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पेट्रोल, डीजल पर टैक्स नहीं घटेगे!

नई दिल्ली। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी साफ कर दिया है कि सरकार पेट्रोल और डीजल के दाम कम करने के लिए उत्पाद शुल्क में कटौती नहीं करने जा रही है। गौरतलब है कि धर्मेंद्र प्रधान पहले ही इस संभावना से इनकार कर चुके हैं। अब जेटली ने कहा है कि उत्पाद शुल्क में कमी करने जैसा कोई भी कदम नुकसानदेह हो सकता है।

अरुण जेटली ने पेट्रोल, डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती की संभावना को सोमवार को एक तरह से खारिज करते हुए कहा कि इस तरह का कोई भी कदम नुकसानदायक हो सकता है। इसके साथ ही उन्होंने नागरिकों से कहा कि वे अपने हिस्से के करों का ईमानदारी से भुगतान करें, जिससे पेट्रोलियम पदार्थों पर राजस्व के स्रोत के रूप में निर्भरता कम हो सके।

जेटली ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम के पेट्रोल के दाम में 25 रुपए प्रति लीटर तक की कटौती के सुझाव को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह फंसाने वाला सुझाव हो सकता है। हालांकि मनमोहन सिंह की सरकार के समय जब पेट्रोल की कीमत 70 रुपए प्रति लीटर से ऊपर गई थी तब भाजपा के नेता प्रकाश जावडेकर ने प्रेस कांफ्रेंस करके बताया था कि कैसे इसमें 30 रुपए प्रति लीटर तक की कटौती हो सकती है।

बहरहाल, अरुण जेटली ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा है - सिर्फ वेतनभोगी वर्ग ही अपने हिस्से का कर अदा करता है। जबकि ज्यादातर अन्य लोगों को अपने कर भुगतान के रिकार्ड को सुधारने की जरूरत है। यहीं वजह है कि भारत अभी तक एक कर अनुपालन वाला समाज नहीं बन पाया है। जेटली ने लिखा है - मेरी राजनीतिज्ञों और टिप्पणीकारों से अपील है कि गैर तेल कर श्रेणी में चोरी रुकनी चाहिए। यदि लोग ईमानदारी से कर अदा करेंगे तो कराधान के लिए पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता को कम किया जा सकेगा।

जेटली ने कहा है - उपभोक्ताओं को राहत सिर्फ राजकोषीय रूप से जिम्मेदार और वित्तीय दृष्टि से मजबूत केंद्र सरकार और वे राज्य दे सकते हैं, जिनको तेल कीमतों में असामान्य बढ़ोतरी की वजह से अतिरिक्त राजस्व मिल रहा है। उन्होंने कहा कि नई प्रणाली में अनुपालन के ऊंचे स्तर के बावजूद गैर तेल कर के मामले में भारत अभी भी कर अनुपालन वाला समाज नहीं बन पाया है। उन्होंने कहा - वेतनभोगी वर्ग कर अनुपालन वाला है। अन्य वर्गों को अभी इस बारे में अपना रिकार्ड सुधारने की जरूरत है।

नई दिल्ली। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी साफ कर दिया है कि सरकार पेट्रोल और डीजल के दाम कम करने के लिए उत्पाद शुल्क में कटौती नहीं करने जा रही है। गौरतलब है कि धर्मेंद्र प्रधान पहले ही इस संभावना से इनकार कर चुके हैं। अब जेटली ने कहा है कि उत्पाद शुल्क में कमी करने जैसा कोई भी कदम नुकसानदेह हो सकता है।

अरुण जेटली ने पेट्रोल, डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती की संभावना को सोमवार को एक तरह से खारिज करते हुए कहा कि इस तरह का कोई भी कदम नुकसानदायक हो सकता है। इसके साथ ही उन्होंने नागरिकों से कहा कि वे अपने हिस्से के करों का ईमानदारी से भुगतान करें, जिससे पेट्रोलियम पदार्थों पर राजस्व के स्रोत के रूप में निर्भरता कम हो सके।

जेटली ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम के पेट्रोल के दाम में 25 रुपए प्रति लीटर तक की कटौती के सुझाव को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह फंसाने वाला सुझाव हो सकता है। हालांकि मनमोहन सिंह की सरकार के समय जब पेट्रोल की कीमत 70 रुपए प्रति लीटर से ऊपर गई थी तब भाजपा के नेता प्रकाश जावडेकर ने प्रेस कांफ्रेंस करके बताया था कि कैसे इसमें 30 रुपए प्रति लीटर तक की कटौती हो सकती है।

बहरहाल, अरुण जेटली ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा है - सिर्फ वेतनभोगी वर्ग ही अपने हिस्से का कर अदा करता है। जबकि ज्यादातर अन्य लोगों को अपने कर भुगतान के रिकार्ड को सुधारने की जरूरत है। यहीं वजह है कि भारत अभी तक एक कर अनुपालन वाला समाज नहीं बन पाया है। जेटली ने लिखा है - मेरी राजनीतिज्ञों और टिप्पणीकारों से अपील है कि गैर तेल कर श्रेणी में चोरी रुकनी चाहिए। यदि लोग ईमानदारी से कर अदा करेंगे तो कराधान के लिए पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता को कम किया जा सकेगा।

जेटली ने कहा है - उपभोक्ताओं को राहत सिर्फ राजकोषीय रूप से जिम्मेदार और वित्तीय दृष्टि से मजबूत केंद्र सरकार और वे राज्य दे सकते हैं, जिनको तेल कीमतों में असामान्य बढ़ोतरी की वजह से अतिरिक्त राजस्व मिल रहा है। उन्होंने कहा कि नई प्रणाली में अनुपालन के ऊंचे स्तर के बावजूद गैर तेल कर के मामले में भारत अभी भी कर अनुपालन वाला समाज नहीं बन पाया है। उन्होंने कहा - वेतनभोगी वर्ग कर अनुपालन वाला है। अन्य वर्गों को अभी इस बारे में अपना रिकार्ड सुधारने की जरूरत है।

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