उर्जित पटेल ने आरबीआई गवर्नर के पद से इस्तीफा दिया

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर उर्जित पटेल ने सोमवार को 'निजी कारणों' का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे देश के राजनीतिक-आर्थिक परिदृश्य में एक बड़े संकट की आशंका पैदा हो गई है। पटेल ने इस्तीफा ऐसे समय दिया है जब सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच अर्थव्यवस्था में नकदी (लिक्विडिटी) और ऋण (क्रेडिट) की कमी को लेकर खींचातान चल रही थी, जिसके परिप्रेक्ष्य में 19 नवंबर को आरबीआई बोर्ड की एक असाधारण बैठक भी हुई थी।

पटेल ने आरबीआई की ओर से जारी एक संक्षिप्त बयान में कहा, "निजी कारणों से मैंने अपने मौजूदा पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। पटेल ने 4 सिंतबर 2016 को तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए आरबीआई गवर्नर का पद संभाला था। इससे पहले रिजर्व बैंक के तत्कालीन गवर्नर रघुराम राजन के कार्यकाल में विस्तार नहीं हुआ था।

सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच संबंध अक्टूबर में तब फिर से खराब हो गए थे, जब आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने लोगों को संबोधित करते हुए रिजर्व बैंक की स्वतंत्रता की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि इस बाबत किसी भी प्रकार का समझौता अर्थव्यवस्था के लिए 'संभावित विनाश' का कारण बन सकता है।

सरकार ने वित्त मंत्रालय की ओर से इसका जवाब दिया और आरबीआई अधिनियम की धारा 7 के तहत (जिसका इस्तेमाल पहले कभी नहीं हुआ था) केंद्रीय बैंक से विचार-विमर्श करने का प्रस्ताव रखा। यह धारा सरकार को आरबीआई गवर्नर को दिशा-निर्देश देने का अधिकार देती है। इसके बाद गवर्नर ने बैंक बोर्ड की बैठक बुलाई थी।

सरकार का आरबीआई के साथ चार मुद्दों पर मतभेद था। सरकार क्रेडिट फ्रीज के किसी भी खतरे को दूर करने के लिए नकदी समर्थन चाहती है। दूसरा ऋणदाताओं के लिए पूंजी जरूरतों में छूट, तीसरा गैर निष्पादित संपत्ति या खराब ऋण से जूझ रहे बैंकों के त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) नियमों में छूट और चौथा सूक्ष्म, छोटे व मझौले उद्योग को समर्थन है।

नकदी मामले में सरकार की मांग थी कि आरबीआई अपने 'आर्थिक पूंजी ढांचे' में बदलाव कर अपने सरप्लस रिजर्व को सरकार को सुपुर्द करे। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ने भारी राजकोषीय घाटे और चुनावी वर्ष में अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए यह मांग रखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरबीआई बोर्ड बैठक से पहले पटेल से मुलाकात की थी।

रिजर्व के मुद्दे पर, आरबीआई बोर्ड ने इसके आर्थिक पूंजीगत ढांचे की जांच करने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने का फैसला किया, जो यह निर्णय करेगी कि आरबीआई को कितना र्जिव रखना है और कितना सरकार को सुपुर्द करना है।

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