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सिसोदिया ने भी शुरू की भूख हड़ताल!

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के बाद अब उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी भूख हड़ताल शुरू कर दी है। गौरतलब है कि सिसोदिया और जैन सोमवार से ही दिल्ली के उप राज्यपाल अनिल बैजल के राजनिवास में धरने पर बैठे हैं। धरने पर बैठे बैठे मंगलवार को सत्येंद्र जैन ने भूख हड़ताल शुरू की और बुधवार को सिसोदिया ने शुरू कर दिया। इस बीच  बुधवार की शाम को आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के निवास से राजनिवास तक मार्च किया।

बहरहाल, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी अपने मंत्रियों के साथ राजनिवास में डटे हैं। केजरीवाल और उनके मंत्री मांग कर रहे हैं उप राज्यपाल आईएएस अधिकारियों को आंशिक हड़ताल खत्म करने का आदेश दें और चार महीने से काम नहीं कर रहे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करें। दूसरी ओर अधिकारियों का कहना है कि वे हड़ताल पर नहीं हैं औऱ काम कर रहे हैं। अधिकारियों ने मंगलवार को अपनी काम करती फोटो भी जारी की थी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं और उन्होंने कहा कि उप राज्यपाल अपने बॉस के आदेश से काम कर रहे हैं।

धरने पर बैठे मुख्ययमंत्री केजरीवाल ने बुधवार की सुबह उप राज्यपाल के दफ्तर से ट्विट किया कि यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय की हरी झंडी के बिना क्या आईएएस अधिकारियों का काम पर लौटना संभव है? उन्होंने एक अन्य ट्विट में कहा - क्या मोदी सरकार दिल्ली सरकार द्वारा किए जा रहे अच्छे कामों को बरबाद करने के लिए आईएएस अधिकारियों का इस्तेमाल एक औजार के तौर पर नहीं कर रही है? उन्होंने कहा कि दिल्ली के विकास में बाधाओं को हटाने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

बाद में मनीष सिसोदिया ने टि्वटर पर कहा कि वे भी उप राज्यपाल दफ्तर में बेमियादी भूख हड़ताल में जैन के साथ शामिल हो गए हैं। केजरीवाल और उनके कैबिनेट सहयोगी सोमवार शाम छह बजे से उप राज्यपाल के कार्यालय में धरने की शुरुआत से ही सक्रिय हैं। सिसोदिया ने बुधवार को ट्विट किया - दिल्ली की जनता को उसका हक दिलाने और उसके रुके हुए काम कराने के लिए आज से मैं भी अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ रहा हूं। सत्येंद्र जैन का अनशन भी कल से जारी है।

केजरीवाल ने मंगलवार को एक वीडियो जारी किया था और कहा था कि मंत्रियों के साथ उप राज्यपाल के कार्यालय में धरने पर बैठने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था क्योंकि अनिल बैजल कई बार अनुरोध करने के बावजूद दिल्ली सरकार की मांगों पर ध्यान नहीं दे रहे थे। दिल्ली के इतिहास में यह पहली बार है जब मुख्यमंत्री और उनके कैबिनेट सहयोगियों ने अपनी मांगों को लेकर उप राज्यपाल के दफ्तर में रात गुजारी हों। दिल्ली प्रदेश भाजपा ने धरने की आलोचना करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र का मजाक है।

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