अयोध्या बाद के चुनाव!

झारखंड में विधानसभा चुनाव की शुरुआत हो गई है। 30 नवंबर को पहले चरण का मतदान होना है और उसके लिए नामांकन प्रक्रिया चल रही है। इस चुनाव के ऐन बीच में अयोध्या में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद की भूमि विवाद का अंतिम और निर्णायक फैसला आना है। सर्वोच्च अदालत 17 नवंबर से पहले किसी भी दिन इसका फैसला सुनाएगी। इसका मतलब है कि झारखंड का चुनाव अयोध्या फैसले की पृष्ठभूमि में होगा। इसके तुरंत बाद दिल्ली के विधानसभा चुनाव की घोषणा होगी। वह चुनाव भी अय़ोध्या मामले की छाया में होगा।

वैसे यह पहला मौका नहीं है, जब अयोध्या मसले पर चुनाव होगा और भाजपा इस मुद्दे पर वोट मांगेगी। फर्क इतना है कि पहले भाजपा का नारा होता था- सौगंध राम की खाते हैं, मंदिर वहीं बनाएंगे। अब ज्यादा संभावना सौगंध पूरे करने के नारे की है। अयोध्या का ऐतिहासिक मसला निपट जाने के बाद का यह चुनाव होगा। भाजपा कहेगी कि उसने अयोध्या में, राम की जन्मभूमि में मंदिर का फैसला करा दिया।

सो एजेंडा हर हाल में अयोध्या में मंदिर निर्माण का है। अदालत के फैसले में भी इंतजार सिर्फ इस बात का है कि सर्वोच्च अदालत पूरी जमीन रामलला को देती है या वह भी इलाहाबाद हाईकोर्ट की तरह जमीन का बंटवारा करती है। अदालत ने सुनवाई के दौरान दो टूक कहा है कि यह कोई आस्था का मामला नहीं है। यह भी विडंबना है कि भाजपा पहले लगातार कहती रही है कि राम मंदिर आस्था का मामला है औऱ कोई अदालत इस पर फैसला नहीं कर सकती है। पर जब अदालत ने कहा कि यह आस्था का नहीं, जमीन का मामला है तो भाजपा ने भी कहा कि वह अदालत के फैसले का सम्मान करेगी।

बहरहाल, अदालत आस्था का मामला मान कर नहीं, बल्कि जमीन के टाइटल सूट होने के विवाद का पहलू लिए हुए है। चूंकि यह जमीन विवाद का मामला है और जमीन पर मालिकाना हक साबित करने वाला कोई भी दस्तावेज किसी पक्ष ने नहीं पेश किया है इसलिए फैसला पूरी तरह से अदालत के विवेक पर निर्भर होगा। तभी भाजपा के नेताओं ने पहले ही कहना शुरू कर दिया है कि फैसला उनके पक्ष में आएगा। कई नेता तो मंदिर निर्माण की तारीख भी बता रहे हैं। भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद तीनों कह रहे हैं कि अदालत का जो भी फैसला होगा उसे वे मानेंगे, इससे भी यहीं मतलब निकाला जा रहा है कि उनको फैसला अपने पक्ष में आने की उम्मीद है।

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