इलाहाबाद हाई कोर्ट परिसर स्थित मस्जिद मामले में यथास्थिति का आदेश

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय परिसर में स्थित एक मस्जिद के संबंध में सोमवार को यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया। उच्च न्यायालय ने पिछले साल नवंबर में इस संरचना को हटाने का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने वक्फ बोर्ड की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल और अन्य से जवाब मांगा है।

उच्च न्यायालय ने वक्फ बोर्ड को आठ नवंबर, 2017 को तीन महीने के भीतर इस मस्जिद को परिसर से बाहर ले जाने का आदेश दिया था। इस मामले में सोमवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि शीर्ष अदालत ने पहले भी राज्य सरकार को इसका समाधान खोजने के लिये कहा था परंतु अभी तक कुछ हुआ नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मस्जिद 1950 से वहां है और इसे ऐसे ही बाहर ले जाने का आदेश नहीं दिया जा सकता। सिब्बल ने कहा कि उच्च न्यायालय का विस्तार हो रहा है और इसी वजह से वह मस्जिद को हटाना चाहते हैं।

पीठ ने जब यह कहा कि वह याचिका पर नोटिस जारी कर रही है तो सिब्बल ने कहा कि न्यायालय को साथ ही यथास्थित बनाये रखने का भी आदेश देना चाहिए क्योंकि इस तरह से मस्जिद को गिराया नहीं जा सकता। पीठ ने सिब्बल के तर्क से सहमति व्यक्त करते हुये वहां यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने 14 मई को उप्र सरकार से कहा था कि उच्च न्यायालय परिसर के भीतर स्थित मस्जिद को अन्यत्र ले जाने के लिये एक भूखंड आबंटित करने की संभावना तलाशें। न्यायालय ने उप्र सरकार के वकील से कहा था कि वह मस्जिद को अन्यत्र ले जाकर ‘समस्या के समाधान’ के लिये आवश्यक निर्देश प्राप्त करे।

उच्च न्यायालय ने दो अप्रैल को शीर्ष अदालत से कहा था कि उसके पास मस्जिद के लिये कोई वैकल्पिक भूखंड नहीं है और राज्य सरकार इसे अन्यत्र स्थानांतरित करने पर विचार कर सकती है। उच्च न्यायालय ने कहा था कि उसके पास वकीलों के वाहनों की पार्किंग के लिये भी स्थान की कमी है। वक्फ बोर्ड ने उच्च न्यायालय के इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। शीर्ष अदालत ने इससे पहले सभी पक्षकारों को इस बिन्दु पर एकराय बनाने के लिये कहा था कि मस्जिद को कहां स्थानांतरित किया जाना चाहिए।

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