अयोध्या झांकी, मथुरा-काशी बाकी

अयोध्या आंदोलन के समय भाजपा का नारा होता था- अयोध्या तो झांकी है, मथुरा-काशी बाकी है। सो, संभव है कि अयोध्या के बाद मथुरा और काशी का मुद्दा उठे। ध्यान रहे सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मसले पर सुनवाई के आखिरी चरण में मध्यस्थता का एक और प्रस्ताव आय़ा था, जिसमें कहा गया था कि मुस्लिम पक्ष खुद ही जमीन पर दावा छोड़ने को तैयार पर बदले में वे चाहते हैं कि उन्हें दूसरी जगह जमीन दी जाए और यह वादा किया जाए कि अयोध्या की तरह किसी और जगह विवाद नहीं खड़ा किया जाएगा। पर यह प्रस्ताव आधिकारिक रूप से सामने नहीं आय़ा और इसलिए इस पर चर्चा नहीं हुई।

जाहिर है कि मुस्लिम पक्ष को अंदेशा है कि अयोध्या पर फैसले के बाद इस किस्म के विवादों का पिटारा खुलेगा। मुस्लिम शासकों की कथित ऐतिहासिक गलतियों को ठीक करने का देशव्यापी अभियान छिड़ सकता है। गौरतलब है कि भारत में आजादी के तुरंत बाद यह कानून बना था कि 1947 में जिस धार्मिक इमारत की जैसी स्थिति थी उसे वैसी ही स्थिति में रहने दिया जाएगा। यानी उसके साथ छेड़छाड़ नहीं होगी। अब अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अयोध्या में विवादित ढांचे की जगह की 1947 वाली स्थिति बदलती है तो फिर इससे विवाद खत्म नहीं होगा, बल्कि एक साथ अनेक विवादों की शुरुआत होगी। यह भी संभव है कि मथुरा व काशी से लेकर आगरा के ताजमहल तक निशाने पर आएंगे। अगर सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या को आखिरी और अपवाद मुद्दा बता कर फैसला नहीं सुनाया तो इसी फैसले के आधार पर देश भर की अनेक इमारतों का मुद्दा अदालतों में पहुंचेगा। जितने ज्यादा मुद्दे अदालत में पहुंचंेगे, उसी अनुपात में उन मुद्दों पर राजनीति होगी और चुनाव प्रचार होगा।

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