अयोध्या पर जबरदस्ती का हल्ला

व्यर्थ हल्ला और चिंता है कि सुप्रीम कोर्ट फैसला देगा तो न जाने क्या होगा? टीवी चैनलों, मीडिया और सरकारी सूत्रों से बंदोबस्तों की जितनी-जैसी आंशकाएं हैं उस अनुसार कुछ भी नहीं होना है। निश्चित ही मंदिर के पक्ष में फैसला हुआ तो वह भाजपा के लिए पौ-बारह होगी। बतौर जश्न अयोध्या में लोगों को पहुंचाने में कमी नहीं रखी जाएगी। बावजूद इसके अपना मानना है कि फैसले को दोनों पक्ष मौटे तौर पर सहजता से लेंगे। लोग भावनात्मक तौर पर वैसे उद्वेलित नहीं होंगे कि जैसे 6 दिसंबर 1992 के दिन हुए थे!

वह दिन, 6 दिसंबर 1992 का दिन, सचमुच अपनी याददास्त का (भारत और आजाद भारत के इतिहास में भी) अवर्णनीय, भावनाओं की महासुनामी वाला था। वह भारत का, हिंदू-मुस्लिम रिश्तों के इतिहास का अमिट दिन था। कल, आज और कल याकि भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों को लिए हुए था। इस पर मुस्लिम, हिंदू और सेकुलर सब अपनी-अपनी व्याख्या कर सकते हंै, लोगों ने खूब की भी है। उस दिन के ध्वंस से ही बाद की घटनाएं, हिंसा व राजनैतिक परिणाम है। अयोध्या के इतिहास के दो ही अमिट समय हंै। या तो बाबर के वक्त में मंदिर ध्वंस का या 1992 में मस्जिद ध्वंस का। बाबर और उसके सूबेदार मीर बाकी ने 1527 से पहले जिस दिन मंदिर का ध्वंस किया उस वक्त हिंदू पराजित और पस्त थे। इसलिए यह समझना मुश्किल नहीं कि उस कालखंड में मंदिर ध्वंस को हिंदु मानस ने किस भाव लिया होगा। ठीक विपरीत 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में हिंदू कार सेवकों, नेताओं के जमावड़े में जो ध्वंस हुआ उसने करोड़ो-करोड़ हिंदुओं में, वैश्विक मानस में जो बिजली कड़काई वह कभी भूलाई नहीं जा सकती। उस दिन का ध्वंस और ध्वंस के पीछे की भावना, जीत-हार का नजरिया कयामत तक याद किया जाता रहेगा न कि झगड़े में अलग-अलग वक्त की घटनाएं या फैसले व निर्माण!

मतलब 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में जो हो गया, वही धुरी है जिस पर सरकार, राजनीति, कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट सब केंद्रीत है। लोगों मतलब हिंदू और मुसलमान दोनों के लिए तो उस दिन जो हुआ वह कयामत तक याद रहेगा!

तभी सुप्रीम कोर्ट का फैसला लोगों के मनोविश्व को कतई वैसे उद्वेलित नहीं करने वाला है जैसे 6 दिसंबर 1992 के दिन लोग हुए थे और न ही इसका राजनैतिक नफा-नुकसान दीर्घकालिक मतलब लिए होगा। मगर हां, भारत राष्ट्र-राज्य के संविधान, कानून, व्यवस्था में जरूर यह स्थाई सवाल बनना है कि धर्म व आस्था में अब आगे क्या?

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