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राजभवन समाज के लिए प्रेरणादायी हों: राष्ट्रपति

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि सहकारी संघवाद के परिप्रेक्ष्य में राज्यपालों का संवैधानिक दायित्व है जो केंद्र एवं राज्यों के बीच सेतु की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ऐसे में राजभवनों में मूल्यों एवं आदर्शों के स्थापित होने से समाज के लोग प्रेरणा लेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे में राष्ट्रीय लक्ष्यों को निश्‍चित समय सीमा में प्राप्त करने के लिए टीम इंडिया एक ही दिशा में आगे बढे।

राष्ट्रपति भवन में आयोजित राज्यपालों के 48वें सम्मेलन को संबोधित करते हुए कोविंद ने कहा कि साल 2022 में आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में कुछ महत्वपूर्ण संकल्प इस सम्मेलन में तय किये जा रहे हैं। 2017 से 2022 की अवधि न्यू इंडिया के निर्माण के लिए हैं, जहां भ्रष्टाचार, गरीबी, अशिक्षा और अस्वच्छता के लिए स्थान नहीं होना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा, ऐसे में राष्ट्रीय लक्ष्यों को निश्‍चित समय सीमा में प्राप्त करने के लिए टीम इंडिया एक ही दिशा में आगे बढे। कोविंद ने कहा कि सहकारी संघवाद के परिप्रेक्ष्य में राज्यपालों का संवैधानिक दायित्व है जो केंद्र एवं राज्यों के बीच सेतु की महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ऐसे में जनता की निगाहें राजभवन पर टिकी रहती हैं। राजभवनों में मूल्यों और आदशरें के स्थापित होने से समाज के लोग प्रेरणा लेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि वे आशा करते हैं कि इस सम्मेलन में केंद्र-राज्य मिल कर देशवासियों के हित में, विशेषकर युवाओं के हित में एकमत होकर दिशा तय करने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि जब प्रत्येक राज्य विकसित होगा तभी भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में देखने की कल्पना साकार होगी। स्वचालन (ऑटोमेशन) तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढते हुए उपयोग के संदर्भ में हमें युवाओं के लिए नए अवसर तलाशने होंगे। उन्होंने कहा कि संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूचियों में शामिल आदिवासी क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

 

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