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मीडिया समाचार और विचार में अंतर रखे: नायडू

रायपुर। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने आज कहा कि मीडिया को समाचारों और विचारों (न्यूज और व्यूज) को अलग प्रस्तुत करना चाहिए और समाचार जोड़ने के लिए होने चाहिए, ना कि तोड़ने के लिए। उन्होंने कहा कि समाचारों का स्थान प्रथम पृष्ठ पर है तथा विचार का स्थान संपादकीय पृष्ठ पर है।

नायडू ने यहां कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्र पत्रकारिता में प्रवेश करने वाले हैं। उन्हें समाचारों को महत्व देना है तथा विचार को अलग प्रस्तुत करना है। लेकिन आजकल पत्रकारिता जगत में समाचार और विचारों का मिश्रण कर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाचार और विचार का कभी भी मिश्रण नहीं करना चाहिए। ये दोनों अलग है। समाचारों का स्थान प्रथम पृष्ठ पर है तथा विचार का स्थान संपादकीय पृष्ठ पर है। आपका काम जनता तक सही जानकारी पहुंचाना है। यदि आप जनता तक सही जानकारी देते हैं तब यह हथियार से ज्यादा प्रभावी है।

नायडू ने समाचारों को सनसनी के तौर पर प्रस्तुत करने पर भी चिंता जताई। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आजकल इलेक्ट्रानिक मीडिया के कारण ब्रेकिंग न्यूज का जमाना है। प्रतिस्पर्धा के कारण यह और भी बढ़ा है। ब्रेकिंग न्यूज देने में कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन ब्रेकिंग न्यूज ब्रेकिंग (तोड़ने) के लिए नहीं बल्कि ज्वाइनिंग (जोड़ने) के लिए होना चाहिए। समाचार रचनात्मकता के लिए होना चाहिए न कि विध्वंस या बाधा डालने के लिए। उन्होंने कहा कि देश की जनता को जागरूक करना बहुत जरूरी है। यदि संसदीय लोकतंत्र को सफल होना है तब जनता को पहले शिक्षित करना पड़ेगा और जागृत करना पडे़गा।

मीडिया जनता को जागरूक करने और उन्हें शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। उप राष्ट्रपति ने कहा कि पत्रकारिता मिशन है। आजादी के दौरान पत्रकारिता मिशन के रूप में थी। आज भी कुछ लोग पत्रकारिता को मिशन के रूप में चला रहे हैं, लेकिन कुछ लोग उद्योग के रूप में चला रहे हैं। नायडू ने कहा कि मीडिया को टीआरपी का यह नया दर्शन देना चाहिए -‘‘द प्रमोशन आफ ट्रूथ इन अ रिस्पांसिबल एंड प्रोफेशनल मैनर।’’ उप राष्ट्रपति ने कहा कि व्यक्ति को मां, मातृभूमि, मातृभाषा और गुरू को कभी नहीं भूलना चाहिए। मां ने हमे जन्म दिया है। वहीं मातृभाषा में जिनसे बात कर सकते हैं उनसे मातृभाषा में ही बात करनी चाहिए। क्योंकि भाषा और भावना एक साथ चलते हैं। मन की भावना को व्यक्त करने के लिए मातृभाषा अच्छा साधन है। उन्होंने कहा कि हमे अंग्रेजी सीखने और पढ़ने में कोई आपत्ति नहीं होनी चहिए। लेकिन अपनी मातृभाषा भी पढ़नी चाहिए। अपनी मातृभाषा पढ़ना और बोलना जरूरी है। इसके लिए पूरे देश में एक आंदोलन होना चाहिए। इसके लिए प्रदेश सरकार को इस बारे में सोचना चाहिए। यदि सरकारी नौकरी है तब आपको उस प्रदेश की भाषा मालूम होना अनिवार्य करना चाहिए।

उप राष्ट्रपति ने महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि अखबारों में महिलाओं के साथ अत्याचार की घटनाएं पढ़कर मन विचलित हो जाता है। पुरातनकाल से भारत की संस्कृति महिलाओं को हमेशा से सम्मान देती रही है और यही कारण है कि नदियों के नाम भी हमारे यहां महिलाओं के नाम पर हैं। दीक्षांत समारोह को मुख्यमंत्री रमन सिंह ने भी संबोधित किया। समारोह में एम फिल वर्ष 2014-15 और वर्ष 2016-17 के उत्तीर्ण 23 छात्रों को, स्नातकोत्तर के 122 और स्नातक के 104 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई। इस दौरान 19 छात्रों को गोल्ड मेडल प्रदान किया गया।

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