईं : प्रसाद

नई दिल्ली। न्यायाधीशों की नियुक्तियों में सरकार द्वारा पेंच फंसाने के आरोपों के बीच केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के चार साल के कार्यकाल के दौरान रिकॉर्ड संख्या में न्यायाधीशों की नियुक्ति की गयी है।

श्री प्रसाद ने मोदी सरकार के चार साल का लोखाजोखा पेश करने के लिए यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र सरकार ने अप्रैल अप्रैल 2015 से मई 2018 के बीच उच्चतम न्यायालय में जहां 17 न्यायाधीश नियुक्त किये, वहीं 2014 से लेकर अब तक विभिन्न उच्च न्यायालयों में 331 न्यायाधीशों की नियुक्तियां की गयी और कुल 217 अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी नियुक्ति दी गयी। कानून मंत्री ने कहा कि अव्यावहारिक हो चुके 1428 केंद्रीय कानूनों को निरस्त किया गया है, साथ ही ऐसे 229 राज्य कानूनों को रद्द करने के लिए वापस राज्य सरकारों को भेजा गया है।

मामलों के त्वरित निपटारे की अहमियत का हवाला देते हुए श्री प्रसाद ने बताया कि 2015 में त्वरित अदालतों की संख्या 281 थी, जो अब बढ़कर 727 हो गई है। इतना ही नहीं, उच्चतम न्यायालय के आदेश पर अमल करते हुए जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मुकदमों की सुनवाई के लिए 11 राज्यों में 12 विशेष अदालतें भी गठित की गयी हैं। इन अदालतों में सांसदों एवं विधायकों से जुड़े 791 आपराधिक मामले स्थानांतरित किये जा चुके हैं। जब उनसे पूछा गया कि आधार की अनिवार्यता को लेकर यदि संविधान पीठ ने सरकार के विरुद्ध फैसला सुनाया तो क्या सभी आधार रद्द कर दिये जायेंगे, तो श्री प्रसाद ने इसे काल्पनिक सवाल करार दिया। उन्होंने बताया कि 133 करोड़ की आबादी वाले देश में 121 करोड़ लोगों के आधार कार्ड बन चुके हैं, जबकि बगैर आधार कार्ड वाले 10 करोड़ लोगों में पांच साल से कम उम्र के ज्यादातर बच्चे शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 59 करोड़ 95 लाख भारतीय अभी तक अपने 87 करोड़ 79 लाख बैंक खाते आधार से लिंक करवा चुके हैं।

न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित प्रक्रिया ज्ञापन (एमओपी) के पूछे जाने पर श्री प्रसाद ने कहा कि एमओपी को लेकर कुछ मुद्दों को लेकर चर्चा होनी है, जिनमें उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की शीर्ष अदालत में पदोन्नति को लेकर कॉलेजियम की सिफारिशों के मानदंडों पर चर्चा भी शामिल है।

 

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