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दंगों के मुकदमे वापस, कांग्रेस के सवाल!

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़े कुछ मुकदमे वापस लेने के मामले में कांग्रेस ने राज्य की भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने पूछा है कि क्या कोई भी मुकदमा धार्मिक आधार पर वापस लिया जा सकता है? कांग्रेस ने यह भी कहा कि कुछ चुनिंदा मामलों की बजाय इसमें सभी मुकदमों की समीक्षा क्यों नहीं की जानी चाहिए? गौरतलब है कि राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि इनमें कुछ मुकदमे राजनीति से प्रेरित हैं और सरकार उनको वापस ले सकती है।

इसे लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर व शामली आदि में हुए दंगों में दुर्भाग्य से 62 लोगों की जानें गईं और 503 मुकदमे दर्ज किए गए। अब इनमें से कुछ मुकदमे वापस किए जा रहे हैं। असल में भाजपा के सांसद संजीव बालियान वे दूसरे नेताओं ने पांच फरवरी 2018 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक ज्ञापन देकर 179 मामलों को वापस लेने की मांग की।

सुरजेवाला ने योगी सरकार और भाजपा से चार सवाल पूछे। उन्होंने पूछा - अगर दंगों के मामलों की समीक्षा ही करनी है तो केवल 179 की ही क्यों, पूरे 503 मुकदमों की क्यों नहीं? क्या गंभीर अपराध वाले मुकदमों को कोई सरकार राजनीतिक मुकदमें बता कर वापस ले सकती है? क्या संविधान या कानून के अनुसार धर्म के आधार पर मुकदमों की वापसी हो सकती है? क्या मुख्यमंत्री इन मुकदमों को इसलिए तो वापस नहीं ले रहे क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में कहा था कि राजनीतिक नेताओं के खिलाफ मामलों की फास्ट ट्रैक अदालत में सुनवाई होनी चाहिए?

इससे पहले गुरुवार को ही उत्तर प्रदेश के कानून मंत्री बृजेश पाठक ने लखनऊ में कहा कि राज्य सरकार सांप्रदायिक दंगों के राजनीति से प्रेरित पाए जाने वाले मुकदमों की वापसी पर विचार कर सकती है। पाठक ने कहा- आईपीसी के तहत दंगों के मुकदमें भी आते हैं। ऐसे मुकदमे अगर राजनीति से प्रेरित पाए गए तो हम उन्हें वापस लेने के बारे में निश्चित रूप से विचार करेंगे।

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