फैसले का कैसे होगा इस्तेमाल?

सोचें, फैसला यदि मंदिर के पक्ष में आता है तो भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद इसका कैसा इस्तेमाल करेंगे, इसकी फिलहाल कल्पना ही की जा सकती है। कहने को सबको संयम बरतने की सलाह दी जा रही है पर सबको पता है कि फैसले के बाद कोई संयम नहीं बरतने वाला है। देश भर में जुलूस निकलेगा, राम शिला पूजन होगा, मंदिर निर्माण का जश्न मनाया जाएगा। इससे जो माहौल बनेगा उसका बड़ा राजनीतिक फायदा भाजपा के खाते में जाएगा। जिस समय फैसला आएगा, उस समय झारखंड के पहले चरण के लिए प्रचार चरम पर होगा। झारखंड की 81 सीटों पर पांच चरण में मतदान होगा। इसका मतलब है कि पांचों चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से लेकर सारे छोटे बड़े नेता प्रचार कर रहे होंगे।

बड़े नेता परोक्ष रूप से और छोटे नेता प्रत्यक्ष रूप से राम मंदिर निर्माण का श्रेय भाजपा को देंगे। भाजपा इसी मुद्दे पर वोट मांगेगी। जैसे महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनाव में कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया गया था। इसके सहारे भाजपा ने राष्ट्रवाद के मुद्दे पर वोट मांगा था, जिसका उसे फायदा भी मिला। पांच साल सरकार चलाने के बाद भाजपा एक बार फिर दोनों राज्यों में सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी। हालांकि उसका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा पर अगर अनुच्छेद 370 का मुद्दा नहीं होता तो भाजपा को इतनी भी सीटें नहीं आतीं।

भाजपा को अंदाजा है कि आर्थिकी जिस हालत में है और लोग जितने परेशान हैं, उसमें लोगों को बरगलाने के लिए बड़े भावनात्मक मुद्दे की जरूरत है। भाजपा को अनुच्छेद 370 की ताकत का अहसास हो गया है। इसलिए वह अयोध्या को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। उस मुद्दे पर अधिकतम प्रचार होगा और ज्यादा से ज्यादा चुनावी लाभ लेने का प्रयास किया जाएगा। बहरहाल, झारखंड और दिल्ली के बाद बिहार विधानसभा का भी चुनाव होना है। ध्यान रहे अयोध्या आंदोलन के समय बिहार इसका एक बड़ा प्रतीक बन गया था। बिहार के समस्तीपुर में ही तब के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने लालकृष्ण आडवाणी का राम रथ रोका था और आडवाणी को गिरफ्तार किया था। सो, बिहार के चुनाव में भी राम मंदिर बड़ा मुद्दा होगा। अगर झारखंड और दिल्ली में इसका सकारात्मक प्रभाव दिखा तो भाजपा बिहार में जदयू से अलग होकर अकेले लड़ने का जोखिम उठा सकती है। सो, कम से कम तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में अयोध्या का फैसला बड़ा मुद्दा होगा और इस पर चुनाव लड़ा जाएगा।

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