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आरबीआई की छवि को नुकसान नहीं पहुंचाया: गडकरी

मुंबई। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि रिजर्व बैंक सरकार का ही अंग है, इसलिए उसे सरकार के आर्थिक दृष्टिकोण का समर्थन करना चाहिये। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने एक संस्थान के रूप में रिजर्व बैंक को कभी कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है।

गडकरी ने यह बात ऐसे समय कही है जब स्वायत्तता और परिचालन निष्ठा समेत विभिन्न मुद्दों पर सरकार के साथ मतभेद के कारण उर्जित पटेल ने गर्वनर पद से अचानक इस्तीफा दे दिया।

सरकार ने पटेल की जगह पूर्व नौकरशाह शक्तिकांत दास को नया गवर्नर बनाया है जो नोटबंदी के दौरान सरकार के प्रमुख वक्ताओं में शामिल थे। गडकरी ने जोर देकर कहा कि कुल मिलाकर केंद्रीय बैंक एक स्वतंत्र निकाय है लेकिन उसे सरकार के आर्थिक दृष्टिकोण का भी समर्थन करना चाहिए। उन्होंने यहां टाइम्स समूह द्वारा आयोजित आर्थिक सम्मेलन में कहा, ‘‘अगर हम आरबीआई की स्वायत्तता स्वीकार करते हैं, तो यह केंद्रीय बैंक की जिम्मेदारी है कि वह सरकार के नजरिये का समर्थन करे। हमने किसी भी रूप में उसे (एक संस्थान के तौर पर आरबीआई को) नुकसान नहीं पहुंचाया है।’’

गडकरी ने कहा कि आरबीआई सरकार का अंग है और अगर वित्त मंत्री देश के लिये कोई आर्थिक दृष्टिकोण रखता है तब क्या उस नजरिये को समर्थन देने की जिम्मेदारी आरबीआई की नहीं है? उन्होंने कहा, ‘‘हर जगह ऊंचा और नीचा होता है और हमने किसी संस्थान को नुकसान नहीं पहुंचाया है। हमने राजनीतिक रूप से आरबीआई के काम में कभी हस्तक्षेप नहीं किया।’’ सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, पोत परिवहन, जल संसाधन नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री ने यह सुनिश्चित करने की जरूरत को रेखांकित किया कि हमें एक पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रणाली विकसित करनी है जो निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी लाये और ऐसी प्रणाली जिसमें सरकार के महत्वपूर्ण निर्णय सभी संस्थानों पर बाध्यकारी हो। उन्होंने कहा कि अगर आरबीआई पूरी तरह स्वायत्त रहना चाहता है तब उसे अर्थव्यवस्था की समस्याओं के लिये जिम्मेदार ठहराना चाहिए न कि वित्त मंत्रालय को।

गडकरी ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि अगर सरकार देश की आर्थिक स्थिति के लिये जिम्मेदार है तब आरबीआई कैसे स्वायत्त संस्थान के रूप में काम कर सकता है? उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय एक स्वायत्त निकाय हो सकता है। आरबीआई भी स्वायत्त निकाय है लेकिन इसका मतलब नहीं है कि आरबीआई 100 प्रतिशत नीतिगत निर्णय स्वयं से ले।’’ फंसे कर्ज मामलों के समाधान के लिये ऐसी नीति लायी जाए जो दूसरों का भी ध्यान रखे। उन्होंने कहा कि व्यापार चक्र में ऊपर-नीचे चीजें होती हैं लेकिन अगर कंपनी के लिये बुरा दौर आता है, उस स्थिति में उनका समर्थन किया जाना चाहिए।

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