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जस्टिस रमन ने ‘नो लीव’ योजना पर अमल किया

नई दिल्ली। कार्य दिवस पर छुट्टी लेने से बचने की उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की सलाह पर अमल शुरू हो गया है और शीर्ष अदालत के एक न्यायाधीश ने इसका संज्ञान लेते हुए एक संगोष्ठी में शिरकत करने इन्कार कर दिया है। न्यायमूर्ति एन वी रमन ने मुख्य न्यायाधीश की अपील को ध्यान में रखते हुए कॉमनवेल्थ ज्यूडिशियल एजूकेशन इंस्टीट्यूशन की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में हिस्सा लेने से मना कर दिया है।

न्यायमूर्ति गोगोई ने गत तीन अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश का पद संभालने के बाद लंबित मामलों को जल्द से जल्द निपटने के लिए 'नो लीव' (छुट्टी नहीं) की योजना बनायी थी, जिसके तहत उन्होंने शीर्ष अदालत एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों से कार्य दिवसों पर छुट्टी नहीं लेने की अपील की थी।

न्यायमूर्ति गोगोई का कहना था कि न्यायिक कामों से इतर सेमिनार और ऐसे किसी कार्यक्रमों में जाने से वक्त की बर्बादी होती है। यह संस्थान कॉमनवेल्थ का एक आधिकारिक गैर-सरकारी संगठन है, जो कॉमनवेल्थ ज्यूडिशियल एजूकेशन को बढ़ावा देने के लिए काम करता है। यह संगठन 15 से 18 नवंबर तक दिल्ली में एक सेमिनार आयोजित करने जा रहा है।

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