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अस्पताल, दवा और गैस का कोई बकाया न रखें: योगी

लखनऊ। गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कालेज में 30 बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद प्रदेश का चिकित्सा शिक्षा विभाग विशेष रूप से सतर्क हो गया है। और उसने प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कालेजों और बड़े चिकित्सा संस्थानों को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि वह अपने अपने संस्थानों में किसी भी प्रकार की दवा और आक्सीजन की कमी न न होने दें और यदि किसी गैस आपूर्तिकर्ता का कोई बकाया हो उसका भुगतान तुरंत किया जाए।

अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा शिक्षा अनीता भटनागर जैन ने बताया कि यह निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पहले भी सभी 21 संस्थानों को दिए गए थे लेकिन कल गोरखपुर के हादसे के बाद यह निर्देश एक बार फिर सभी संस्थानों के प्रमुखों को भेजे गए हैं।

गौरतलब है कि कल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पत्रकारों को बताया था कि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में बच्चों की मौत आक्सीजन की कमी की वजह से नहीं हुई है। अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा शिक्षा) जैन ने रविवार को कहा कि गोरखपुर के हादसे के बाद हमने प्रदेश के नौ सरकारी मेडिकल कालेजों और 12 अन्य बड़े चिकित्सीय संस्थानो के ​प्राचार्य और मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों को लिखित निर्देश दिए हैं कि वह यह सुनिश्चित करें कि उनके मेडिकल कालेज या चिकित्सीय संस्थान में दवा और आक्सीजन की कमी न होने पाये और यदि किसी गैस सप्लायर्स का कोई भी पैसा बाकी हो तो उसका भुगतान तुरंत कर दिया जाएं। संस्थान में किसी भी तरह आक्सीजन की कमी न होने पाए और आक्सीजन का पर्याप्त स्टाक सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने कहा 'प्रदेश के सभी मेडिकल कालेज के प्राचार्य को व्यक्तिगत रूप से यह सु​निश्चित करना है कि दवाओं में कोई कमी न हो, जहां पर गैस की आपूर्ति होती है वहां सारे भुगतान तुरंत कर दिए जाएं, इसमें कोई ढिलाई न बरती जाए। व्यक्तिगत रूप से वह देखे कि किसी भी तरह के भुगतान में कोई देरी न हो और मेडिकल कालेज और सरकारी अस्पतालों में दवाओं और गैस की सप्लाई में कोई कमी न हो। ' उन्होंने कहा कि वैसे गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कालेज में बच्चों की मौत आक्सीजन की कमी की वजह से नहीं हुई है, जांच में साफ हो गया है कि वहां बच्चों की मौत बीमारियों की वजह से हुई है। और जहां तक बाबा राघव दास मेडिकल कालेज गोरखपुर की बात है तो वहां तो गैस का भुगतान भी पहले ही कर दिया गया था। इसी लिये सभी प्रिसिंपल और चिकित्सा संस्थानो के प्रमुखों से कहा गया है कि वह दवाओं और गैस की मानीटरिंग स्वंय करें और भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी न करें और इस बारे में शासन को भी अवगत करायें । अगर कोई परेशानी होती है तो तुरंत शासन को उससे अवगत करायें।

जैन ने कहा कि यह मौसम बीमारियों का मौसम है इसलिए सभी मेडिकल कालेजो के प्राचार्यो और चिकित्सा संस्थानो के प्रमुखों को पहले भी चिटठी भेज कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए थे अब एक बार फिर कल 12 अगस्त को इन सभी को चिटठी भेजकर हाईएलर्ट पर रहने को कहा गया है।

उत्तर प्रदेश में नौ सरकारी मेडिकल कालेज है। यह मेडिकल कालेज लखनऊ, कानपुर, आगरा, इलाहाबाद, मेरठ, झांसी, गोरखपुर, सैफेई और अंबेडकर नगर में है। इसके अलावा 12 बड़े चिकित्सीय संस्थान है जो राज्य सरकार के अन्तर्गत आते है।

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