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यूपी, झारखंड में रोचक हुआ राज्यसभा चुनाव!

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की दस और झारखंड की दो राज्यसभा सीटों सहित कुल 25 सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान होगा। राज्यसभा के दोवार्षिक चुनावों के लिए 33 सीटों पर निर्विरोध चुनाव हो चुका है। बची हुई सीटों के लिए राज्यों की राजधानियों में शुक्रवार को वोट डाले जाएंगे और शाम में वोटों की गिनती होगी। वैसे तो पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में भी राज्यसभा के चुनाव होने हैं पर सबकी नजर उत्तर प्रदेश और झारखंड पर है।

उत्तर प्रदेश की दसवीं सीट का मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। भाजपा इस सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर लड़ रहे बड़े कारोबारी अनिल अग्रवाल का समर्थन कर रही है तो दूसरी ओर सपा, कांग्रेस और रालोद की ओर से बसपा प्रत्याशी भीमराव अंबेडकर को समर्थन दिया गया है। लोकसभा की दो सीटों के उपचुनाव में सपा उम्मीदवार का समर्थन करने के बाद बसपा ने राज्यसभा की एक सीट के लिए सपा का समर्थन मांगा है। सो, सपा प्रमुख अखिलेश यादव जी जान से बसपा उम्मीदवार की मदद में जुटे हैं।

अखिलेश ने बुधवार को पार्टी विधायकों की बैठक की और उनके लिए रात्रिभोज दिया। निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को उन्होंने खुद फोन करके बुलाया, जिसके बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदला है। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा में एक उम्मीदवार की जीत के लिए 37 वोट की जरूरत है। 403 सदस्यों की विधानसभा में सपा के 47 सदस्य हैं। उसके पास अपनी उम्मीदवार जया बच्चन को चुनाव जिताने के बाद भी तकनीकी रूप से 10 वोट बच जाएंगे। बसपा के पास 19 वोट हैं जबकि कांग्रेस के पास सात और राष्ट्रीय लोकदल के पास एक वोट है। ऐसे में इन दलों का गठबंधन ही दसवें सदस्य को राज्यसभा भेज सकता है, मगर जरा सी भी गड़बड़ी सारा गणित बिगाड़ सकती है।

दूसरी ओर 324 विधायकों के दम पर आठ सीटें आराम से जीत सकती है। इसके बाद उसके पास 28 वोट बचते हैं। उसे नौ विधायकों का जुगाड़ करना है। बताया जा रहा है कि पार्टी की ओर से सभी विपक्षी पार्टियों में सेंध लगाने का प्रयास हो रहा है, जिससे विपक्षी पार्टियों में चिंता है। जेल में बंद बसपा विधायक मुख्तार अंसारी को वोट डालने की अनुमति पर हाई कोर्ट के रोक लगाने से भी विपक्ष की चिंता बढ़ी है। भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली भी उत्तर प्रदेश से ही चुनाव मैदान में हैं और वे पार्टी के पहले उम्मीदवार हैं।

उधर झारखंड में भी मामला दिलचस्प हो गया है। भाजपा के पास अपना पहला उम्मीदवार जिताने के बाद 20 वोट बचते हैं। ऐसे में उसे दूसरी सीट जीतने के लिए सात और वोट की जरूरत है। दूसरी ओर विपक्ष के पास कांग्रेस उम्मीदवार को जिताने के लिए 26 वोट पहले से हैं और उसे एक वोट का इंतजाम करना है। जानकार सूत्रों के मुताबिक भाजपा के प्रबंधक कांग्रेस और जेएमएम के कुछ विधायकों को गैरहाजिर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

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