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ढाई दिन में विदा हुए येदियुरप्पा!

बेंगलुरू। कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा को शपथ दिलाने के बाद उनकी सरकार बचाने के लिए चलाया गया ऑपरेशन लोटस फेल हो गया। भाजपा के सारे प्रबंधक बहुमत के लिए जरूरी आठ विधायकों का जुगाड़ नहीं कर सके और इसलिए बहुमत साबित करने की बजाय येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर येदियुरप्पा को शनिवार को शाम चार बजे विधानसभा में बहुमत साबित करना था। उन्होंने विश्वास मत का प्रस्ताव पेश भी किया पर उस पर एक भावुक भाषण देने के बाद इस्तीफा देने की घोषणा कर सदन से निकल गए।

विधानसभा से निकल कर येदियुरप्पा सीधे राज्यपाल वजुभाई वाला से मिलने गए और उनको अपना इस्तीफा सौंपा। राज्यपाल ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इस्तीफे से पहले विधानसभा में विश्वास मत पर येदियुरप्पा ने एक भावुक भाषण दिया। उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि उनकी सरकार को बहुमत साबित करने से रोकने के लिए कांग्रेस ने साजिश रची थी। येदियुरप्पा के इस कदम से 1996 में बनी अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार का इतिहास दोहराया गया है। उन्होंने भी इसी तरह विश्वास मत पर भाषण के बाद इस्तीफे की पेशकश की थी।

बहरहाल, येदियुरप्पा ने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता ही सब कुछ होता है और वे उनके फैसले को स्वीकार करते हैं। उन्होंने भरे गले से कहा कि जब तक उनकी सांस चलेगी वे कर्नाटक के हितों के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने खासतौर से किसानों के लिए काम करने का संकल्प जाहिर किया। येदियुरप्पा ने कहा कि अगला विधानसभा चुनाव पांच साल के बाद या उससे पहले भी हो सकते हैं और उन्हें भरोसा है कि वे उसमें बहुमत के साथ जीत कर आएंगे।

गौरतलब है कि 15 मई को आए नतीजों में भाजपा 104 सीट जीत कर सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी। पर भाजपा को रोकने के लिए नाटकीय घटनाक्रम में कांग्रेस ने विधानसभा की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी जेडीएस को समर्थन देकर उसके नेता एचडी कुमारस्वामी को सीएम बनाने का दांव चला। कांग्रेस के 78 और जेडीएस के 37 विधायक हैं। राज्यपाल वजुभाई वाला ने उनके दावे को दरकिनार कर सबसे बड़ी पार्टी होने के हवाले येदियुरप्पा को शपथ दिलाई और बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया। कांग्रेस और जेडीएस ने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी, जिसके बाद अदालत ने सरकार को एक दिन में बहुमत साबित करने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर येदियुरप्पा सरकार को शनिवार को बहुमत साबित करना था। लेकिन बहुमत का जुगाड़ नहीं हो पाने के कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे से पहले उन्होंने अपने भावुक भाषण में कहा कि वे राज्य का दौरा करेंगे और लोगों को बताएंगे कि किन परिस्थितियों में उन्हें मुख्यमंत्री बने रहने से रोका गया। उन्होंने किसानों की समस्याओं के बारे में विस्तार से बोला और कहा कि कांग्रेस के कुशासन के कारण तीन हजार से अधिक किसानों ने आत्महत्या कर ली है। येद्दियुरप्पा ने कहा कि उनका जीवन संघर्ष से भरा हुआ और किसानों के हितों को लेकर समर्पित रहा है। उन्होंने कहा- मैं जब तक जिंदा रहूंगा किसानों के लिए काम करता रहूंगा।

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