राहुल और उनके लोगों के बिना चुनाव

महाराष्ट्र और हरियाणा का चुनाव इस मामले में भी खास है कि अरसे बाद कांग्रेस राहुल गांधी के बगैर चुनाव लड़ रही है। वैसे तो राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष 2017 के आखिर में बने थे पर उससे पहले ही उपाध्यक्ष के नाते वे पार्टी संभालने लगे थे। 2014 का चुनाव राहुल गांधी और उनके चुने हुए लोगों ने ही पार्टी को लड़वाया था। पिछला लोकसभा चुनाव भी उन्हीं की कमान में हुआ और उनके चुने हुए लोगों ने लड़वाया। पर इस बार तस्वीर अलग है। इस बार न राहुल गांधी हैं और न उनके चुने हुए लोग हैं।
महाराष्ट्र और हरियाणा दोनों जगह दो हफ्ते में यानी ठीक 14 दिन बाद चुनाव प्रचार बंद हो जाएगा। पर अभी तक राहुल गांधी की एक भी चुनावी सभा इन राज्यों में नहीं हुई है। क्या कांग्रेस ने सोशल मीडिया में भाजपा के इस प्रचार को स्वीकार कर लिया है कि राहुल गांधी उसके लिए सबसे बड़े प्रचारक हैं? उनके प्रचार करने से भाजपा को फायदा होता है? बहरहाल, पता नहीं क्या कारण है पर लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद पिछले करीब चार महीने में राहुल गांधी यहां वहां तो दिखे पर इन दोनों राज्यों में नहीं दिखे, जहां चुनाव हो रहे हैं। सबको पता था कि अक्टूबर में इन राज्यों मे चुनाव होना है पर चुनाव पूर्व तैयारियों के सिलसिले में भी राहुल की यात्रा इन राज्यों में नहीं हुई। महाराष्ट्र में एनसीपी से समझौते से लेकर दोनों राज्यों में टिकटों के बंटवारे और चुनाव की रणनीति से बनाने से लेकर घोषणापत्र बनाने तक में कहीं भी राहुल गांधी नहीं दिखे हैं। पहले उनके चुने हुए लोग राज्यों में चुनाव लड़वाते रहे थे। महाराष्ट्र में उनकी जिद में आखिरी तीन साल तक लगातार पृथ्वीराज चव्हाण मुख्यमंत्री रहे। राहुल के ही चुने हुए नेता संजय निरूपम और मिलिंद देवड़ा मुंबई में पार्टी का चेहरा रहे। हरियाणा में भी कांग्रेस के बहुत करीबी रहे अशोक तंवर छह साल से पार्टी के अध्यक्ष थे और उनकी देखरेख में पार्टी ने दो लोकसभा और एक विधानसभा का चुनाव लड़ा। पर इस बार के चुनाव में महाराष्ट्र में न तो पृथ्वीराज चव्हाण दिख रहे हैं और न अशोक चव्हाण, न संजय निरूपम दिख रहे हैं और न मिलिंद देवड़ा। ऐसे ही हरियाणा में तो अशोक तंवर बागी हो गए हैं और पार्टी के खिलाफ अनापशनाप बयानबाजी कर रहे हैं।
सो, कांग्रेस यह चुनाव राहुल गांधी के बगैर लड़ रही है। वे प्रचार के लिए जरूर जाएंगे पर वे कमान में नहीं हैं। सोनिया गांधी कमान में हैं पर वे प्रचार के लिए नहीं जाएंगी क्योंकि उनकी सेहत ठीक नहीं है। प्रियंका गांधी सक्रिय राजनीति में उतर गई हैं पर वे महाराष्ट्र व हरियाणा के प्रचार में नहीं जाएंगी क्योंकि वे उत्तर प्रदेश की प्रभारी हैं और कांग्रेस को उनकी ब्रांड वैल्यू को बनाए रखने की बड़ी चिंता है। और इस तरह कांग्रेस भगवान भरोसे चुनाव लड़ेगी!

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